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एन. रघुरामन का कॉलम:बुरे दिन जैसा कुछ नहीं होता, मुसीबत जीवन का हिस्सा, ऐसा हो तो अच्छी मंशा के साथ हल करने की करें कोशिश

4 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

जिंदगी आश्चर्यों से भरी है। या तो यह हमें गिरा देती है, जिसे हम किस्मत कहते हैं या हम एक उद्देश्य अपना लेते हैं। दोनों परिस्थितियों में अगर अच्छा सोचते और करते हैं, तो किस्मत आपको अलग नजारा दिखाती है, जैसा इन दो मामलों में हुआ।

पहली कहानी: कोई भी जिंदगी में कभी ये दो कॉल नहीं चाहता। पहला, पत्नी या बच्चों को कुछ होने की खबर और दूसरा, माता-पिता के साथ हादसे की खबर। बीबीसी के सांयकालीन कार्यक्रम ‘द वन शो’ के प्रस्तोता मैट बेकर भी ये कॉल नहीं चाहते थे। इसलिए भी क्योंकि उन्होंने हाल ही में बीबीसी की नौकरी छोड़ीकर टीवी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की थी, जिसके नए प्रोजेक्ट्स की चर्चा में वे व्यस्त थे। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

उन्हें पिता का फोन आया, जो बकरी, मुर्गी, गधे, कुत्ते, और बेशक अलग-अलग आकार की भेड़ों और गायों के बीच अपने पुश फार्म पर रहने वाले किसान थे। उन्होंने बताया कि मैट की मां जेनिस को उनके ही 90 किलोग्राम वजनी जानवर ने कुचल दिया है। मां के पैर और कमर टूट गई है। पिता ने मैट को काम संभालने बुलाया क्योंकि उनके पशु फार्म में हर घंटे कुछ काम होता रहता है। कॅरिअर के दबाव के बावजूद मैट ने पहले माता-पिता के पास पहुंचने का फैसला लिया।

इसलिए मैट पत्नी और बच्चों (12 व 10 वर्षीय) के साथ चल पड़े, बिना यह सोचे कि वहां कब तक रुकना होगा। खेत पहुंचकर उन्होंने काम संभाल लिया। उन्होंने अपने टीवी प्रोडक्शन कंपनी की वीडियो मीटिंग जारी रखीं, जिसपर लोग पूछते थे कि वे जानवरों और घास-पूस से क्यों घिरे हैं। मैट उन्हें पारिवारिक इमरजेंसी और मां के जानवरों की जिम्मेदारी लेने के बारे में बताते।

कुछ ही दिनों में एक फिल्म क्रू वहां पहुंच गई और इस संकट को फिल्माने लगी। इसका नतीजा है चार भागों का टीवी सीरियल ‘अवर फार्म इन द डेल्स’, जो इस जगह को फिर बेहतर बनाने के बेकर परिवार के प्रयास दिखाएगा। दिलचस्प यह है कि मैट खुद परिवार का निर्देशन कर माता-पिता की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने लाए और उन दो पीढ़ियों के बीच की स्वाभाविक संवेदनशीलताओं को कैमरे में कैद किया। यह शो 31 मार्च को रिलीज हो रहा है।

दूसरी कहानी: यूके की 10 वर्षीय बच्ची स्काय नेविल को बच्चों की मैगजीन के साथ आने वाले सस्ते प्लास्टिक के खिलौने देखकर भड़क जाती थी। उसने नवंबर 2020 में उन खिलौनों के खिलाफ अभियान शुरू किया, जिन्हें बिक्री बढ़ाने के लिए मैगजीन के साथ दिया जा रहा था। चार महीने में इस अभियान को कई राजनीतिज्ञों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और खुद बच्चों से सराहना मिली। कुछ पब्लिशिंग हाउस ने बच्चों की मैगजीन के साथ डिस्पोजेबल खिलौने न देने का फैसला लिया है और इसके पीछे नेविल को प्रेरणा बताया है।

पोस्टमैन की बेटी स्काय कई मैगजीन लेती है, लेकिन वे नहीं जिनके साथ डिस्पोजेबल खिलौने आते हैं। स्काय ने प्रकाशकों को इस बारे में लिखा और उन्हें रटा-रटाया जवाब मिला कि खिलौनों से एक से ज्यादा बार खेल सकते हैं। जवाब से नाखुश और ग्रेटा थनबर्ग की प्रशंसक स्काय ने यह समझाने का अभियान शुरू कर दिया कि देशभर में मुफ्त देने के लिए खिलौने बनाने में कितना प्लास्टिक इस्तेमाल हो रहा है। इस हफ्ते कुछ प्रकाशक डिस्पोजेबल खिलौने दुकानों से हटाने को तैयार हो गए हैं। इसमें शैक्षणिक और दोबारा इस्तेमाल योग्य क्राफ्ट आइटम शामिल नहीं हैं।

फंडा यह है कि बुरे दिन जैसा कुछ नहीं होता। मुसीबत जीवन का हिस्सा है। जब मुसीबत परेशान करे, उसे अच्छी मंशा के साथ हल करने की कोशिश करें, फिर देखें कि कैसे आप अपने काम से दिन पर राज करते हैं।