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संजय कुमार का कॉलम:आगे की राजनीति को आकार देने वाला साल, 2022 का चुनावी सेमीफाइनल 2024 के फाइनल खेलने की उम्मीदें बढ़ाएगा

6 महीने पहले
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संजय कुमार, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (सीएडीएस) में प्रोफेसर और राजनीतिक टिप्पणीकार - Dainik Bhaskar
संजय कुमार, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (सीएडीएस) में प्रोफेसर और राजनीतिक टिप्पणीकार

2022 राजनीतिक रूप से बहुत ज्यादा चर्चा में रहने वाला ‌वर्ष होगा। पांच राज्यों में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जबकि साल के आखिर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होंगे। जब लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होते हैं तो उन्हें सामान्य तौर पर सेमीफाइनल और लोकसभा चुनाव को फाइनल कहा जाता है। इस साल की शुरुआत में लोकसभा सीटों के हिसाब से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के चुनाव होने हैं।

जैसे कि किसी भी मैच में सेमीफाइनल जीतने के बाद सिर्फ फाइनल में पहुंचने की गारंटी होती है, फाइनल मैच जीतने की नहीं। वैसे ही लोकसभा चुनाव से कुछ माह या साल भर पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत लोकसभा चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। जैसे सेमीफाइनल में जीत फाइनल जीतने की संभावनाएं बढ़ाती है, वैसे ही राज्यों के चुनावों में जीत से लोकसभा चुनाव जीतने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

इस साल चुनावों से हमें सिर्फ यह पता लगेगा कि किस पार्टी का इन राज्यों में ज्यादा जनाधार है, लेकिन परिणाम 2024 का संकेत नहीं होगा। कई राज्यों में 2023 में विधानसभा चुनाव होंगे, जो कि जाहिर तौर पर 2024 के करीब है, लेकिन उन परिणामों को किसी संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारतीय चुनावों में ऐसा दौर रहा है, जब लोग एक ही दल को राज्य और केंद्र के लिए चुनते थे, लेकिन आज की राजनीति में यह रुझान नहीं दिखता।

पिछले पांच सालों में दिल्ली, मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों में चुनाव हुए, जहां पर मतदाताओं ने राज्य और केंद्र के लिए मतदान करते हुए बहुत ही अलग तरीके से वोट डाला। यह पैटर्न पिछले पांच सालों में बदल गया होगा, इसके कोई साक्ष्य नहीं हैं। इसलिए स्पष्ट तौर पर मेरी राय में विधानसभा चुनावों के परिणाम इस बात का संकेतक नहीं होंगे कि 2024 में क्या होगा। इसलिए विधान सभा चुनाव के परिणामों से 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर फैसला देने से बचना चाहिए।

‘आप’ की एंट्री से कांग्रेस को नुकसान!
इन विधानसभा चुनावों के परिणाम का कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर भी असर होगा। जिन सात राज्यों में इस साल चुनाव होंगे, वहां पर सिर्फ पंजाब में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, गोवा और मणिपुर में वह प्रमुख विपक्षी दल है। इसलिए उसके लिए जरूरी है कि वह कुछ राज्यों में चुनाव जीते, ताकि 2024 की उम्मीदों को उड़ान देने के लिए उसके नेताओं और समर्थकों में विश्वास कायम हो।
कांग्रेस के लिए बेहतर प्रदर्शन का सबसे अच्छा मौका पंजाब में है, जहां वह अपनी सरकार बचाने के लिए लिए मैदान में है, जबकि उत्तराखंड और गोवा में वह प्रमुख विपक्षी दल है। राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड में हर पांच साल में सरकार बदल जाती है। भाजपा यहां पर पिछले पांच सालों से सरकार में है, इसलिए कांग्रेस के पास उत्तराखंड जीतने का मौका है। लेकिन चुनाव अपने समर्थकों को संगठित करके जीते जाते हैं, किसी तय नियम से नहीं।
ऐसे नियम पिछले सालों में कई राज्यों में टूटे हैं और केरल इसका ताजा उदाहरण है। इसलिए कांग्रेस को भाजपा को हराने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत है, खासकर राज्य की राजनीति में ‘आप’ के प्रवेश को देखते हुए, जो कि कुछ भाजपा विरोधी मतों को अपने पक्ष में करके कांग्रेस की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।

कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती
पिछले विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने गोवा में अपनी आकृति और आकार खो दिया है। इसके सिर्फ दो विधायकों को छोड़कर बाकी सब मुख्य रूप से भाजपा और तृणमूल में शािमल हो गए हैं। इन हालात में कांग्रेस के लिए गोवा चुनाव जीतना मुश्किल होगा। 2022 के आखिर में गुजरात और हिमाचल में चुनाव होंगे, आमने सामने के इन चुनावों में कांग्रेस की जीत की अच्छी संभावनाएं हैं। लेकिन, यह नहीं भूलना चाहिए कि उसका मुकाबला भाजपा जैसी मजबूत राजनीतिक ताकत से है।
भाजपा हर कीमत पर गुजरात को जीतना चाहेगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य होने की वजह से यह उसके लिए प्रतिष्ठा का भी सवाल है। सवाल वही रह जाता है कि क्या कांग्रेस गुजरात और हिमाचल में जीत पाएगी। इन राज्यों के खास परिदृश्य को देखते हुए 2022 निश्चित ही कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। ‘आप’ विभिन्न राज्यों में अपना आधार बढ़ाने के लिए कड़ी कोशिश कर रही है।
उसकी कोशिश है कि अगर वह राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर कांग्रेस को हटाने में कामयाब नहीं भी होती है, तो भी कम से कम कई राज्यों में कांग्रेस के पतन की वजह से बनी जगह को भर सके। इसका बहुत सा दारोमदार पंजाब व अन्य राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। पंजाब में जीत निश्चित ही ‘आप’ की संभावनाओं को बढ़ाएगी और राष्ट्रीय राजनीति में केजरीवाल को एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभरने में मदद करेगी।

ममता का भविष्य तय करेगा ये वर्ष
जो अन्य नेता राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका की उम्मीद कर रही हैं, वह हैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। पिछले साल बंगाल में तृणमूल की जबरदस्त जीत के बाद वह अन्य राज्यों में तृणमूल का आधार बनाने के लिए कड़ी कोशिश कर रही हैं। पार्टी अन्य दलों के कई नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रही है।
प्रमुख रूप से कांग्रेस से गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फ्लेरियो, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सुष्मिता देव, कीर्ति आजाद (बिहार), अशोक तंवर (हरियाणा), राजेशपति त्रिपाठी और ललितपति त्रिपाठी (उत्तर प्रदेश), भाजपा सरकार में रहे पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, बाबुल सुप्रियो, भाजपा नेता मुकुल रॉय और उनके पुत्र शुभ्रांशुु तथा जदयू नेता और पूर्व सांसद पवन वर्मा इनमें शामिल हैं।
ये दलबदल इस बात के साफ संकेत हैं कि हवा किस ओर बह रही है, लेकिन तृणमूल को आने वाले विधानसभा चुनावों में कुछ राज्यों में अपनी उपस्थिति महसूस करानी होगी, ताकि ममता बनर्जी भाजपा को चुनौती देने वाली सर्वमान्य विपक्षी नेता होने का दावा कर सकें। गोवा में स्थापित कांग्रेस व भाजपा को चुनौती देने के लिए तृणमूल कड़ी मेहनत कर रही है। गोवा में तृणमूल का असर देखने के लिए हमें इंतजार करना होगा।

और आखिर में...
2022 के विधानसभा चुनाव का मंच और भारतीय राजनीति पर इसका क्या प्रभाव होगा, यह अब तक पूरी तरह खुला है। अभी चुनावों की घोषणा होना बाकी है, लेकिन अनौपचारिक अभियान शुरू हो भी चुका है। आने वाले महीनों और 2024 के फाइनल से पहले के दो सालों में चीजें कैसे बदलेंगी, यह देखने के लिए हमें इंतजार करना होगा।

क्या योगी का कद बढ़ेगा
2022 के विधानसभा चुनावों के परिणामों का 2024 के चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं होगा, पर राजनीति पर असर जरूर होगा। इसी हिसाब से आगे की पॉिलटिक्स आकार लेगी। उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत निश्चित ही 2024 में भाजपा के लोकसभा चुनाव जीतने की उम्मीद बढ़ा देगी, इससे भाजपा में योगी आदित्यनाथ का कद बढ़ना भी तय है। इसके विपरीत अगर भाजपा यूपी चुनाव हारती है तो यह 2024 के लिए भाजपा की संभावनाओं को कमजोर करेगी और निश्चित ही इससे भाजपा के भीतर योगी का कद भी घटेगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)