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बापू की 150वीं जयंती / राष्ट्रपिता के विचार जो दूर करते हैं नकारात्मकता

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सत्य मेरे लिए सर्वोपरि सिद्धांत है। मैं वचन और चिंतन में सत्य की स्थापना करने का प्रयत्न करता हूं। परम सत्य तो परमात्मा है। परमात्मा कई रूपों में संसार में प्रकट हुआ है। मैं उसे देखकर आश्चर्य चकित और अवाक हो जाता हूं। मैं सत्य के रूप में परमात्मा की पूजा करता हूं। सत्य की खोज में अपनी प्रिय वस्तु की बलि चढ़ा सकता हूं। - महात्मा गांधीसत्य मेरे लिए सर्वोपरि सिद्धांत है। मैं वचन और चिंतन में सत्य की स्थापना करने का प्रयत्न करता हूं। परम सत्य तो परमात्मा है। परमात्मा कई रूपों में संसार में प्रकट हुआ है। मैं उसे देखकर आश्चर्य चकित और अवाक हो जाता हूं। मैं सत्य के रूप में परमात्मा की पूजा करता हूं। सत्य की खोज में अपनी प्रिय वस्तु की बलि चढ़ा सकता हूं। - महात्मा गांधी
अहिंसा की परिभाषा बड़ी कठिन है। अमुक काम हिंसा है या अहिंसा, यह सवाल कई बार उठा है। मैं समझता हूं कि मन, वचन और शरीर से किसी को भी दुख न पहुंचाना अहिंसा है। लेकिन इस पर अमल करना देहधारी के लिए असंभव है। सांस लेने में अनेक सूक्ष्म जीवों की हत्या हो जाती है। आंख की पलक उठाने, गिराने से ही पलकों पर बैठे जीव मर जाते हैं। -महात्मा गांधीअहिंसा की परिभाषा बड़ी कठिन है। अमुक काम हिंसा है या अहिंसा, यह सवाल कई बार उठा है। मैं समझता हूं कि मन, वचन और शरीर से किसी को भी दुख न पहुंचाना अहिंसा है। लेकिन इस पर अमल करना देहधारी के लिए असंभव है। सांस लेने में अनेक सूक्ष्म जीवों की हत्या हो जाती है। आंख की पलक उठाने, गिराने से ही पलकों पर बैठे जीव मर जाते हैं। -महात्मा गांधी
जो मन, वचन और काया से इंद्रियों को अपने वश में रखता है, वहीं ब्रह्मचारी है। जिसके मन में विकार नष्ट नहीं हुए हैं, उसे पूरा ब्रह्मचारी नहीं कहा जा सकता। ब्रह्मचर्य की साधना करने वालों को खानपान का संयम रखना चाहिए। उन्हें जीभ का स्वाद छोड़ना चाहिए और बनावट और श्रृंगार से दूर रहना चाहिए। संयमी लोगों के लिए ब्रह्मचर्य आसान है। - महात्मा गांधीजो मन, वचन और काया से इंद्रियों को अपने वश में रखता है, वहीं ब्रह्मचारी है। जिसके मन में विकार नष्ट नहीं हुए हैं, उसे पूरा ब्रह्मचारी नहीं कहा जा सकता। ब्रह्मचर्य की साधना करने वालों को खानपान का संयम रखना चाहिए। उन्हें जीभ का स्वाद छोड़ना चाहिए और बनावट और श्रृंगार से दूर रहना चाहिए। संयमी लोगों के लिए ब्रह्मचर्य आसान है। - महात्मा गांधी
अस्तेय यानी चोरी न करना, पांच व्रतों में से एक है। दूसरे की चीज बिना इजाजत उससे लेना चोरी है। जो चीज हमें जिस काम के लिए मिली हो, उसके सिवाय दूसरे काम में उसे लेना या जितने समय के लिए मिली हो उससे ज्यादा समय तक उसे काम में लेना भी चोरी है। -महात्मा गांधीअस्तेय यानी चोरी न करना, पांच व्रतों में से एक है। दूसरे की चीज बिना इजाजत उससे लेना चोरी है। जो चीज हमें जिस काम के लिए मिली हो, उसके सिवाय दूसरे काम में उसे लेना या जितने समय के लिए मिली हो उससे ज्यादा समय तक उसे काम में लेना भी चोरी है। -महात्मा गांधी
जिस तरह चोरी करना पाप है उसी प्रकार जरूरत से ज्यादा चीजों का संग्रह करना भी पाप है। इसलिए हमें खाने की आवश्यक चीजें, कपड़े, टेबल, कुर्सी, पलंग आदि को जरूरत से ज्यादा इकट्ठा करना भी अनुचित है। -महात्मा गांधीजिस तरह चोरी करना पाप है उसी प्रकार जरूरत से ज्यादा चीजों का संग्रह करना भी पाप है। इसलिए हमें खाने की आवश्यक चीजें, कपड़े, टेबल, कुर्सी, पलंग आदि को जरूरत से ज्यादा इकट्ठा करना भी अनुचित है। -महात्मा गांधी
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