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एन. रघुरामन का कॉलम:खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो देखें कि आपके शहर में अभी किस चीज की मांग बढ़ी है

8 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

किराये का बाजार अचानक बदल रहा है, कम से कम उन इलाकों में जहां किराया आसमान छू रहा है। ‘किराये से देना है’ के कई बोर्ड नजर आने लगे हैं। पिछली शाम मुंबई की पवई बाजार की सैर के दौरान मैंने देखा कि छोटी दुकानों की संख्या में अचानक इजाफा हो गया है। उनमें सबसे ज्यादा सैलून या पार्लर हैं। इन 12 महीनों में ग्रूमिंग इंडस्ट्री ने रिटेल सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़त देखी है, जबकि इस दौरान ज्यादातर समय ये बंद रहे।

दिलचस्प यह है कि महिलाओं के नहीं, बल्कि पुरुषों के पार्लर बढ़े हैं। इसके पीछे पुरुषों की पर्सनल ग्रूमिंग में बढ़ती रुचि और बड़ी दाढ़ी के फैशन की वापसी है, जिसे ट्रिम करना होता है। जहां कपड़ा विक्रेता वर्क फ्रॉम होम सुविधा बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, वहीं आंत्रप्रेन्योर्स ने कपड़ा विक्रेताओं द्वारा खाली की गई जगहों में योगा स्टूडियो, पर्सनल ग्रूमिंग स्टूडियो, नेल क्लिपिंग सेंटर खोलकर इसका लाभ उठाया है। यह जनता का सेहत और साफ-सफाई पर बढ़ते ध्यान का नतीजा लगता है।

ब्रांडेड कंपनियों द्वारा बिक्री की कई जगह खाली करने से छोटे बिजनेस मालिक इनमें रुचि दिखा रहे हैं और इसे टोनी (अमीरों के रहने की जगहें) इलाकों में अवसर की तरह देख रहे हैं। लंदन, मुंबई से एक कदम आगे है। न सिर्फ सैलून बल्कि बियर गार्डन भी वहां नया शौक हैं। चूंकि लंदनवासी पिछले 4.5 महीनों से पब नहीं गए, इस सोमवार को खुले बियर गार्डन अगले 6 हफ्तों के लिए पूरी तरह बुक हैं, क्योंकि पब में ड्रिंकिंग-डाइनिंग 17 मई तक बंद है।

बियर गार्डन ऐसी जगहें हैं जहां कोई भी एक गिलास वाइन या बियर ले सकता है। जिन लोगों के पास बड़े बगीचे हैं, उन्होंने इस बिजनेस में हाथ आजमाना शुरू किया है या इन्हें पेशवेर बारटेंडर्स को लीज पर दे रहे हैं। दिलचस्प है कि हमारे देश में बारटेंडर फिर से उभरते बार कल्चर का लाभ उठा रहे हैं, जिसमें ज्यादा नए और प्रीमियम मॉकटेल की मांग बढ़ी है। वे दिन गए जब ढेर सारे शुगर सिरप, खीरे के टुकड़े और ढेर सारे बर्फ में डूबे नींबू के साथ बार मॉकटेल परोस देते थे।

अब मॉकटेल युवाओं की नई पसंद हैं। ऐसे भारतीय बढ़े हैं, जिनके लिए लंदनवासियों की तरह यह सिर्फ कुछ बियर गटकने या कुछ शॉट्स लेने के बारे में नहीं है। उनके लिए यह माहौल बदलने और नॉन-एल्कोहॉलिक ड्रिंक का लुत्फ उठाने के बारे में है। शायद यही कारण है कि मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में बार नए ट्रेनर तलाश रहे हैं, जो बारटेंडर को नॉन-एल्कोहॉलिक कॉम्बिनेशन बनाना सिखा सकें, वह भी ज्यादा शुगर सिरप डाले बिना।

कोरोना के दौर में शहरों के बदलाव की इस भाग-दौड़ से दूर, पैराग्लाइडिंग के लिए मशहूर हिमाचल के बीर गांव में न सिर्फ साउथ इंडियन कैफे शुरू हुआ है बल्कि मेहमानों को बतौर स्टार्टर ड्रिंक ‘रसम’ पिलाने की शुरुआत हुई है, यहां तक कि भिक्षुओं को भी, जिन्हें यह पसंद आ रही है। अव्वा (तेलुगु में मां) नाम का 70 सीटर कैफे स्थानीयों और पर्यटकों की भीड़ से भरा रहता है क्योंकि यह पूरे कांगड़ा इलाके में एकमात्र दक्षिण भारतीय रेस्त्रां है।

फंडा यह है कि अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो देखें कि आपके शहर में अभी किस चीज की मांग बढ़ी है। चूंकि अभी लोगों का आवागमन कुछ समय और सीमित रहेगा, इसलिए विकल्पों के साथ स्थानीय शॉपिंग और ग्रूमिंग की मांग रहेगी।

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