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बर्थडे / 85 के हुए गुलजार

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बॉलीवुड डेस्क. गीतकार गुलजार रविवार को अपना 85वां जन्मदिन मना रहे हैं। 18 अगस्त, 1934 को पंजाब स्थित झेलम (अब पाकिस्तान में)  के एक छोटे से कस्बे दीना में जन्म हुआ। संपूर्ण सिंह कालरा उनका असली नाम था। लेकिन शायरी से जुड़ने के बाद उनका नाम गुलजार हो गया।बॉलीवुड डेस्क. गीतकार गुलजार रविवार को अपना 85वां जन्मदिन मना रहे हैं। 18 अगस्त, 1934 को पंजाब स्थित झेलम (अब पाकिस्तान में) के एक छोटे से कस्बे दीना में जन्म हुआ। संपूर्ण सिंह कालरा उनका असली नाम था। लेकिन शायरी से जुड़ने के बाद उनका नाम गुलजार हो गया।
सिख  परिवार में जन्मे गुलजार ने आजादी के समय हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी का सामना किया और पिछले 7 दशकों में कई विषम सामाजिक परिस्थितियों से रूबरू हुए।सिख परिवार में जन्मे गुलजार ने आजादी के समय हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी का सामना किया और पिछले 7 दशकों में कई विषम सामाजिक परिस्थितियों से रूबरू हुए।
गुलजार ने सिने करियर की शुरुआत 1961 में विमल राय के सहायक के रूप में की। बाद में उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी और हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर भी काम किया।गुलजार ने सिने करियर की शुरुआत 1961 में विमल राय के सहायक के रूप में की। बाद में उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी और हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर भी काम किया।
गीतकार के रूप में गुलजार ने पहला गाना 'मोरा गोरा अंग लेई ले' साल 1963 में प्रदर्शित विमल राय की फिल्म 'बंदिनी' के लिए लिखा। तब से लेकर आज तक गुलजार ने जो भी लिखा वो दुनियाभर में सराहा गया।गीतकार के रूप में गुलजार ने पहला गाना 'मोरा गोरा अंग लेई ले' साल 1963 में प्रदर्शित विमल राय की फिल्म 'बंदिनी' के लिए लिखा। तब से लेकर आज तक गुलजार ने जो भी लिखा वो दुनियाभर में सराहा गया।
गुलजार ने 1971 में फिल्म 'मेरे अपने' के जरिये फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा।गुलजार ने 1971 में फिल्म 'मेरे अपने' के जरिये फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा।
1973 में उन्होंने अभिनेत्री राखी से शादी की।  शादी के कुछ वक्‍त बाद ही दोनों के बीच दूरियां आ गईं और वे अलग हो गए।1973 में उन्होंने अभिनेत्री राखी से शादी की। शादी के कुछ वक्‍त बाद ही दोनों के बीच दूरियां आ गईं और वे अलग हो गए।
गुलजार चाहते थे क‍ि शादी के बाद राखी फ‍िल्‍मों में काम न करें, लेक‍िन राखी ने 'कभी-कभी' (1976) में काम करने के ल‍िए हामी भर ली और शूट‍िंग शुरू कर दी। हालांक‍ि 40 साल से अलग अलग रहने के बाद भी उन्‍होंने तलाक नहीं ल‍िया। आज भी कई मौकों पर दोनों साथ देखे जाते हैं।गुलजार चाहते थे क‍ि शादी के बाद राखी फ‍िल्‍मों में काम न करें, लेक‍िन राखी ने 'कभी-कभी' (1976) में काम करने के ल‍िए हामी भर ली और शूट‍िंग शुरू कर दी। हालांक‍ि 40 साल से अलग अलग रहने के बाद भी उन्‍होंने तलाक नहीं ल‍िया। आज भी कई मौकों पर दोनों साथ देखे जाते हैं।
दोनों की एक बेटी मेघना हैं जो आज एक सफल बॉलीवुड न‍िर्देशक हैं। उन्‍होंने राजी और तलवार जैसी फ‍िल्‍में बनाई हैं।दोनों की एक बेटी मेघना हैं जो आज एक सफल बॉलीवुड न‍िर्देशक हैं। उन्‍होंने राजी और तलवार जैसी फ‍िल्‍में बनाई हैं।
गुलजार को 2002 में साहित्य अकादमी, 2004 में पद्म भूषण और 2008 में आई 'स्लमडॉग मिलेनियर' के गाने 'जय हो' के लिए ग्रैमी और ऑस्कर अवॉर्ड मिला। गुलज़ार साहब गानों के अलावा, आशीर्वाद (1968), खामोशी (1969), सफर (1970) , घरोंदा , खट्टा-मीठा (1977) और मासूम (1982) जैसी फिल्मों की पटकथा भी लिख चुके हैं।गुलजार को 2002 में साहित्य अकादमी, 2004 में पद्म भूषण और 2008 में आई 'स्लमडॉग मिलेनियर' के गाने 'जय हो' के लिए ग्रैमी और ऑस्कर अवॉर्ड मिला। गुलज़ार साहब गानों के अलावा, आशीर्वाद (1968), खामोशी (1969), सफर (1970) , घरोंदा , खट्टा-मीठा (1977) और मासूम (1982) जैसी फिल्मों की पटकथा भी लिख चुके हैं।
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