परदे के पीछे / अदृश्य होने की कामना से प्रेरित बॉलीवुड फिल्में

जयप्रकाश चौकसे

जयप्रकाश चौकसे

Feb 19, 2020, 12:04 AM IST

खबर है कि रणवीर सिंह के साथ ‘मि. इंडिया’ का नया संस्करण बनाया जा रहा है। अदृश्य हो जाने की कथा पर राम गोपाल वर्मा ‘गायब’ नामक फिल्म बना चुके हैं। इस तरह की फिल्म विगत सदी के छठे दशक में ‘मि.एक्स’ के नाम से बनी थी। ‘मि.एक्स’ के नायक अशोक कुमार, बोनी कपूर की ‘मि. इंडिया’ में चरित्र भूमिका में नजर आए। नायक के पिता ने अदृश्य होने के ज्ञान को विकसित किया था और अशोक कुमार उस वैज्ञानिक के सहयोगी तथा मित्र थे। क्या इसी तरह नए संस्करण में अनिल कपूूर, अशोक कुमार अभिनीत भूमिका निभाएंगे? क्या श्रीदेवी अभिनीत भूमिका दीपिका या आलिया भट्‌ट अभिनीत करेंगी?


ज्ञातव्य है कि जब सलीम खान और जावेद अख्तर का अलगाव हुआ था, तब दो पटकथाएं लगभग लिखी जा चुकी थीं। सलीम खान ने जावेद को एक पटकथा चुनने को कहा और उन्होंने मि. इंडिया चुनी। सलीम खान अलगाव से इतने आहत हुए कि उन्होंने दूसरी पटकथा ‘दुर्गा’ कभी किसी को सुनाई ही नहीं। देव आनंद की बहन के पुत्र शेखर कपूर लंदन में चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, परंतु वे फिल्म बनाना चाहते थे। अंग्रेजी उपन्यास ‘मैन वीमैन एंड चाइल्ड’ से प्रेरित मासूम उन्होंने बनाई।

बहरहाल, मि. इंडिया के निर्माण में शबाना आजमी ने अदृश्य रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बोनी कपूर, सतीश कौशिक की ‘लगान’ से प्रभावित हुए और उन्होंने ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ और ‘प्रेम’ के निर्देशन का अवसर दिया। अमरीश पुरी का संवाद ‘मोगेम्बो खुश हुआ’ उतना ही लोकप्रिय हुआ, जितना शोले का संवाद ‘कितने आदमी थे रे सांभा’। नारद मुनि अदृश्य होकर मनचाहे स्थान पर समाचार देने पहुंच जाते थे। आम आदमी भी अदृश्य होकर अपने परिवार के लिए सुविधाएं जुटाना चाहता है। विरह झेलते प्रेमी भी कामना करते हैं कि काश! वे अदृश्य होकर अपनी प्रेमिका के पास पहुंच जाते। अगर सचमुच अदृश्य होने का वरदान मिले या विज्ञान ही अदृश्य होने का कीमिया खोज ले तो जीवन अपना रोमांच खो देगा। 


मि. इंडिया के क्लाइमैक्स में नायक अदृश्य होने वाले यंत्र को त्यागकर आम आदमी की तरह लड़ता है और खलनायक मोगेम्बो की पिटाई करता है। आश्चर्य यह है कि यही दर्शक राजनीति के क्षेत्र में मोगेम्बो को चुनता है। अमिताभ बच्चन की इच्छा गब्बर का पात्र अभिनीत करने की थी, परंतु रमेश सिप्पी जानते थे कि अवाम इसे पसंद नहीं करेगी। गौरतलब है कि मि. एक्स, मि. इंडिया और गायब में अदृश्य होने वाले पात्र का आकल्पन पुरुष की तरह किया गया है। अदृश्य होने की क्षमता कभी स्त्री पात्रों को नहीं दी गई।

यह सुखद खबर है कि फौज में उच्चतम पद स्त्रियों को दिया जा सकेगा। आबिद सूरती धर्मयुग के लिए ‘डब्बूजी’ नामक कार्टून बनाते थे। उन्होंने अनेक कथाएं और उपन्यास भी लिखे हैं। उनकी एक कथा में पात्र को समुद्र तट पर एक चश्मा मिलता है, जिसे लगाते ही वह अदृश्य हो जाता है। अदृश्य होकर वह अपने परिवार और मित्रों के बीच जा पहुंचता है। उसे घोर दुख होता है कि किसी को उससे प्रेम नहीं था और वह उनके जीवन में तकई उपयोगी नहीं था। स्मरण आता है कि एलिया कजान के उपन्यास ‘द अरेंजमेंट’ में नायक की कार दुर्घटनाग्रस्त होती है।

अस्पताल में वह नीम बेहोशी में यह सुनता है कि डॉक्टर को आशंका है कि उसकी याददाश्त जा सकती है। वह याददाश्त जाने का अभिनय करता है तो सारे रिश्तों का खोखलापन उजागर हो जाता है। गौरतलब है कि हमारे बारे में अन्य क्या सोचते हैं, यह जान लेना सुविधाजनक व्यवस्था को भंग कर देता है। सत्य से सामंजस्य स्थापित करने के लिए बड़ा साहस चाहिए। गायब होने का कीमिया हासिल करने वाले व्यक्ति के मन में देखे जाने की इच्छा जागृत होती है तो वह वस्त्र धारण करता है।

वस्त्र दिखाई देते हैं, मनुष्य नहीं। इस तरह के मनुष्य का नाम नागरिकता के रजिस्टर में कैसे दर्ज होगा? बहरहाल, मि. इंडिया के नए संस्करण में बहुत संभावनाएं हैं। रणवीर सिंह आधी फिल्म में दिखाई नहीं देंगे, परंतु मेहनताना पूरा पाएंगे। क्या नए संस्करण में सलीम और जावेद को क्रेडिट दिया जाएगा? 

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