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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:मेष राशि का उड़ने वाला बेलगाम घोड़ा, हमारी विचार प्रक्रिया में गहरी पैठ बना चुका

5 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे का कॉलम

इजराइल ने एक मोबाइल ऐप बनाया है, जिसका नाम पेगासस है। यह एक वैध ऐप है, जो केवल देश ही खरीद सकते हैं। ग्रीक दंत कथाओं में पेगासस उड़ने वाले घोड़े को कहा गया है। प्रचीन विद्या में उड़ने वाला घोड़ा मेष राशि का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। अमेरिका की ट्राई स्टार फिल्म कंपनी का लोगो भी उड़ने वाला घोड़ा रहा है। इस समय पेगासस सुर्खियों में है। फ्रांस से खबर आई है कि अनेक देशों में महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम इस तरह की जासूसी से जुड़े पाए गए हैं।

दरअसल जासूसी उपन्यास और फिल्मों में गुप्त सूचनाओं के जाहिर होने पर अनेक रचनाएं समय-समय पर जारी होती रही हैं। देवकीनंदन खत्री के उपन्यास ‘चंद्रकांता’ और ‘भूतनाथ’ में जासूस को बेहोश करने के लिए लखलखा सुंघाते थे। आप लखलखा को एनेस्थेसिया का वह रूप मान सकते हैं, जो विज्ञान की खोज के सदियों पूर्व बाबू देवकीनंदन खत्री के पात्रों ने इस्तेमाल किया है। इयान फ्लेमिंग के रचे पात्र जेम्स बॉन्ड के पास तरह-तरह के आधुनिक यंत्र होते हैं। एक फिल्म में जेम्स बॉन्ड के पास एक कार है, जो हवाई जहाज की तरह उड़ सकती है और पनडुब्बी की तरह समुद्र में तैर भी सकती है।

फिल्म ‘सिल्क’ में रूस में जन्मी महिला, अमेरिका में सक्रिय है। अमेरिका की गुप्तचर संस्थाएं इस तथ्य का लाभ उठाकर नायिका को रूस भेजते हैं। हॉलीवुड की सितारा एंजेलिना जोली ने ‘सिल्क’ में अभिनय किया था। नायिका अपनी चतुराई से खबरों की हेराफेरी इस तरह से करती है कि रूस और अमेरिका के बीच युद्ध के हालात को टालने में वह सफल होती है। आदित्य चोपड़ा की ‘एक था टाइगर’ फिल्म भारत और पाकिस्तान के दो जासूसों की प्रेम कथा के रूप में यादगार फिल्म बन जाती है।

हांगकांग में जन्में फिल्मकार जॉन वू की फिल्म ‘फेस ऑफ’ भी इसी श्रेणी की फिल्म है। अमिताभ अभिनीत फिल्म ‘डॉन’ भी जासूसी थ्रिलर है। इसका भाग 2 फरहान अख्तर ने बनाया था। दशकों पूर्व एक उपन्यास प्रकाशित हुआ था। कथासार है कि दूसरे विश्वयुद्ध के समय इंग्लैंड में जन्मा एक व्यक्ति जर्मन जेल में जासूसी के अपराध में कैद है।

उस जेल के एक अधिकारी की शक्ल-ओ-सूरत कैदी से मिलती-जुलती है। इसका लाभ उठाने के लिए यह तय किया गया कि जर्मन व्यक्ति को अंग्रेज की जगह लंदन भेजा जाएगा, जहां वह जर्मनी के लिए काम करेगा। उस रात अंग्रेज कैदी अपने हमशक्ल जर्मन जेल अधिकारी को पीटने का अवसर पाता है। वह उसके कपड़े पहन लेता है। उसे अपने वस्त्र पहनाकर कंबल से छुपा देता है। इस तरह वह स्वदेश लौटता है। इस बीच जर्मन लोग सच जान लेते हैं। वे अपने लंदन मे कार्यरत दल को खबर देते हैं कि अंग्रेज ही लंदन पहुंच रहा है। उसे गोली मार दी जाए।

उधर अंग्रेज अफसर भी इस भ्रम में हैं कि आने वाला व्यक्ति एक जर्मन जासूस है। अत: उस व्यक्ति को दोनों दल मारने के लिए तैयार बैठे हैं। वह बड़ी कठिनाई से बचते हुए अपने दल के मुखिया को विश्वास दिलाने में सफल होता है कि वह अंग्रेज ही है। आज हमारी संसद में पेगासस को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी है जबकि देश के सामने कोविड की तीसरी लहर की आशंका मंडरा रही है। अनगिनत लोग बेरोजगार हैं। ‌व्यवसाय ठप्प पड़े हैं। वैश्विक आर्थिक मंदी पैर पसार चुकी है। अस्पतालों और उपकरणों की कमी है। निजता की रक्षा संभव नहीं है। कमीज के बटन में कैमरा लग सकता है। गोया की खत्री के जासूस पात्र अब यथार्थ बन गए हैं।

खत्री उन्हें अय्यार कहते थे। निदा फाजली की रचना है कि ‘औरों जैसे होकर भी हम बाइज़्ज़त हैं बस्ती में, कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है’। कहीं कोई राज नहीं, राजदार नहीं। मेष राशि का चिन्ह उड़ने वाला बेलगाम घोड़ा, हमारी विचार प्रक्रिया में गहरी पैठ बना चुका है।