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  • To Become The Chairman, MD And Director Of A Co operative Bank Must Be A Graduate With One Of The Subjects Of Banking, Or CA, Or MBA Finance

डॉ. भारत अग्रवाल का कॉलम:सहकारी बैंक का चेयरमैन, एमडी और निदेशक बनने वालों को बैंकिंग के एक विषय के साथ ग्रेजुएट, या सीए, या एमबीए फाइनेंस होना होगा

3 महीने पहले
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डॉ. भारत अग्रवाल - Dainik Bhaskar
डॉ. भारत अग्रवाल

अब बताइए! माने कोई को-ऑपरेटिव बैंक बना कर उसका एमडी, सीएमडी वगैरह बनने के लिए फिर से स्लेट-बत्ती पकड़नी पड़ेगी? आरबीआई ने बैंकिंग अधिनियम 1949 संशोधन 2020 के तहत आदेश दिया हुआ है कि सहकारी बैंक का चेयरमैन, एमडी और निदेशक बनने वालों को बैंकिंग के एक विषय के साथ ग्रेजुएट, या सीए, या एमबीए फाइनेंस होना होगा।

उम्र भी बस 35 से 70 के बीच होना चाहिए। इतना ही नहीं, सहकारी बैंक चलाते हुए साथ में, एमएलए, सांसद या कॉर्पोरेटर भी नहीं बन सकते। फिर क्या फायदा? वैसे भी कुल करीब डेढ़ हजार ही तो सहकारी बैंक हैं। साढ़े 8 करोड़ खाताधारक हैं। 215 बैंक गए तो गए वाली हालत में हैं। इतने पर भी इतनी सख्ती। भई बहुत नाइंसाफी है।
दो नई रेजिमेंट
ऐसा सुना गया है कि सेना में दो नई रेजिमेंटों के गठन को लेकर गहन चर्चा चल रही है। एक कश्मीरी वाल्मीकि समुदाय की रेजिमेंट बनाने का विचार है और दूसरी कश्मीरी पंडितों की रेजिमेंट का। जाहिर है, दोनों रेजिमेंट कश्मीर की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जानी हैं। दोनों समुदायों को इलाके का भूगोल अच्छी तरह पता है। वास्तव में ब्राह्मण रेजिमेंट (2) पहले 1796 में गठित की गई थी, लेकिन 1935 में अंग्रेजों ने इसका पंजाब रेजिमेंट में विलय कर दिया था। अंग्रेजों ने महार रेजिमेंट बनवाई थी, जो अभी भी अस्तित्व में हैं।
शबरी के राम
ओडिशा के एक आईजी ने कृष्ण भक्ति में खुद को राधा बना लिया था। कृष्ण प्रेम में चूड़ियां पहनी और लिपिस्टिक लगाई उनकी तस्वीरें बहुत प्रचलित हुई थीं। बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय राजनीतिक लगाव के भरोसे पुलिस सेवा छोड़ कर देख चुके हैं। और अब भजन-प्रवचन कर रहे हैं। आजकल उत्तर प्रदेश में मंत्रियों के कानाफूसी यह है कि कोई आईएएस राम प्रेमी हो जाए, तो भी यह जरूर ध्यान रखे कि कृष्ण के लिए राधा बना जा सकता है, लेकिन राम के लिए शबरी से ज्यादा बनने का स्कोप नहीं है। किसकी बात हो रही है, आप जानते ही हैं।
आपका और तुम्हारा... चिराग
चिराग पासवान खेल के मैदान में भले ही चित्त हो गए हों, खेल के बाद वाली प्रेस कांफ्रेंस तो करना जानते ही हैं। थोड़े दिनों पहले तक उनका डॉयलाग था कि वो तो मोदी जी के हनुमान हैं और इसी कारण मोदी जी से मदद नहीं मांग रहे हैं। वही चिराग पासवान अब कह रहे हैं कि बताओ, हनुमान बनने का क्या फल मिला? खैर, अब चिराग बिहार के यदुवंशियों की शरण में हैं, और तेजस्वी के लिए कहा गया है “तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई”।
बात गहरी है!
खेल कुछ तो गंभीर है। गुपकार वाले नेता पीएम से बात करने जब दिल्ली आए, तो कम से कम फोटो सेशन के दौरान, महबूबा मुफ्ती और एक अन्य के अलावा किसी ने मास्क नहीं पहना था। जब किसी ने मास्क पहनने के लिए महबूबा की तारीफ की, तो उनके एक समर्थक ने कह दिया कि जो चेहरे बेनकाब थे, वे मुखौटे वाले हैं। इतनी तल्खी? क्या यह किसी सियासी भूचाल का संकेत है?