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वरुण गांधी का कॉलम:शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने वाले देश में आमजन की गुजर-बसर दूभर

18 दिन पहले
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वरुण गांधी युवा नेता और सांसद - Dainik Bhaskar
वरुण गांधी युवा नेता और सांसद

भारत के औसत शहरी परिवार के लिए हफ्ते की बुनियादी किराना खरीद-लागत एक दशक में 68% बढ़ी है। हाल में मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में सब्जियों की कीमत बढ़कर 120-140 रुपए प्रति किलो हो गई। यह इससे पहले के महीने में 60-80 रुपए प्रतिकिलो थी।

आटे की कीमत जून 2016 में 24.56 रुपए प्रतिकिलो थी, जो मार्च 2022 में 29% बढ़ोतरी के साथ 31.68 रुपए हो गई। खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई के 2 से 6% के टॉलरेंस बैंड से आगे निकलते हुए अक्टूबर में 5 महीने के उच्च स्तर 7.41% पर पहुंच गई है। खाद्य कीमतों में ऐसी अस्थिरता से औसत भारतीयों के लिए रसोई बजट का प्रबंधन मुश्किल हो जाता है।

खाद्य पदार्थों से परे अन्य मासिक खर्चों में भी मूल्य वृद्धि और इससे जुड़ी अस्थिरता देखी गई है। एलपीजी की कीमत जून 2016 में 548.50 रुपए प्रति गैर-सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम सिलेंडर से बढ़कर अक्टूबर 2022 में 1,053 रुपए हो गई। इस बीच, बिजली के बिल भी बढ़ रहे हैं।

दिल्ली में बिजली की लागत में इस साल जून की तुलना में जुलाई में 4% की वृद्धि हुई है। तमिलनाडु में 500 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं का औसत बिजली बिल 53% बढ़ जाएगा। कर्नाटक के बिजली नियामक आयोग ने इस साल तीन दफे बिजली की कीमत में बढ़ोतरी की है। देश की राजधानी में पेट्रोल की कीमत जून 2016 में 65.65 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर इस साल अक्टूबर में 96.72 रुपए प्रति लीटर हो गई। सीएनजी में भी सितंबर से अक्टूबर के बीच 7 से 8% की बढ़ोतरी हुई है।

अगस्त 2022 में बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में किराया 2019 की तुलना में 15 से 20% अधिक था। दिल्ली-एनसीआर में इसी अवधि में औसत वृद्धि 10 से 15% थी, जबकि चेन्नई में 8 से 10% की वृद्धि देखी गई। बेहतर सार्वजनिक सेवाओं की पेशकश की दिशा में प्रत्यक्ष स्थानांतरण से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

बिजली और गैस आपूर्ति में अधिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ बिजली उत्पादकों और गैस आयातकों के साथ दीर्घकालिक सौदों से कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है। इस बीच दूसरे कई खर्च भी बढ़ गए हैं। 2019 की तुलना में इस साल शादी में औसत लागत 10% बढ़ गई है, क्योंकि औसत होटल दरें 15 से 18% बढ़ी हैं।

विवाह आयोजन के खर्च में भी 40% तक इजाफा हुआ है। दोपहिया या कार खरीदना भी महंगा होता जा रहा है। जनवरी 2021 से जनवरी 2022 के बीच विभिन्न प्रकार के कार मॉडलों की आपूर्ति-शृंखला की चुनौतियों को देखते हुए उनकी कीमतों में 4 से 8% की बढ़ोतरी हुई है। आपूर्ति-शृंखला पर दबाव और अधिक कड़े उत्सर्जन/सुरक्षा मानदंडों को देखते हुए कीमतों में और वृद्धि की आशंका है।

अचल संपत्ति की खरीदारी अब मुश्किल होती जा रही है। अपने घर का मालिक होने की लागत आज काफी अधिक है। दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु सरीखे प्रमुख शहरों में संपत्ति की कीमतों में पिछले साल में इस साल 3 से 10% की वृद्धि हुई है। सीमेंट और स्टील जैसी निर्माण सामग्री की लागत भी बढ़ी है। होम लोन महंगा हो रहा है।

औसत भारतीय लंबे समय तक उत्साहित नहीं रह सकता। ग्लोबल इश्यूज बैरोमीटर के एक सर्वे में 35% भारतीयों ने कहा उनकी वित्तीय स्थिति खराब हो रही है, जबकि 46% का आर्थिक दृष्टिकोण नकारात्मक था।

आरबीआई ने अक्टूबर की शुरुआत में रेपो दरों को बढ़ाकर 5.9% कर दिया है। आवास को किफायती बनाने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम करने की जरूरत होगी, जैसे- भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में सुधार, तेजी से वैधानिक मंजूरी को सक्षम करना, किफायती आवास के लिए योजना व डिजाइनिंग में नवाचार को प्रोत्साहन, लाभार्थियों की शीघ्र पहचान।

बचत में गिरावट आई है। आबादी का एक वर्ग म्युचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश कर रहा है, लेकिन यह भागीदारी काफी कम है। कोविड-19 के बाद औसत भारतीय ने अपनी बचत को महंगाई के मुकाबले देखा है। समय के साथ उपभोक्ताओं का विश्वास इस तरह के रुझानों से प्रभावित होगा, जिससे उपभोक्ताओं को घरेलू बजट को संतुलित करने के लिए खरीदारी कम करनी पड़ेगी। क्या हमारी अर्थव्यवस्था पर्याप्त रूप से लचीली है?

(ये लेखक के अपने विचार हैं)