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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:संपूर्ण देश अनलॉक की राह पर है अब हमें हर कदम, हर दूरी और हर मंजिल के प्रति बहुत सावधानी रखना होगी

2 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

‘जो डगर तेरे द्वार जाती हो, उस डगर पर पांव रखना नहीं। अब हमें ऐसा संकल्प लेना ही पड़ेगा। जो भी हो, इस महामारी की डगर पर बिलकुल नहीं चलना है। चूंकि अब आने-जाने के रास्ते खुल गए हैं, तो हर कदम, हर दूरी और हर मंजिल के प्रति बहुत सावधानी रखना होगी। जरा-सी असावधानी फिर महंगी पड़ सकती है। सावधानी सीखिए श्रीराम से।

रावण से युद्ध में राम और उनके तीर सावधान थे कि कहां तक जाना है और फिर कहां लौटकर आना है। बड़ी प्रतीकात्मक घटना घटी थी रणांगन में। तीर लगते ही रावण जमीन पर गिरा और मर गया। तब उसके मस्तक और भुजाओं का राम ने क्या किया? तुलसीदासजी ने लिखा- ‘मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहां जगदीसा।’ रावण की भुजाओं और सिरों को मंदोदरी के सामने रखकर बाण फिर वहां चले जहां जगदीश्वर यानी श्रीराम थे। मतलब सारे बाण जाकर फिर तरकस में प्रवेश कर गए।

इस दृश्य को अब हमें अपने जीवन में उतारना है। राम जानते थे रावण का मस्तक, इसकी भुजाएं कहां पहुंचाना है। तो उन्हें उनकी सही जगह यानी मंदोदरी के सामने पहुंचा दिए। उसके बाद तीर वापस लौटकर तरकस में आए। इस दृश्य से सीखिए, इन दिनों अब बिलकुल ऐसा ही आचरण करना है कि कहां तक चलें, कहां तक पहुंचे और कहां लौटकर आएं। इसी में सबकी सुरक्षा है।