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रुक्मिणी बनर्जी का कॉलम:‘तारा’ की कहानियों की कहानी; बच्चों को कहानियां जरूर सुनाएं-पढ़ाएंं, ये सबसे अच्छा उपहार है

22 दिन पहले
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रुक्मिणी बनर्जी, ‘प्रथम’ एजुकेशन फाउंडेशन से संबद्ध - Dainik Bhaskar
रुक्मिणी बनर्जी, ‘प्रथम’ एजुकेशन फाउंडेशन से संबद्ध

तारा आठ साल की होने वाली थी। कोरोना-काल में यह उसका दूसरा जन्मदिन था। उसे हल्का-हल्का याद है कि कोविड आने के पहले जन्मदिन कैसे मनाए जाते थे। शायद तब बहुत लोग घर आते थे। पर इस बार छोटी-सी पार्टी होगी। ज्यादा लोगों को बुलाया नहीं जा सकता है। पर बचपन से ही तारा के जन्मदिन के लिए एक चीज़ एकदम तय है। नानी उसको कहानियां जरूर देती हैं।

हर साल उतनी कहानियां होती हैं, जितनी उसकी उम्र होती है। जब वो दो साल की हुई तो नानी ने उसके लिए दो किताबें बनाईं। तीन साल पर तीन और चार साल पर चार...। नानी की लिखी कहानियों में अक्सर हीरोइन तारा ही होती है। कहानी के पन्नों में मम्मा, पापा, मासी होते हैं, घर के बाकी लोगों को भी कहानी में कभी-कभी रोल दिया जाता है। कहानी के बीचों-बीच, तारा के प्रिय कुत्ते, ज़ारा और कुकी भी कभी-कभार दुम हिलाते नज़र आते हैं।

जब तारा छोटी थी तो कहानियां भी छोटी-छोटी होती थीं। पर अब वो बड़ी लड़की हो गई है। बहुत पढ़ती है। मोटी-मोटी किताब एक दिन में ख़त्म कर देती है। लंबी-लंबी कहानियां खुद लिख लेती है। किताबों और कहानियों से उसे बेहद मोहब्बत है। अब ऐसे पाठक और लेखक के लिए कहां से कहानी लाई जाए?

अपनी सालगिरह की योजना अब तारा खुद बनाती है। आठवें जन्मदिन के कुछ दिन पहले तारा ने ऐलान कर दिया, ‘इस बार बर्थडे का थीम ‘मोर’ होगा’। मोर की रंग बिरंगी तस्वीर बनाने लगी। कमरे की दीवारों पर तारा के मोर लटकने लगे। खिड़की में टंगे मोर नाचते दिखाई दिए। घर के लोग मोर के पंख ढूंढने लगे। मम्मी ने मोर के आकर में बना हुआ केक का इंतज़ाम कर लिया। नानी सोचती रह गई। सुनने में आया कि तारा अपने दोस्तों को कह रही है, ‘मेरी नानी तो मुझे इस साल आठ कहानियां देंगी’।

तारा के आठवें जन्मदिन की शाम को नानी ने तारा को आठ लिफाफे दिए। हर एक में एक मोर की कहानी थी। साथ-साथ उसे निर्देश भी मिले, ‘आठवें जन्मदिन के बाद आठ दिन तक रोजाना तुम एक लिफाफा खोलोगी। हर लिफाफे में एक कहानी है। हर कहानी को दिए गए व्यक्ति के साथ पढ़ना है और उनके साथ कुछ करना भी है।’ परिवार के आठ लोगों का नाम, एक-एक करके तारा के नाम के साथ लिफाफे पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया था।

एक तरीके से आप कह सकते हैं, जन्मदिन का जश्न और आठ दिन चला। पहले दिन दादी की बारी थी। छोटी-सी कहानी मोर की। उसे पढ़ने के बाद, दोनों ने मिलकर कहानी को अंग्रेजी से हिंदी में लिख लिया। अगला दिन भी आसान था। तारा को अपनी छोटी बहन को कहानी पढ़कर सुनाना था। मासी के साथ पढ़ने और करने वाली कहानी कुछ इस तरह थी- ‘एसोप फैबल्स’ पर आधारित एक घमंडी मोर की कहानी थी।

प्राचीन भाषा में लिखी कहानी का रूपांतर करना था आसान शब्दों में। पापा हमेशा गणित लेकर तारा का पीछा करते हैं। इसलिए पापा और तारा को एक और मोर की कहानी पढ़कर उस पर गणित से सवाल बनाने थे। पर सबसे रोचक गतिविधि, दादू के साथ करनी थी। तारा के दादू को संगीत का बहुत शौक है। उनके पास गानों का खजाना है। उस दिन की कहानी मोर, बारिश और पकोड़ा के बारे में थी। पढ़कर उन्हें एक गाना चुनना था जो उस कहानी के वातावरण के साथ मिलता-जुलता हो।

आजकल नानी नई कहानी लिख रही है। असल में एक पुरानी कहानी का अनोखा संस्करण रचा जा रहा है। ‘नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए...’ का नया रूप, कहानी की शक्ल में सुंदर चित्रों के साथ बन रहा है। तारा को मालूम नहीं है कि आठवें जन्मदिन के आठ महीने बाद ये कहानी उसे मिलेगी। मत बताइएगा तारा को।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं। वे तारा की नानी हैं)