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मौसम का असर / विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची के स्तूप कोहरे से ढंके

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गुरुवार को सुबह 7 बजे विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप घने कोहरे में ढंक गए। विजिबिलिटी भी 50 मीटर रह गई।गुरुवार को सुबह 7 बजे विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप घने कोहरे में ढंक गए। विजिबिलिटी भी 50 मीटर रह गई।
मप्र के कई जिलों में बुधवार को रात से बारिश होने से मौसम का मिजाज एक बार फिर बदला है। इससे सुबह से ही घना कोहरा छाया हुआ है।मप्र के कई जिलों में बुधवार को रात से बारिश होने से मौसम का मिजाज एक बार फिर बदला है। इससे सुबह से ही घना कोहरा छाया हुआ है।
कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल आने वाली ट्रेनें और भोपाल से आने और जाने वाली फ्लाइट्स भी देरी से चल रही हैं। सांची में सुबह 8 बजे विजिबिलिटी 100 मीटर से कम दर्ज की गई।कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल आने वाली ट्रेनें और भोपाल से आने और जाने वाली फ्लाइट्स भी देरी से चल रही हैं। सांची में सुबह 8 बजे विजिबिलिटी 100 मीटर से कम दर्ज की गई।
विदिशा में सुबह 11 बजे विजिबिलिटी थोड़ा बढ़ी और 500 मीटर तक हो गई। सुबह लोगों का सामना घने कोहरे से हुआ।विदिशा में सुबह 11 बजे विजिबिलिटी थोड़ा बढ़ी और 500 मीटर तक हो गई। सुबह लोगों का सामना घने कोहरे से हुआ।
गुरुवार को करीब 6 से 7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं। इससे सांची आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम हुई है।गुरुवार को करीब 6 से 7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं। इससे सांची आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम हुई है।
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची में सुबह से कोहरा छाया रहा। सुबह पर्यटक आए तो सांची के स्तूप भी कोहरे से ढंके हुए थे।विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची में सुबह से कोहरा छाया रहा। सुबह पर्यटक आए तो सांची के स्तूप भी कोहरे से ढंके हुए थे।
सीहोर कृषि कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक एसएस तोमर ने बताया कि सुबह दृश्यता कम थी।सीहोर कृषि कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक एसएस तोमर ने बताया कि सुबह दृश्यता कम थी।
बीती रात ढाई बजे से ही कोहरे की चादर तन गई थी और अलसुबह तो दृश्यता 100 मीटर रही।बीती रात ढाई बजे से ही कोहरे की चादर तन गई थी और अलसुबह तो दृश्यता 100 मीटर रही।