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परम्पराएं / क्रिसमस पर कहीं झाड़ू छिपाने तो कहीं मकड़ी के जाले लगाने का है रिवाज

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नार्वे : यहां क्रिसमस पर घरों में मौजूद सफाई की चीजों जैसे झाड़ू को छिपाया जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि सदियों पहले बुरी आत्माएं सवारी करने के लिए घरों से झाड़ू ले जाया करती थीं। इसलिए यहां आज भी कई लोग घर में सबसे सुरक्षित जगह पर झाड़ू छुपाते हैं, ताकि उन्हें बुरी ताक़तों द्वारा चोरी होने से बचाया जा सके।नार्वे : यहां क्रिसमस पर घरों में मौजूद सफाई की चीजों जैसे झाड़ू को छिपाया जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि सदियों पहले बुरी आत्माएं सवारी करने के लिए घरों से झाड़ू ले जाया करती थीं। इसलिए यहां आज भी कई लोग घर में सबसे सुरक्षित जगह पर झाड़ू छुपाते हैं, ताकि उन्हें बुरी ताक़तों द्वारा चोरी होने से बचाया जा सके।
यूक्रेन में क्रिसमस के मौके पर पेड़ों की सजावट करते समय नकली मकड़ी के जालों का प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि कभी एक विधुर इंसान के पास पेड़ों को सजाने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसा न होने पर उसके बच्चे रो रहे थे। कुछ मकड़ियों ने यह देखा और उनके सोने के बाद रातभर में सोने और चांदी के रेशों से पेड़ को सजा दिया। रातोंरात उस गरीब का परिवार अमीर हो गया। इस तरह मकड़ी का जाला समृद्धि का प्रतीक माना गया।यूक्रेन में क्रिसमस के मौके पर पेड़ों की सजावट करते समय नकली मकड़ी के जालों का प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि कभी एक विधुर इंसान के पास पेड़ों को सजाने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसा न होने पर उसके बच्चे रो रहे थे। कुछ मकड़ियों ने यह देखा और उनके सोने के बाद रातभर में सोने और चांदी के रेशों से पेड़ को सजा दिया। रातोंरात उस गरीब का परिवार अमीर हो गया। इस तरह मकड़ी का जाला समृद्धि का प्रतीक माना गया।
कोलंबिया : यहां क्रिसमस का उत्सव लिटिल कैंडल्स डे से शुरू होता है जो प्रतिवर्ष 7 दिसम्बर को मनाया जाता है। यहां बालकनी, खिड़की से लेकर घर का कोना- कोना रोशन करने की परम्परा है। परम्परानुसार 8 दिसम्बर के दिन मेरी के चित्रयुक्त झंडे को घरों पर फहराया जाता है। क्विमबाया जो कि कोलंबिया का शहर है यहां आस-पड़ोस के लोग मोमबत्तियों की सजावट को लेकर प्रतिस्पर्धा भी करते हैं।कोलंबिया : यहां क्रिसमस का उत्सव लिटिल कैंडल्स डे से शुरू होता है जो प्रतिवर्ष 7 दिसम्बर को मनाया जाता है। यहां बालकनी, खिड़की से लेकर घर का कोना- कोना रोशन करने की परम्परा है। परम्परानुसार 8 दिसम्बर के दिन मेरी के चित्रयुक्त झंडे को घरों पर फहराया जाता है। क्विमबाया जो कि कोलंबिया का शहर है यहां आस-पड़ोस के लोग मोमबत्तियों की सजावट को लेकर प्रतिस्पर्धा भी करते हैं।
फिलीपींस : यहां के सैन फर्नेंडो शहर में प्रत्येक वर्ष क्रिसमस की पूर्व संध्या पर विशाल लैंटर्न फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। सैन फर्नेंडो शहर को फिलीपींस की क्रिसमस राजधानी भी कहा जाता है। इस उत्सव में सबसे विशाल लालटेन बनाने की प्रतियोगिता होती है जिसमें 11 गांव भाग लेते हैं। इस भव्य आयोजन को देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक यहां पहुंचते हैं।फिलीपींस : यहां के सैन फर्नेंडो शहर में प्रत्येक वर्ष क्रिसमस की पूर्व संध्या पर विशाल लैंटर्न फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। सैन फर्नेंडो शहर को फिलीपींस की क्रिसमस राजधानी भी कहा जाता है। इस उत्सव में सबसे विशाल लालटेन बनाने की प्रतियोगिता होती है जिसमें 11 गांव भाग लेते हैं। इस भव्य आयोजन को देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
पोलैंड : यहां क्रिसमस की संध्या पर, कई परिवार एक-दूसरे से वेफर साझा करते हैं। इस परंपरा के अनुसार वेफर का टुकड़ा तोड़कर एक-दूसरे को बधाई दी जाती है। इसके बाद रात्रि भोज तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक कि पहला तारा आसमान में दिखाई न दे जाए। तारा दिखाई देने के बाद ही भोजन शुरू किया जाता है।पोलैंड : यहां क्रिसमस की संध्या पर, कई परिवार एक-दूसरे से वेफर साझा करते हैं। इस परंपरा के अनुसार वेफर का टुकड़ा तोड़कर एक-दूसरे को बधाई दी जाती है। इसके बाद रात्रि भोज तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक कि पहला तारा आसमान में दिखाई न दे जाए। तारा दिखाई देने के बाद ही भोजन शुरू किया जाता है।
यहां परम्परानुसार ईसाई धर्म के विशेष प्रकार के कैलेंडर तैयार किए जाते हैं। ये कैलेंडर बच्चों में बांट दिए जाते हैं और कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक दिन के लिए बैग में एक तोहफ़ा रखा जाता है। यहां सांता का आगमन 24 दिसम्बर की रात नहीं, बल्कि 6 दिसम्बर की रात माना जाता है।यहां परम्परानुसार ईसाई धर्म के विशेष प्रकार के कैलेंडर तैयार किए जाते हैं। ये कैलेंडर बच्चों में बांट दिए जाते हैं और कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक दिन के लिए बैग में एक तोहफ़ा रखा जाता है। यहां सांता का आगमन 24 दिसम्बर की रात नहीं, बल्कि 6 दिसम्बर की रात माना जाता है।