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साधना शंकर का कॉलम:कई देशों में सर्कुलर इकोनॉमी पर जोर, कोविड के बाद यह आगे बढ़ने और नई शुरुआत के लिए अच्छा समय

7 दिन पहले
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साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी - Dainik Bhaskar
साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी

साल 1602 में एम्सटर्डम की एक गली में एक व्यापारी ने डच ईस्ट इंडिया कंपनी के शेयर्स बेचे। इससे संयुक्त स्टॉक कंपनी अस्तित्व में आई, जो पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का आधार बनी। आज कोविड के असर का सामना करने के लिए नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम, अर्थशास्त्र के एक विचार के साथ प्रयोग की कोशिश कर रही है, जो पूंजीवादी विचारधारा को चुनौती देता है। कोविड की चुनौतियों से जूझने के लिए, कई शहरों ने इस वैश्विक अवधारणा को बदलाव के साधन के रूप में अपनाया है।

2017 में अपनी किताब ‘डोनट इकोनॉमिक्स’ में ब्रिटिश अर्थशास्त्री केट रावर्थ विकास को देखने के एक नए नजरिए को सामने रखते हैं। डोनट एक गोल पेस्ट्री है, जिसके बीच में छेद है। छेद के साथ बालूशाही की कल्पना करें। पूरी बीसवीं सदी में विकास का पर्याय रहे GDP के रेखीय पथ के बजाय यहां विचार चक्राकार (सर्कुलर) अर्थव्यवस्था से है। डोनट के बाहरी हिस्से के परे, मानवता हमारे ग्रह की सीमाओं को लांघकर पर्यावरण पर हावी हो रही है; वहीं अंदरूनी सर्कल सामाजिक आधार है।

इन दोनों सर्किल के बीच का हिस्सा सुरक्षित ज़ोन है, जहां विकास पारिस्थितिकी और सामाजिक सूचकांक के लिए खतरा नहीं बनता, जो कि यूनाइटेड नेशंस के टिकाऊ विकास लक्ष्य को भी सुनिश्चित करता है। होल के अंदर लोग वंचित हैं, वहीं डोनट के बाहर विकास पारिस्थितिकी को ताक पर रखकर हो रहा है। डोनट के सेफ ज़ोन में आने के लक्ष्य को जीडीपी के रेखीय विकास की खोज की जगह लेना है।

कोविड से प्रभावित दुनिया में आगे बढ़ने के वैकल्पिक विचार ध्यान खींच रहे हैं। डोनट को शहर के स्तर पर ले जाकर, चक्राकार अर्थव्यवस्था की इस अवधारणा का अंतहीन उपभोक्तावाद से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। उपभोक्ता वस्तुओं, निर्माण सामग्री और खाद्य पदार्थों में सामग्रियों को कम करने, दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा करते हुए जीवन को बेहतर बनाना है।

एम्सटर्डम ने 2050 तक चक्राकार बनने के लिए ‘चक्राकार रणनीति 2020-25’ अपनाई है। डोनट सिद्धांत के तहत काम के पहले उदाहरणों में शहर में चल रहा निर्माण कार्य है। इसकी नींव ऐसे तरीके से रखी गई, ताकि इससे स्थानीय वन्यप्राणियों को कोई खतरा ना हो। साथ ही भविष्य में समुद्र के जलस्तर बढ़ने से भी जोखिम ना हो। निर्माण के इच्छुक किसी को भी अपनी इमारत के लिए मटीरियल पासपोर्ट की जरूरत होगी, ताकि जब कभी इमारत नष्ट हो, तो शहर उसकी चीज़ों का दोबारा इस्तेमाल कर सके।

फ्रांस ने फरवरी 2020 में सर्कुलर इकोनॉमी कानून पारित कर दिया है। इसके अंतर्गत कंपनियां बिना बिके और वापस लौट आए सामान को पुनर्वितरण और रिसाइकल करेंगी, उन्हें नष्ट नहीं कर सकतीं। सी-40 शहरों के वैश्विक नेटवर्क में शामिल दुनिया के 37 शहरों में सर्कुलर इकोनॉमी पर विचार किया जा रहा है। साओ पाउलो, बर्लिन, कुआलालंपुर और कैलिफोर्निया शहरों में डोनट पर केंद्रित सामान्य लोगों के समूह बनाए गए हैं।

भारत में नीति आयोग भी संसाधनों का दक्षतापूर्वक इस्तेमाल करने के लिए सर्कुलर इकोनॉमी पर जो दे रहा है। आज, कोविड के बाद, आगे बढ़ने और जीवन जीने के वैकल्पिक तरीकों को खोजने का यह अच्छा अवसर है। व्यक्तियों, समुदायों, शहरों और राष्ट्रों के लिए यह एक रीसेट और नई शुरुआत का समय है।

नई शुरुआत के लिए दुनियाभर में परखे जा रहे विचार शुरुआती बिंदु हो सकते हैं। जैसा मुक्त बाजार अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन कहते थे ‘सिर्फ एक विपत्ति ही, भले वास्तविक हो या कथित, असली बदलाव लाती है। जब वह संकट आता है, तो उस समय उठाए गए कदम हमारे आसपास तैर रहे विचारों से तय होते हैं।’

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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