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परदे के पीछे / 'धूम' की वापसी और अभिषेक का बाहर होना?



Dainik Bhaskar

Sep 20, 2018, 07:16 AM IST

आदित्य चोपड़ा 'धूम' की अगली कड़ी पर काम कर रहे हैं। यह एक पुलिस अफसर और चोर के द्वंद्व की कथा है। अब तक बनी फिल्मों में चोर की भूमिकाएं अलग-अलग कलाकारों ने अभिनीत की हैं परंतु पुलिस अफसर अभिषेक बच्चन रहे हैं। पुलिस अफसर का सहायक आदतन आशिक मिजाज है और हंसोड़ पात्र है, जिसे उदय चोपड़ा अभिनीत करते रहे हैं। आदित्य 'धूम' के अगले भाग को विश्व स्तर का बनाना चाहते हैं जैसे जेम्स बॉन्ड शृंखला रही है। इसकी लागत को देखते हुए, उनके लिए यह व्यावहारिक है कि पुलिस अफसर की भूमिका कोई बड़ा सितारा करे और उसके आशिक मिजाज हसोड़ सहायक की भूमिका भी कोई लोकप्रिय कलाकार अदा करे। इस परिवर्तन से ही भव्य लागत को मुनाफे सहित प्राप्त किया जा सकता है। अपने भाई उदय चोपड़ा को तो वे आर्थिक समीकरण समझा सकते हैं कि वे स्वयं भी लाभ के भागीदार हैं परंतु अभिषेक बच्चन से क्या कहेंगे? बच्चन परिवार से उनके पुराने संबंध हैं। यश चोपड़ा की 'दीवार', 'त्रिशूल' 'सिलसिला' इत्यादि के नायक रहे हैं अमिताभ बच्चन। इतना ही नहीं वरन अमिताभ बच्चन को चरित्र भूमिकाओं में भी 'मोहब्बतें' फिल्म से लाया गया है। उनकी 'वीर जारा' में भी बच्चन साहब ने अहम किरदार निभाया था। 


सिनेमा के इस दौर में लगातार तीव्र गति से विकसित होती टेक्नोलॉजी का लाभ उठाना व्यावहारिक फैसला है। आज टेक्नोलॉजी नायक के समान महत्वपूर्ण है। साधन साध्य को भी तय करने लगे हैं। मंजिल का महत्व उस तक पहुंचने का रास्ता तय करता है। सत्ता हथियाना है, शासन ठप पड़ चुका है। प्रशासन अब मुद्‌दा ही नहीं रहा। मंत्रमुग्ध अवाम उस सपेरे की तरह है जो अपनी बजाई धुन पर स्वयं डोल रहा है। सांप अवाम की आस्तीन में घुसा बैठा है। सत्य की अब किसी को आवश्यकता ही नहीं। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि 'धूम' की अगली कड़ी में चोर की भूमिका तीनों खानों में से कोई एक करेगा और पुलिस अफसर व उसके हंसोड़ साथी की भूमिका में भी लोकप्रिय सितारे होंगे। अभिषेक बच्चन अपने पिता की तरह महत्वाकांक्षी नहीं हैं। वे सामान्य जीवन में भी अपने आप को सहज पाते हैं और अपने आराम पसंद नजरियों को किसी दार्शनिक आवरण में नहीं छुपाते। वे किसी दौड़ का हिस्सा नहीं हैं।' वे 'मुतमइन है कि पत्थर पिघल नहीं सकता' परंतु अपनी आवाज में असर के लिए बेकरार भी नहीं हैं। वे निहायत ही गैर-फिल्मी व्यक्ति हैं। 


अभिषेक बच्चन कविता नहीं लिखते परंतु अपने दादा हरिवंश राय बच्चन की तरह शांत प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। उनके पिता का अत्यंत महत्वाकांक्षी होना संभवत: उन्हें अपनी माता तेजी बच्चन से प्राप्त हुआ है जो एक सिख परिवार से आई थीं। हरिवंश राय बच्चन ने निहायत ही साफगोई से अपनी आत्मकथा लिखी थी परंतु उनके सुपुत्र आत्मकथा नहीं लिखेंगे। अभिषेक बच्चन को अपनी जीवन कथा लिखनी चाहिए। अाजकल सितारों की जीवन कथा के लिए प्रकाशन व्यवसाय में गहरी रुचि है। इस तरह की किताबें बिक भी जाती हैं और बायोपिक के लिए भी बाजार है। अभिषेक बच्चन की पत्नी शिखर सितारा रही हैं और उन्हें आज भी फिल्म प्रस्ताव मिलते हैं। अभिषेक बच्चन के चारों ओर प्रसिद्ध और कामयाब लोग रहते हैं। उनकी माता जया बच्चन अच्छी कलाकार रही हैं। 


याद आते हैं अनूप कुमार जिनके बड़े भाई अशोक कुमार अत्यंत सफल, सक्षम कलाकार रहे हैं और मंझले भाई किशोर कुमार तो बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे। इस तरह दो सफल व्यक्तियों के साथ रहते हुए अनूप कुमार कभी किसी दौड़ का हिस्सा नहीं बने। उन्हें कुंठाएं गिरा सकती थीं। आज अभिषेक बच्चन की वही दशा है जो अनूप कुमार की थी परंतु वे भी अनूप कुमार की तरह ही अपने को कुंठाओं से बचाते हुए सामान्य व्यक्ति की तरह बने रहते हैं। इसलिए 'धूम' से बाहर होने का उन्हें कोई विशेष मलाल नहीं होगा। आदित्य चोपड़ा 'धूम' की अगली कड़ी में अमिताभ बच्चन के लिए एक भूमिका की रचना कर सकते हैं। अमिताभ बच्चन को केंद्रीय चरित्र भूमिका में लेते ही अभिषेक बच्चन का 'धूम' में नहीं होना बच्चन को उतना बुरा नहीं लगेगा। 


फिल्मकार बोनी कपूर के किसी लेखक मित्र ने उन्हें ऐसी पटकथा भेजी है, जिसमें पूरे बच्चन परिवार के लिए ठोस भूमिकाएं हैं। बोनी कपूर अमेरिका से आज भारत पहुंच रहे हैं। उन्हें अपनी फिल्म निर्माण संस्था में आए अनेक प्रस्तावों का गहन अध्ययन करना है और छोटी बिटिया खुशी भी अब अभिनय क्षेत्र में प्रवेश करने जा रही हैं। 

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