पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Db original
  • Jaiprakash Chowksey Parde Ke Peeche On The Convenience Of The Dispensation Of The Dwarfs

व्यवस्था की सहूलियत बौनों की जम्हूरियत

7 महीने पहलेलेखक: जयप्रकाश चौकसे
  • कॉपी लिंक
प्रतीकात्मक फोटो।

राजकुमार हिरानी की आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘पीके’ में नायक चलते समय अपने हाथ बदन से सटाकर चलता है। आमतौर पर चलते समय हमारे पैरों के साथ-साथ हाथ चलायमान रहते हैं। नदी में तैरते समय भी हाथ और पांव दोनों चलते हैं। तैरने के लंबे अनुभव से मनुष्य बिना हाथ-पैर हिलाए भी पानी की सतह पर कुछ समय तक स्थिर रह सकता है। जैसे लकड़ी की नाव बिना पतवार चलाए भी पानी में डूबती नहीं। पानी और हवा के वेग का प्रभाव मनुष्य के शरीर पर पड़ता है। जब अनिच्छुक अशोक कुमार को अभिनय करना पड़ा तब समस्या यह थी कि संवाद बोलते समय या खामोश चलते हुए, अपने हाथ कैसे रखें। उन्होंने हाथ कोट की जेब में रखने की पतली गली खोज निकाली।  गांव में नदी से जल के मटके सिर पर रखकर चलने वाली स्त्री इतना संतुलन बनाए रखती है कि एक बूंद भी मटके से नहीं गिरती। यह काम रस्सी पर चलने की तरह संतुलन बनाए रखने की कला है। सरौते से सुपारी काटते समय भी मुंह से आवाज निकलती है। मानो खामोश रहते हुए सुपारी नहीं काटी जा सकती। ‘शोले’ की बसंती बिना बोले तांगा नहीं चला सकती। संभवत: उसकी घोड़ी धन्नो को भी बातें सुनना पसंद है। देव आनंद बहुत तेज गति से चलते थे और उनका साथ देने वालों को दौड़ना पड़ता था। जॉनी वॉकर ने कुछ फिल्मों में लंगड़े व्यक्ति का पात्र अभिनीत किया है और उनका बांकपन अवाम को बहुत पसंद आता है। ज्ञातव्य है कि बलराज साहनी ने इंदौरी बदरुद्दीन को मुंबई में बस कंडक्टर का काम करते देखा। वे अपना काम करते हुए यात्रियों को हंसाया करते थे। बलराज साहनी की सिफारिश पर ही गुरु दत्त ने बदरुद्दीन को जॉनी वॉकर नाम दिया। वे इतने सफल हुए कि बतौर नायक भी उन्होंने अभिनय किया। ‘छूमंतर’ फिल्म में वे मेहबूबा के मोहल्ले से पिटकर वापस आते हैं। उन्हें हमेशा इतना पीटा जाता है कि खटिया पर डालकर उन्हें घर लाया जाता है।  गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का कथन है कि मनुष्य का सीधा खड़ा होना भी उसका स्वतंत्रता के प्रति आग्रह माना जा सकता है। व्यवस्था की जिद है कि मनुष्य झुककर चले। आज्ञा न मानने पर डंडे चलाए जाते हैं। दीपा मेहता की फिल्म ‘वॉटर’ की शूटिंग बनारस में नहीं होने दी थी। दीपा मेहता ने केंद्र और प्रदेश सरकार से बाकायदा शूटिंग करने के लिए आज्ञा पत्र प्राप्त किया था। शूटिंग का विरोध करने वाला एक हुड़दंगी गंगा में कूद गया। इस तथाकथित आत्महत्या प्रकरण के बाद प्रदेश सरकार ने दीपा मेहता को यूनिट सहित बनारस छोड़ने की आज्ञा दे दी। बहरहाल दीपा मेहता ने फिल्म की शूटिंग श्रीलंका में की। कुछ समय बाद दीपा मेहता की बेटी ने उसी गंगा में आत्महत्या करने वाले हुड़दंगी को दिल्ली में देखा। वह आत्महत्या का एक और स्वांग रचने जा रहा था। बाद में उसने दीपा मेहता की पुत्री को बताया कि हुड़दंग करना उसका पेशा है। वर्तमान समय में मनुष्य मृत शताब्दियों का बोझ लेकर चल रहा है और यही प्रक्रिया उसे बौना भी बना रही है। गुजश्ता सदियों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है, उन्हें मारा गया है, मुर्दा बनाया गया है ताकि अवाम को संकीर्णता की खाई में फेंक दिया जाए। गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर का कथन है कि नागरिकता में मनुष्य स्वभाव का अनापेक्षित कार्यकलाप शामिल है। जिसे किसी भी रजिस्टर में कैसे दर्ज किया जा सकता है।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज का दिन पारिवारिक व आर्थिक दोनों दृष्टि से शुभ फलदाई है। व्यक्तिगत कार्यों में सफलता मिलने से मानसिक शांति अनुभव करेंगे। कठिन से कठिन कार्य को आप अपने दृढ़ विश्वास से पूरा करने की क्षमता रखे...

और पढ़ें