पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:सेवा शब्द महामारी के दौर में एक बहुत बड़ी उम्मीद है

7 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

दुनिया के पहले माता-पिता मनु-शतरूपा माने गए। शास्त्रों के अनुसार उन्होंने जब ब्रह्माजी से पहली चर्चा की तो उसमें एक संदेश निकलकर आया। मनु-शतरूपा ने ब्रह्मा से पहली बात यह पूछी थी कि हम ऐसा क्या करें जिससे आपकी सेवा हो सके। तब ब्रह्माजी ने उनको पहला आशीर्वाद दिया था- ‘तुम्हारा कल्याण हो।’ यह ‘सेवा’ शब्द आज इस महामारी के दौर में एक बहुत बड़ी उम्मीद है।

इस समय जो लोग भी मानवता की सेवा कर रहे हैं, वो परमात्मा के विधान के अनुसार बहुत अच्छा कर रहे हैं। हो सकता है इसका मूल्यांकन इस संसार में न हो पाए, क्योंकि यहां स्वार्थ, राजनीति, पाखंड, प्रदर्शन ये सब चलता है। लेकिन, ऊपर वाले की दुनिया में आपके द्वारा की गई सेवा का बराबर हिसाब रखा जाएगा और एक दिन उसका फल भी दिया जाएगा।

परमात्मा कहता है जो भी मुझे सेवा करता दिखेगा, मैं उसका कल्याण अवश्य करूंगा। इस समय दूसरों की सेवा का एक अच्छा तरीका यह भी है कि खुद को सुरक्षित रखें। गाड़ी बुलेट प्रूफ हो सकती है, उसमें बैठने वाला व्यक्ति बुलेट प्रूफ नहीं होता। बाहर से हुआ कोई भी प्रहार भीतर बैठे हुए की मौत का कारण बन सकता है। वैक्सीन और हमारे शरीर का मामला बिलकुल ऐसा ही है। वैक्सीन लेना हमारी जिम्मेदारी है, पर उसके बाद भी सावधान रहना समझदारी है।

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