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‘सड़क-2’ से निर्देशन क्षेत्र में महेश भट्‌ट की वापसी

8 महीने पहलेलेखक: जयप्रकाश चौकसे
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महेश भट्‌ट की फिल्म 'सड़क 2' का पाेस्टर।

संजय दत्त ने महेश भट्ट से अनुरोध किया कि वे ‘सड़क 2’ का निर्देशन करें। महेश भट्ट ने फिल्म निर्देशन करना छोड़ दिया था और अपने परिवार की निर्माण कंपनी ‘विशेष फिल्म्स’ के लिए विषय का चुनाव करके अपने सहयोगियों को निर्देशन का अवसर देने लगे थे। मोहित सूरी और विक्रम भट्ट को उन्होंने अनेक अवसर दिए। एक तरह से वे रिमोट कंट्रोल द्वारा फिल्में बनाते रहे। ‘विशेष फिल्म्स’ कंपनी में सृजन का काम महेश भट्ट करते हैं और उनके भाई मुकेश भट्ट पूंजी तथा वितरण का कार्य करते हैं। दोनों भाइयों में आपसी समझ है। महेश किसी काम को नहीं करने का बहाना यह बनाते हैं कि मुकेश नहीं चाहता और मुकेश इसी तरह महेश भट्ट को जिम्मेदार ठहराते हैं। जबकि सारे निर्णय दोनों की सहमति से होते हैं। महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट भी फिल्मकार थे और उन्होंने विविध भाषाओं में लगभग 100 फिल्में बनाई थी। नानाभाई भट्ट ने एक जूनियर कलाकार से दूसरा विवाह किया था। उस दौर में दो विवाह करना आज की तरह नाजायज नहीं था। महेश भट्ट अपनी युवावस्था में एंग्री यंग मैन की छवि में स्वयं को प्रस्तुत करते थे। यह आक्रोश की मुद्रा उनका दिखावा था। उस दौर में महेश कुछ काम मात्र चौंकाने के लिए किया करते थे, मसलन उन्होंने स्वयं को सगर्व नाजायज संतान कहा। उनके पिता नानाभाई भट्ट ने इसका खंडन करते हुए अपने दोनों जायज विवाह के दस्तावेज जाहिर कर दिए। एक दौर में महेश भट्ट, विनोद खन्ना और परवीन बॉबी आचार्य रजनीश को सुनने हर सप्ताह पूना जाते थे। आचार्य रजनीश के अोरेगन जाने के समय महेश का उनसे मोहभंग हो चुका था। महेश अपनी भीतरी बेचैनी से जूझने के लिए कुछ समय एक यू.जी. कृष्णमूर्ति के बताए मार्ग पर भी चले। महेश भट्ट ने ‘नया दौर’ नामक फिल्म बनाई थी जो मारियाे पुजो के उपन्यास गॉडफादर से प्रेरित थी। उन्होंने शबाना आज़मी और विनोद खन्ना के साथ ‘रंग हजार’ फिल्म बनाई। असफल फिल्मों के कारण निर्माण कंपनी पर कर्ज हो गया। उस समय टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार ने महेश को प्रस्ताव दिया कि वे टेलीविजन के लिए एक फिल्म बनाएं। गुलशन अपने संगीत को बेचने के उद्देश्य से फिल्म बनाना चाहते थे। महेश को ऐसी फिल्म बनाने में रुचि नहीं थी, जो सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं की जाएगी। उस समय मुकेश ने महेश पर दबाव बनाया कि गुलशन का प्रस्ताव स्वीकार करके उस रकम से कंपनी के कर्ज उतार दें, अन्यथा ब्याज की राशि उनकी कंपनी को समाप्त कर देगी। महेश भट्ट ने अपने प्रिय विषय ‘नाजायज संतान’ पर फिल्म बनाई। उनकी कर्ज से मुक्ति हो गई। महेश भट्ट के करियर में एक निर्णायक मोड़ इस तरह आया कि सलीम खान और जावेद अख्तर के अलगाव के बाद सलीम खान ने कुछ समय तक लेखन बंद रखा। राजेंद्र कुमार अपने पुत्र कुमार गौरव को ‘लव स्टोरी’ में प्रस्तुत कर चुके थे। अपने पुत्र के करियर को जमाने के लिए उन्होंने सलीम खान से निवेदन किया कि वे पुनः लिखना प्रारंभ करें। सलीम खान ने ग्राम ग्रीन की लिखी पटकथा ‘द थर्ड मैन’ से प्रेरित होकर ‘नाम’ नामक पटकथा लिखी। सलीम खान ने महेश भट्ट को निर्देशन करने के लिए निमंत्रित किया। ज्ञातव्य है कि संजय दत्त की बहन के साथ कुमार गौरव का विवाह हुआ है। अत: महेश भट्ट ने कुमार गौरव, संजय दत्त और उनकी मां की भूमिका में नूतन को लेकर ‘नाम’ बनाई, जिसकी सफलता ने संजय दत्त को सितारा बना दिया। बहरहाल महेश भट्ट हमेशा कुछ नया करने की इच्छा से संचालित रहे। उन्होंने अनुपम खेर और सोनी राजदान को लेकर ‘सारांश’ बनाई। इस फिल्म ने उन्हें सृजन संतोष दिया। देश के विभाजन पर महेश भट्ट की “बेगम जान’ में विद्या बालन ने मर्मस्पर्शी अभिनय किया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म सफल नहीं रही। आजकल महेश और मुकेश भट्ट की “विशेष फिल्म्स’ आर्थिक संकट से जूझ रही है और वे “सड़क 2’ का निर्माण कर रहे हैं। महेश भट्ट निर्देशन क्षेत्र में वापसी कर रहे हैं। बेहतर यह होता कि अपनी नई पारी के लिए वह कोई नया रास्ता बनाते। उस सड़क पर क्या लौटना जिस पर भी पहले ही मीलों चल चुके हों।

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