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भावना सोमाया का कॉलम:आमिर के साथ समस्या यह है कि वे जितने सहज हैं, उतने ही जटिल दिमाग के इंसान

10 महीने पहले
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भावना सोमाया, जानी-मानी फ़िल्म लेखिका, समीक्षक - Dainik Bhaskar
भावना सोमाया, जानी-मानी फ़िल्म लेखिका, समीक्षक

फिल्म निर्माता नासिर हुसैन ने अपने भतीजे आमिर ख़ान को पहली बार अपनी फिल्म ‘यादों की बारात’ में बाल कलाकार के रूप में एक छोटी-सी भूमिका करने को दी। हालांकि आमिर उस समय बहुत छोटे थे, लेकिन उसी समय उन्हें पूरा एहसास था कि वे इस फिल्म से अपने सपनों की एक ऐसी बुनियाद रखने जा रहे हैं जो लंबे समय तक बुर्ज बनकर लोगों को याद रहेगी। इसके बाद जल्दी ही उन्होंने ‘मदहोश’ फिल्म में भी एक बाल कलाकार का रोल किया।

इसके एक दशक बाद वे ‘मंज़िल-मंज़िल’ में असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के लिए तैयार थे। हमारी पत्रिका कुछ प्रमुख स्टार्स के बचपन के दिनों पर एक विशेष अंक निकालने जा रही थी। कई स्टार्स अपने बचपन की यादें लिख रहे थे। यह ‘कयामत से कयामत तक’ (1988) के रिलीज होने के तुरंत बाद की बात है। इस संबंध में मैं आमिर से मिली और उनसे भी हमारे विशेष अंक के लिए लिखने का आग्रह किया। आमिर मान तो गए, लेकिन एक शर्त रख दी - लिखे गए आलेख की एक भी लाइन न तो हटाई जाएगी और न ही संपादित की जाएगी।

मैं इसके लिए राजी नहीं हुई और अंतत: आमिर भी लिखने को राजी न हुए। अगले एक दशक में आमिर ने कई फ्लॉप तो कई सुपरहिट फिल्में दींं। इस दशक में बनी उनकी दो फिल्में कुछ खास वजहों से मुझे हमेशा याद रहती हैं। एक है ‘दिल है कि मानता नहीं’। हमने फिल्म की लीड जोड़ी आमिर और पूजा भट्‌ट के कवर शूट की योजना बनाई, लेकिन यह शूट नहीं हो सका। हुआ यूं कि आमिर लगातार पूजा की नुक्ताचीनी करते रहे।

तो पूजा ने तब तक तस्वीर खिंचवाने से मना कर दिया, जब तक कि वे माफी नहीं मांग लेते। वे दोनों ऐसे झगड़ रहे थे, मानों किंगरगार्डन के बच्चे हों और उधर हमारे फोटोग्राफर गौतम राज्यदक्ष उनके झगड़े के शांत होने का इंतजार ही करते रहे। आमिर कितने परिपक्व भी हो सकते हैं, इसका उदाहरण मुझे ‘बाज़ी’ फिल्म की शूटिंग के दौरान मिला। वहां पर मैं आमिर से मिलने पहुंची। उस रात उन्हें एक जटिल दृश्य की शूटिंग करनी थी।

शॉट के बाद आमिर ने कहा कि किसी भी दृश्य को किसी अभिनेता द्वारा अच्छे से अभिनीत करना निर्देशक के निर्देशन पर निर्भर करता है। आमिर के निर्देशक उनकी हद से ज्यादा सोचने और कई बार यह सनक के स्तर तक पहुंच जाने के आदी रहे हैं। इंद्रकुमार की ‘इश्क’ फिल्म की शूटिंग चल रही थी। गैराज में आमिर पर एक सीन शूट हो रहा था। तभी आमिर जोर से बोले- कट, कट! सभी चौंक गए कि अचानक ऐसा क्या हो गया!

आमिर बोले, ‘यार इंदु, ये पसीना तो वर्कआउट का पसीना लग रहा है, जबकि यह तो एक मैकेनिक का पसीना होना चाहिए। तो कुछ करो प्लीज़।’ कुछ देर की चुप्पी के बाद सभी जोर से हंस पड़े, क्योंकि इसका किसी के पास भला क्या जवाब होता! आमिर के साथ काम करने वाले हमेशा ऐसे सवालों के लिए तैयार रहते हैं। शबाना आजमी ने एक दिन आमिर को चाय पर बुलाया। उन्होंने आमिर से पूछा कि वे कितनी चम्मच शक्कर लेंगे? आमिर ने कहा, पहले आप चम्मच व कप का आकार बताइए।

आमिर ने स्वीकार किया कि वे घर के छोटे फैसले भी आसानी से नहीं ले पाते हैं। आमिर के साथ समस्या यह है कि वे जितने सहज हैं, उतने ही जटिल भी। साल 2001 में ‘लगान’ के प्रीव्यू के लिए मैं आमिर खान के साथ सफर कर रही थी। मैंने उनसे पूछा कि क्या आप फिल्म से संतुष्ट हैं? आमिर ने कार के व्हील स्टीयरिंग को ढोलक जैसा बजाया और फिर हल्के से मुस्करा दिए।

मुझे जवाब मिल गया था। बाद के सालों में दिल चाहता है, मंगल पांडे, रंग दे बसंती, तारे जमीन पर, 3 इडियट्स, पीके, दंगल, जैसी अलग-अलग फिल्मों में आमिर का अभिनय और भी निखरकर सामने आया। उम्मीद है ‘लाल सिंह चड्ढा’ में आमिर फिर नए आयाम स्थापित करेंगे। आज (14 मार्च) उनका जन्मदिवस है। उन्हें बहुत शुभकामनाएं।