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पुण्य तिथि पर स्मिता पाटिल को आदरांजली

एक वर्ष पहलेलेखक: जयप्रकाश चौकसे
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स्मिता पाटिल (फाइल)। - Dainik Bhaskar
स्मिता पाटिल (फाइल)।

13 दिसंबर 1986 को प्रसव के बाद स्मिता पाटिल की मृत्यु हो गई। उस रात मुंबई के एक क्रिकेट स्टेडियम में फिल्म उद्योग की सहायता के लिए धन जमा करने हेतु राज बब्बर और साथियों ने मनोरंजक कार्यक्रम प्रस्तुत किया था। मंच पर बारी-बारी से पांच संगीतकारों ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया। राज कपूर और दिलीप कुमार ने भी भाग लिया था। राज कपूर-दिलीप कुमार व्यक्तिगत जीवन में कोई कठिनाई होने पर एक-दूसरे से हमेशा मशविरा करते रहे। 13 दिसंबर को उस कार्यक्रम का संचालन करते समय ही राज बब्बर को सूचना मिली कि उनकी पत्नी स्मिता पाटिल की सेहत बेहद खराब है। राज बब्बर अस्पताल पहुंचे, स्मिता पाटिल ने नश्वर देह त्याग दी। कुछ मिनट पूर्व ही जन्मे पुत्र का नाम प्रतीक रखा। मृत्यु की गोद में जीवन का प्रतीक। ज्ञातव्य है कि राज कपूर के सहायक रहे रवींद्र पीपट ने स्मिता पाटिल, राज बब्बर, अमृता सिंह और अमरीश पुरी अभिनीत फिल्म ‘वारिस’ बनाई थी, जिसे हम स्मिता पाटिल की ‘मदर इंडिया’ मान सकते हैं। ‘वारिस’ एक संपत्ति की रक्षा की कहानी है। खलनायक संपत्ति को हड़पने के लिए वारिस की हत्या करा देता है। स्मिता पाटिल अभिनीत पात्र अपनी छोटी बहन का विवाह अपने ससुर से कराती है ताकि उसके द्वारा जन्म दिए गए पुत्र को वारिस बना सके और नकारात्मक शक्तियों को पराजित कर सके। वो ही अपनी बहन के पुत्र को पालती है और परिवार की संपत्ति और परंपरा की रक्षा करती है। स्मिता पाटिल ने अविस्मरणीय अभिनय किया था। स्मिता पाटिल ने रेडियो और टेलीविजन पर समाचार पढ़ने का कार्य किया। श्याम बेनेगल ने स्मिता पाटिल को अभिनय के लिए आमंत्रित किया। स्मिता पाटिल ने सामाजिक सोद्देश्यता से गढ़ी फिल्मों में अभिनय करके इतनी लोकप्रियता प्राप्त कर ली थी कि प्रकाश मेहरा जैसी मसाला फिल्में करने वाले ने भी स्मिता पाटिल को अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म में प्रस्तुत किया। स्मिता पाटिल ने केतन मेहता की ‘मिर्च मसाला’ में भी विलक्षण अभिनय किया है। स्मिता पाटिल ने जीवन के हर क्षण को पूरी सार्थकता से जिया। उनमें इतना नैतिक साहस था कि वे शक्तिशाली लोगों के द्वारा किए गए गलत काम की आलोचना भी उनके सामने खड़े रहकर करती थीं। अगर आज स्मिता पाटिल हमारे बीच जीवित होतीं तो यकीनन वे सत्ता से सीधे लोहा लेतीं। महान पाटिल परिवार में जन्मी स्मिता पाटिल अपने यथार्थ में शेर बब्बर की तरह ही रहीं। उनके व्यक्तित्व में कुछ वैसा ही इस्पात था जैसा इंदिरा गांधी में रहा है। रीढ़ में इस तरह की मज्जा वर्तमान में कहीं नजर नहीं आती। यह गीदड़ भभकियों से डरते रहने का कालखंड है। गीदड़ शेर की खाल धारण करके दहाड़ रहे हैं। स्मिता पाटिल के स्वान प्रतीक ने कुछ फिल्मों में अभिनय किया है, परंतु उनके पास अपनी मां की एकाग्रता का अभाव है। स्मिता पाटिल का स्मरण करते हुए हममें वर्तमान के टेलीविजन पर खबर पढ़ने वालों के लिए जिज्ञासा जागती है कि वे इस कदर दरबारी हो गए हैं। ज्ञातव्य है कि विवाद से घिरी कलाकार हंसा वाडकर के जीवन से प्रेरित श्याम बेनेगल की फिल्म ‘भूमिका’ में स्मिता पाटिल ने अभिनय किया था। राज बब्बर को पहल करना चाहिए कि स्मिता पाटिल बायोपिक बने और कंगना रनोट को भूमिका दी जाए।

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