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डॉ चन्द्रकांत लहारिया का कॉलम:ओमिक्रॉन में करीब 50 म्युटेशन हैं इसलिए और भी जरूरी है कोविड का पूर्ण टीकाकरण

7 महीने पहले
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डॉ चन्द्रकांत लहारिया, जन नीति और स्वास्थ्य तंत्र विशेषज्ञ - Dainik Bhaskar
डॉ चन्द्रकांत लहारिया, जन नीति और स्वास्थ्य तंत्र विशेषज्ञ

लोग अभी कोरोना को भूलने की कोशिश कर ही रहे थे कि ओमिक्रॉन नाम के नए वैरिएंट की खबर आ गई। जो अज्ञात होता है, वह चिंतित कर सकता है या फिर लापरवाही को जन्म दे सकता है, इसलिए उससे जुड़े हुए तथ्यों को समझना बहुत सहायक हो सकता है। आइए, ओमिक्रॉन को समझें।

म्युटेशन क्या होते हैं? हमारे चारों तरफ अलग-अलग प्रकार के वायरस हैं। यह करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर आए। अधिकांश वायरस बीमारियां नहीं करते हैं। इन्हें अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए सजीव कोशिकाओं की जरूरत होती है, वो फिर चाहे मनुष्यों, पेड़-पौधों, जानवर या कोई अन्य कोशिकाएं हों। जीवन चक्र के लिए वायरस अपने जेनेटिक मटेरियल की प्रतिलिपियां बनाते हैं।

इस प्रक्रिया में कुछ गलतियां हो जाती हैं। उदाहरण के तौर पर जैसे लिखने या टाइप करने में गलतियां हो सकती हैं। उसी तरह जेनेटिक मटेरियल की प्रतिलिपियां बनने की गलतियों को म्युटेशन कहते हैं। जैसे लेखन में हर गलती से अर्थ नहीं बदलते, लेकिन कुछेक से अर्थ का अनर्थ हो सकता है। उसी तरह वायरस में हुए अधिकतर म्युटेशन या बदलाव मायने नहीं रखते, लेकिन कुछ से वायरस के व्यवहार में भारी बदलाव आ सकता है।

ओमिक्रॉन में करीब 50 म्युटेशन हैं। पर करीब 10 बदलाव ऐसे हैं, जो या तो पहले अल्फा, बीटा, डेल्टा और लैम्ब्डा वैरिएंट्स में मिले थे। कुछ अन्य म्युटेशन वायरस के उन हिस्सों में हैं जो इसके फैलने की दर को बढ़ा सकते हैं या टीकों का असर कम कर सकते हैं। यही वजह है कि इस वैरिएंट को डब्ल्यूएचओ ने वैरिएंट ऑफ कंसर्न (वीओसी) का दर्जा दिया है। क्या ओमिक्रॉन सच में खतरनाक है? क्या ये तेजी से फैलता है? इससे गंभीर बीमारी होती है? क्या टीके इसके खिलाफ काम नहीं करेंगे? अधिकतर सवाल अनुत्तरित हैं, आने वाले कुछ सप्ताह में हम और अधिक जानेंगे।

ओमिक्रॉन कोरोना का अब तक का पांचवा वीओसी है। इससे पहले मई 2021 में डेल्टा को वीओसी माना गया था। कुछ लोगों को इसके नाम में दिलचस्पी होगी। पिछले साल के अंत में जब कोरोना के नए वैरिएंट आने लगे तो उन्हें जिस देश ने सबसे पहले रिपोर्ट किया, उसके नाम से जोड़ा जाने लगा। फिर वैरिएंट का वैज्ञानिक नाम बोलने में कठिन होते हैं, इसलिए डब्ल्यूएचओ ने आम बोलचाल के लिए इन्हें ग्रीक वर्णमाला के आधार पर नाम दिए। ग्रीक वर्णमाला में 24 वर्ण हैं, अल्फा पहला और ओमेगा अंतिम। ओमिक्रॉन वर्णमाला का 15वां अक्षर है। इस आधार पर अगला वैरिएंट ‘पाई’ कहलाएगा।

फिलहाल, ओमिक्रॉन के दो मामले भारत में सामने आए है, पर घबराने जैसी कोई बात नहीं होगी। वैरिएंट चाहे नया हो या पुराना, बचने के तरीके वही पुराने हैं: मास्क, हाथ धोना, भीड़ भरी जगह से बचाव, दूरी और टीकाकरण। याद रखें जिसने टीका लगवा रखा होगा उसको गंभीर बीमारी की आशंका बिना टीके लगे व्यक्ति से कम होती है। इसलिए जरूरी है कि हर वयस्क कोविड के दो टीके लगवाए। इस बात के कोई सबूत नहीं है कि ओमिक्रॉन बच्चों के लिए अतिरिक्त खतरा होगा। कोविड-19 की गंभीर बीमारी से बच्चे सुरक्षित हैं।

ओमिक्रॉन को सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से रिपोर्ट किया गया। अब तक करीब 30 देशों में यह मिल चुका हैं। अब पता चला है कि दक्षिण अफ्रीका में मिलने से 11 दिन पहले यह नेदरलैंड में पाया गया था, लेकिन इतना फैला नहीं। दोनों देशों में अंतर है कि नेदरलैंड में वयस्क आबादी के बड़े हिस्से को टीके लग चुके हैं।

यह इशारा है कि संभवतः ओमिक्रॉन टीका लगे हुए लोगों पर इतना असर नहीं कर पाता है। इसलिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि सभी वयस्क टीकाकरण पूरा करवाएं। बात साफ है, जब तक दुनियां के किसी भी हिस्से में कोरोना फैल रहा है, हमें सचेत और सजग रहना होगा। सावधानी बरतनी है लेकिन ओमिक्रॉन से चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)
●c.lahariya@gmail.com