पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

डॉ. एम. चंद्र शेखर का कॉलम:अदने से वायरस ने इंसानों के बीच दूरियां बढ़ा दीं, सामाजिक प्राणियों के लिए अब जिम्मेदारी निभाने का समय

4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
डॉ. एम. चंद्र शेखर - Dainik Bhaskar
डॉ. एम. चंद्र शेखर

ग्रीक दार्शनिक अरस्तू ने हजारों साल पहले कहा था कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। लेकिन आज उसी प्राणी को एक अदने से वायरस ने समाज से बहिष्कृत सा कर दिया है। जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं ये वायरस इंसानों के बीच दूरियां बढ़ाता जा रहा है और चेता रहा है कि नजदीक आने पर खतरा बरकरार है।

इस वायरस ने इंसानों को मास्क पहनने के लिए इससे पहले इतना मजबूर कभी नहीं किया। अब ये हमारी बुद्धिमत्ता को भी परख रहा है। इंटरनेट पर भी लगातार सिर्फ वायरस की ही बातें हैं। दुनियाभर में इसके प्रसार की खबरों से डर, चिंता के साथ तनाव लगातार बढ़ रहा है। वायरस जानता है कि इंसानों के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है, लेकिन वही वायरस लोगों को मानसिक रूप से पंगु बनाकर उन्हें अस्पताल पहुंचा रहा है।

अब आते हैं सबसे जरूरी बात पर। लोगों को ये बात भले पता न हो, लेकिन वायरस के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मददगार तीन सिद्धांतों (मास्क पहनना, हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना) को लोग भूल गए हैं और इसलिए वायरस थमने का नाम नहीं ले रहा।

इसे नजरअंदाज करने के चलते ही आज हम इन बेबस हालात में हैं। अब इस मुश्किल घड़ी में हम सरकारों की ओर इस उम्मीद से देख रहे हैं कि वे ही कुछ करें और हमें बचा लें। लेकिन ये भी एक तथ्य है कि समाज में संसाधन सीमित हैं और बावजूद इसके हम भाईचारा भूलकर इसकी लूट में लगे हुए हैं।

वेदों का सूक्त ‘वैद्यो नारायणो हरिः’ आज सच साबित हुआ है। डॉक्टर्स अपना काम बखूबी कर रहे हैं। इंसानों ने ही वायरस से लड़ने के लिए टीका बनाया, भले लोगों ने ही अपनी जान जोखिम में डालकर अपने ऊपर इसका परीक्षण करवाया। लेकिन दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने टीके के प्रति संदेह पैदा किया और सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाए, जिसका नतीजा ये हुआ कि कई लोगों ने टीके से दूरी बना ली और वायरस फैलता रहा। आज हालात ये हैं कि वही भ्रम फैलाने वाले लोग टीके के लिए कतार में लगे हैं।

तकनीक के विकास के साथ ही सोशल मीडिया पर झूठ और अफवाहें बेरोकटोक फैल रही हैं और लोगों में दहशत फैलाकर जिंदगी में उथल-पुथल मचा रही है। सोशल मीडिया कंपनियों ने भी सूचनाओं की पुष्टि किए बिना उन्हें बढ़ावा दिया और समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करके लोगों के जीवन को संकट में डाल दिया।

वायरस से बचने के लिए जितनी जरूरी सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंसिंग है, इन दिनों सोशल मीडिया से दूरी भी उतनी ही जरूरी है। इस छोटे से वायरस ने लाखों परिवारों की जिंदगियां तबाह कर दी है, कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। लोगों की लापरवाही से ये महामारी जंगल की आग की तरह फैल गई है।

इस घातक वायरस का जल्द से जल्द खात्मा जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि सामाजिक दूरी का पालन करें, मास्क लगाएं और बार-बार हाथ धोएं, ताकि जिन्हें अब तक टीका लगवाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है, उनकी जिंदगी सुरक्षित रहे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)