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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:जीवन में जब प्रतिपल चुनौती आ जाए, तो पल-पल का हिसाब रखकर कर्म करें

5 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

‘कुछ लिखकर सो, कुछ पढ़कर सो। तू जिस जगह जागा सवेरे, उस जगह से बढ़कर सो।’ भवानी प्रसाद मिश्र ने ये पंक्तियां इस भाव से लिखी कि जीवन में जब प्रतिपल चुनौती आ जाए, तो पल-पल का हिसाब रखते हुए कर्म करना होगा। अब ‘रोज कमाना और रोज बचाना’ ऐसा अंदाज़ सबके जीवन में उतर आया है।

महंगाई बढ़ेगी और आमदनी घटेगी, तब क्या करें? यह सवाल जब चाणक्य से पूछा गया था तो उन्होंने मंत्रियों से कहा था कि बढ़ती हुई महंगाई का सामना अनुशासन से करना होगा और घटती हुई आय को मेहनत से बचाना होगा। तो महामारी के बचाव के लिए आज जितनी बातें कही जा रही हैं मास्क, वैक्सीनेशन, स्वच्छता, दूरी.. इन सबमें दो बातें और जोड़ लीजिए- अनुशासन व मेहनत।

कुछ लोग मूल रूप से अनुशासनहीन होते हैं। जिनको सारी दुनिया दुल्हन नजर आए, उनकी रंगीन मिजाजी का क्या कहना। ऐसे दुष्ट लोग खुद तो संकट में पड़ेंगे ही, दूसरों को भी परेशानी में डालेंगे। लेकिन, हम इनसे उलझकर अपनी ऊर्जा नष्ट न करते हुए अपने भीतर के ऐसे ही उद्दंड तत्व को नियंत्रित रखें और खूब परिश्रम करें। किया हुआ कभी व्यर्थ नहीं जाता। इन दिनों आमदनी को सुस्ती और महंगाई को मस्ती चढ़ी हुई है। इन दोनों का तोड़ है कायदा और हौसला। मतलब अनुशासन और परिश्रम।