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भोपाल / बड़ी आंखों वाली पेटिंग्स बनी आकर्षण का केंद्र

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स्वराज वीथि में चित्रकार मंजुनाथ माने के आंखें थीम पर केंद्रित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है।स्वराज वीथि में चित्रकार मंजुनाथ माने के आंखें थीम पर केंद्रित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
कर्नाटक से आए मंजुनाथ माने की चित्र प्रदर्शनी की शुरुआत हुई।कर्नाटक से आए मंजुनाथ माने की चित्र प्रदर्शनी की शुरुआत हुई।
कर्नाटक सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ कन्नड़ एंड कल्चर के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में मंजुनाथ माने के 12 चित्र प्रदर्शित हैं।कर्नाटक सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ कन्नड़ एंड कल्चर के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में मंजुनाथ माने के 12 चित्र प्रदर्शित हैं।
इनमें एक ओर जहां कर्नाटक के ग्रामीण लोगों की वेशभूषा और महिलाओं के सजने संवरने के पारंपरिक ढंग दिखाई देते हैं।इनमें एक ओर जहां कर्नाटक के ग्रामीण लोगों की वेशभूषा और महिलाओं के सजने संवरने के पारंपरिक ढंग दिखाई देते हैं।
वहीं मैसूर के दशहरे की रौनक, हम्पी के मंदिरों में लोगों का लगता जमावड़ा और अखंड शिला पर 400 सीढ़ियां चढ़कर नंदी तक पहुंचते श्रद्धालू नजर आते हैं।वहीं मैसूर के दशहरे की रौनक, हम्पी के मंदिरों में लोगों का लगता जमावड़ा और अखंड शिला पर 400 सीढ़ियां चढ़कर नंदी तक पहुंचते श्रद्धालू नजर आते हैं।
इन सभी पेंटिंग्स में चटख रंगों का प्रयोग तो किया ही गया है, जो बात इन चित्रों में सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली है वह है खूबसूरत आंखें।इन सभी पेंटिंग्स में चटख रंगों का प्रयोग तो किया ही गया है, जो बात इन चित्रों में सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली है वह है खूबसूरत आंखें।
प्रपोर्शन के हिसाब से जरूरत से ज्यादा बड़ी लेकिन बेहद आकर्षक।प्रपोर्शन के हिसाब से जरूरत से ज्यादा बड़ी लेकिन बेहद आकर्षक।
इन विशेष उभार वाली आंखों को बनाने का कारण मंजुनाथ माने बताते हैं कि मेरी आंखें बचपन से ही काफी बड़ी रही हैं।इन विशेष उभार वाली आंखों को बनाने का कारण मंजुनाथ माने बताते हैं कि मेरी आंखें बचपन से ही काफी बड़ी रही हैं।
बचपन से ही जब भी कोई मुझसे मिलता, सबसे पहले मेरी आंखों पर ही कमेंट करता।बचपन से ही जब भी कोई मुझसे मिलता, सबसे पहले मेरी आंखों पर ही कमेंट करता।
कितनी बड़ी आंखें हैं.. कुछ अच्छे लहजे में कहते तो कुछ खराब।कितनी बड़ी आंखें हैं.. कुछ अच्छे लहजे में कहते तो कुछ खराब।
फिर, चित्र भी कहीं न कहीं आपके व्यक्तित्व का हिस्सा होते हैं, तो मैंने सोचा क्यों न यह आंखें मैं इन्हें दे दूं।फिर, चित्र भी कहीं न कहीं आपके व्यक्तित्व का हिस्सा होते हैं, तो मैंने सोचा क्यों न यह आंखें मैं इन्हें दे दूं।
साथ ही यह भी चाहता था कि मेरी पेंटिंग्स की आंखें, देखने वालों को सबसे ज्यादा आकर्षित करें।साथ ही यह भी चाहता था कि मेरी पेंटिंग्स की आंखें, देखने वालों को सबसे ज्यादा आकर्षित करें।
उनका विजन बड़ा हो.. बस इसी धुन में चित्रों में आंखों को बड़ा बनाना शुरू किया।उनका विजन बड़ा हो.. बस इसी धुन में चित्रों में आंखों को बड़ा बनाना शुरू किया।
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