न्यूज़ इन फोटो

रविंद्र भवन / भोपाल में पहली बार पियानिस्ट ब्रायन सिलास

X
मशहूर पियानिस्ट ब्रायन सिलास ने भोपाल के रवींद्र भवन में प्रस्तुति दी। वह पहली बार यहां आए थे।मशहूर पियानिस्ट ब्रायन सिलास ने भोपाल के रवींद्र भवन में प्रस्तुति दी। वह पहली बार यहां आए थे।
ब्रायन ने संगीत या पियानो की तालीम किसी स्कूल में नहीं ली।ब्रायन ने संगीत या पियानो की तालीम किसी स्कूल में नहीं ली।
बॉलीवुड के गोल्डन एरा के 'दिल दादा' ब्रायन ठीक शाम 7 बजकर 5 मिनट पर मंच के पीछे दाहिने तरफ से दोनों हाथ जोड़कर मंच पर पहुंचे।बॉलीवुड के गोल्डन एरा के 'दिल दादा' ब्रायन ठीक शाम 7 बजकर 5 मिनट पर मंच के पीछे दाहिने तरफ से दोनों हाथ जोड़कर मंच पर पहुंचे।
खचाखच भरे सभागार में संगीत प्रेमियों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।खचाखच भरे सभागार में संगीत प्रेमियों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।
सिलास ने बिना इधर-उधर देखे पियानो के कीबोर्ड से उंगलियों को मिलाना शुरू किया और प्रार्थना स्वरूप- जागो मोहन प्यारे… की धुन बजाई।सिलास ने बिना इधर-उधर देखे पियानो के कीबोर्ड से उंगलियों को मिलाना शुरू किया और प्रार्थना स्वरूप- जागो मोहन प्यारे… की धुन बजाई।
ब्रायन ने हल्की मुस्कान के साथ श्रोताओं से नजरें मिलाईं और सीधे पियानो के सामने रखी कुर्सी पर जा बैठे।ब्रायन ने हल्की मुस्कान के साथ श्रोताओं से नजरें मिलाईं और सीधे पियानो के सामने रखी कुर्सी पर जा बैठे।
पियानो के की-बोर्ड पर मचलती ब्रायन की उंगलियां ठीक 9 बजे लता मंगेश्कर के गीत- मन डोले मेरा तन डोले… गीत के साथ थमीं।पियानो के की-बोर्ड पर मचलती ब्रायन की उंगलियां ठीक 9 बजे लता मंगेश्कर के गीत- मन डोले मेरा तन डोले… गीत के साथ थमीं।
ब्रायन ने संगीत या पियानो की कोई तालीम नहीं ली है। हिंदुस्तानी गीतों में उन्होंने पियानो को इस तरह साधा है कि लगता ही नहीं कि पियानो एक वेस्टर्न वाद्ययंत्र है।ब्रायन ने संगीत या पियानो की कोई तालीम नहीं ली है। हिंदुस्तानी गीतों में उन्होंने पियानो को इस तरह साधा है कि लगता ही नहीं कि पियानो एक वेस्टर्न वाद्ययंत्र है।
ब्रायन ने आखिरी ख्वाहिश जताते हुए कहा- लगभग 20 मिनट की प्रस्तुति के बाद थोड़ा विराम देते हुए ब्रायन ने श्रोताओं से संवाद करते हुए अपनी आखिरी ख्वाहिश रखी- मैं चाहता हूं कि देश में एक ऐसा स्कूल खोलूं जहां एक ही मंच पर 50 पियानो एक साथ बजाकर उन्हें सिम्फनी का रूप दूं।ब्रायन ने आखिरी ख्वाहिश जताते हुए कहा- लगभग 20 मिनट की प्रस्तुति के बाद थोड़ा विराम देते हुए ब्रायन ने श्रोताओं से संवाद करते हुए अपनी आखिरी ख्वाहिश रखी- मैं चाहता हूं कि देश में एक ऐसा स्कूल खोलूं जहां एक ही मंच पर 50 पियानो एक साथ बजाकर उन्हें सिम्फनी का रूप दूं।
COMMENT