सिटी इवेंट्स

मंचन / मनोज जोशी के अभिनय से जीवंत हुआ नाटक चाणक्य

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रांची स्थित रिम्स आडिटोरियम में जब चाणक्य की भूमिका में मनोज का गंभीर स्वर गूंजा, मैं आर्य विष्णु गुप्त चाणक्य तुम्हें संपूर्ण भारत का चक्रवर्ती पद देने के लिए तत्पर रहूंगा... मांगो। इस संवाद पर तालियों से दर्शकों ने दाद दी।रांची स्थित रिम्स आडिटोरियम में जब चाणक्य की भूमिका में मनोज का गंभीर स्वर गूंजा, मैं आर्य विष्णु गुप्त चाणक्य तुम्हें संपूर्ण भारत का चक्रवर्ती पद देने के लिए तत्पर रहूंगा... मांगो। इस संवाद पर तालियों से दर्शकों ने दाद दी।
चाणक्य का 1057वां मंचन मंगलवार को पद्मश्री मनोज जोशी ने किया।चाणक्य का 1057वां मंचन मंगलवार को पद्मश्री मनोज जोशी ने किया।
चाणक्य एक दृश्य में बोले, धर्म राष्ट्र और समाज के विकास के लिए होता है। अगर धर्म राष्ट्र के विकास में बाधक बन जाए तो वो त्याज्य है। राष्ट्र से अधिक महत्व की कोई नीति नहीं होती।चाणक्य एक दृश्य में बोले, धर्म राष्ट्र और समाज के विकास के लिए होता है। अगर धर्म राष्ट्र के विकास में बाधक बन जाए तो वो त्याज्य है। राष्ट्र से अधिक महत्व की कोई नीति नहीं होती।
नाटक को आनंद राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत, विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव, विधानसभा के सचेतक अनंत ओझा, नगर विकास मंत्री सीपी सिंह समेत भरे सभागार ने उठाया।नाटक को आनंद राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत, विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव, विधानसभा के सचेतक अनंत ओझा, नगर विकास मंत्री सीपी सिंह समेत भरे सभागार ने उठाया।
इतिहास के पन्ने कमोबेश हर फ्रेम में फड़फड़ाए। हर दृश्य कभी हंसी, कभी रुदन, कभी चिंतन का सबब बना।इतिहास के पन्ने कमोबेश हर फ्रेम में फड़फड़ाए। हर दृश्य कभी हंसी, कभी रुदन, कभी चिंतन का सबब बना।
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