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गुणवंत शाह का कॉलम:बीसवीं सदी ने करोड़ों लोगों के माथे को तिलक और साफे से भी मुक्त किया, हर नया क्षण पहले वाले से एकदम अलग होता है

2 वर्ष पहले
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गुणवंत शाह, पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ लेखक और विचारक - Dainik Bhaskar
गुणवंत शाह, पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ लेखक और विचारक

काल का पहिया लगातार घूमता रहता है। इसकी दो विशेषताएं होती हैं। एक, इसमें कभी ब्रेक नहीं लगता और दूसरी, इसमें रिवर्स गियर नहीं होता। समाज में लगातार परिवर्तन होते रहते हैं। ग्रीक के दार्शनिक हिरेक्लिटस ने इस बात को बहुत ही सुंदर तरीके से बताया था। उन्होंने आज से करीब 2500 साल पहले एक सत्य को उजागर किया था: आप कभी भी एक ही नदी में दो बार प्रवेश नहीं कर सकते क्योंकि जिस नदी में आपने प्रवेश किया, वह नदी क्षण भर बाद ही वह नहीं होती जो वो पहले थी। और आप भी वो नहीं होते, जो आप पहले थे।

परिवर्तन एक स्थायी भाव है। बीसवीं सदी ने करोड़ों लोगों के माथे को तिलकमुक्त और साफे से भी मुक्त किया। एक तरह से साफा व्यक्तित्व का संकेत था तो तिलक मानव के धर्म या संप्रदाय की सूचना देता था। हालांकि हमारा सिर उन्मुक्त विचारों का उद्गम स्थल है। इसलिए इसे पवित्र माना गया है। पवित्र बनाए रखने के लिए इसे विशेष तरह की टोपी, पगड़ी या तिलक से मुक्त रखना ही होगा। बरसों पहले डॉ. रोनाल्ड मिलर पांच दिनों के लिए सूरत आए थे। वे कनाडा की रेजाइना यूनिवर्सिटी में डीन थे।

उन्होंने इस्लाम पर शोध करने के बाद पी-एच.डी. की। वे केरल में 24 साल तक रहे। केरल के मुसलमानों पर उन्होंने एक किताब भी लिखी। उनसे लंबी वार्ता भी हुई। जिस तरह से बाइबिल के ओल्ड टेस्टामेंट को पढ़ने के लिए हिब्रू भाषा को जानना आवश्यक है, उसी तरह कुरान को अच्छी तरह से समझने के लिए अरबी भाषा जाननी जरूरी है। इसलिए डॉ. मिलर ने अरबी भाषा सीखी।

आज का इलेक्ट्रॉनिक या कहें आधुनिक युग पृथ्वी पर सीमाओं के नाम पर खींची गई लकीरों को मिटाने का काम कर रहा है। हम सबको डराने, धमकाने और हैरान करने वाले कोरोना वायरस के लिए इलेक्ट्रॉनिक युग मानों वरदान साबित हुआ है। क्या एक साल पहले किसी ने आज की कल्पना की थी? स्टॉर वार जैसा ही भयंकर यह अदृश्य वायरस पूरी दुनिया को डरा रहा है। यह तो रावण पुत्र इंद्रजीत की तरह है। राम-रावण युद्ध के दौरान इंद्रजीत ने लक्ष्मण पर बाण-वर्षा की।

लक्ष्मण यह समझ ही नहीं पा रहे थे कि बाण कहां से आ रहे हैं। आखिर में एक बाण लक्ष्मण को लग ही गया और वे मूर्च्छित हो गए। ठीक इसी तरह कोरोना हमें इंद्रजीत की तरह हैरान कर रहा है। हम सब इसके सामने लाचार हैं। कोरोना का खौफ खत्म होने के बाद भी दुनिया पहले की तरह नहीं होगी। न तो इंसान पहले की तरह होगा, न ही मानव समाज, यह तय है। सदियों बाद हिरेक्लिटस की बात एकदम सही साबित हुई।

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