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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:शेयर मार्केट धन का खेल, यह बाजार राजनीति को प्रभावित करने के साथ मुद्रा की कीमत का घटना-बढ़ना संचालित करता है

9 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

शेयर बाजार में निरंतर हलचल बनी रहती है। उद्योग-व्यवसाय क्षेत्र में धन की नदी के किनारे कुछ लोग लहरों की हू तू तू देखते हैं। मछुआरे जाल बिछाते हैं। कुछ लोग नदी के प्रवाह में संगीत को सुन लेते हैं। नावें मुसाफिर को दूसरे किनारे ले जाती हैं। नाव में माधुर्य है। मोटर बोट बेसुरी होती है। नाव खेने से जुड़े हुए गीत माधुर्य उत्पन्न करते हैं। राजेश खन्ना अभिनीत फिल्म ‘सफर’ में गीत था ‘ओ नदिया चले, चले रे धारा, चंदा चले, चले रे तारा, तुझको चलना होगा...।’

शेयर मार्केट नदी की तरह धन की लहरों के माध्यम से जीवन-मूल्यों का संकेत देता है। इस क्षेत्र में धीरूभाई अंबानी ने आम आदमियों को निवेश के लिए प्रेरित करके शेयर को हवेलियों से निकालकर आम आदमी तक पहुंचा दिया। यह बहुत बड़ा परिवर्तन सिद्ध हुआ। धीरुभाई के जीवन से प्रेरित मणिरत्नम की फिल्म ‘गुरु’ में अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय ने अभिनय किया था। सुचेता दलाल ने 1992 में ‘द स्कैम’ नामक खोजपरक किताब लिखी थी।

अभिषेक बच्चन अभिनीत फिल्म ‘द बिग बुल’ अब ओ.टी.टी पर प्रदर्शित हुई है। फिल्म में हेमंत शाह के जीवन से प्रेरित पात्र अभिषेक ने तथा इस घोटाले को उजागर करने वाली पत्रकार मीना राय की भूमिका इलियाना डिक्रूज ने की है। निर्देशक कुक्कू गुलाटी हैं। दरअसल, मध्यम आय वर्ग शेयर मार्केट से धन कमाने का प्रयास करता है। असमान अवसरों को जतन से रचा गया है और मनुष्य इसी व्यवस्था में सेंध मारकर धन कमाना चाहता है।

शेयर मार्केट में तेजी को बुलिश कहते हैं मंदी के दौर को बीयरिश कहते हैं अर्थात सांड और भालू की भिड़ंत। अमेरिका में शेयर बाजार की पृष्ठभूमि पर बनी बनी फिल्म ‘इंडीसेंट प्रपोजल’ थी। बलराज साहनी अभिनीत फिल्म भी बनी है। आश्चर्यजनक है कि धीरूभाई के जीवन से प्रेरित ‘गुरु’ में धीरूभाई की कंपनी ने पूंजी निवेश किया और निर्देशक के विचार में कोई दखलंदाजी नहीं की। व्यवसाय में लाभ कमाते हुए अपनी छवि को चमकदार बनाने को कोई शर्त नहीं रखी।

मध्यम आय वर्ग के लोगों को अपने जीवन में आय अर्जित करने का अधिकार है। धीरूभाई, श्रेष्ठि वर्ग की हवेली में पूंजी निवेश को स्वतंत्र करके अवाम की पहुंच में लाए। नेताओं और नीतियों को अपने अनुकूल बनाने के प्रयास में नैतिक मूल्यों का पतन होता ही है। गुप्त राष्ट्रीय बजट की अग्रिम जानकारी उसके घोषित होने के पहले निकाल कर करोड़ों की हेराफेरी होती है।

अमेरिका के शेयर बाजार को ‘द वॉल स्ट्रीट’ के नाम से और मुंबई में ‘दलाल स्ट्रीट’ के नाम से जाना जाता है। परंतु चीन का ड्रैगन दोनों स्थानों पर अनदेखा रहते हुए अपना खेल, खेलता है। अजय देवगन ने ‘द बिग बुल’ में पूंजी निवेश किया। विवाह के पूर्व अजय देवगन की पत्नी काजोल को शेयर व्यवसाय की बड़ी जानकारी रही है। वर्तमान में काजोल इस क्षेत्र से दूर हैं। अनिल अंबानी इस क्षेत्र के बड़े जानकार हैं। उनकी फिल्म निर्माण कंपनी सक्रिय है।

धीरुभाई ने भी एक फिल्म निर्माण कंपनी में पूंजी निवेश किया था। मणिरत्नम की ‘गुरु’ में नायक द्वारा किए गए घपले के प्रकरण में उन्होंने नायक के बचाव के लिए पहले ही पतली गली निकाल ली थी, परंतु यह मणिरत्नम का अपना निर्णय था। जब कभी शेयर बाजार धड़ाम से नीचे गिर जाता और जीवन भर की कमाई डूब जाती है, तब कुछ लोग आत्महत्या कर लेते हैं। उनके परिवार जीते जी मरे समान हो जाते हैं। शेयर मार्केट धन का खेल है।

यह बाजार राजनीति को प्रभावित करता है। मुद्रा की कीमत का घटना-बढ़ना संचालित करता है। राष्ट्रीय बजट को गोपनीय रखा जाता है,परंतु घुसपैठ हो जाती है। एक शेर है, ‘दरिया के तलातुम से तो बच सकती है कश्ती, कश्ती में तलातुम हो तो साहिल न मिलेगा।’ बुल बनाम भालू की लड़ाई में मरता, आम आदमी ही है।

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