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अफ्रीका / आबादी बढ़ी, मछलियां घटीं, अब खाने का संकट

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अफ्रीका की तीसरी सबसे साफ पानी की झील मालावी लेक में तेजी से मछलियों की संख्या कम हो रही है। स्थानीय लोग इसका कारण बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन बता रहे हैं। आलम ये है कि सैकड़ों नाव झील के किनारे दिनभर खाली खड़ी रहती हैं।अफ्रीका की तीसरी सबसे साफ पानी की झील मालावी लेक में तेजी से मछलियों की संख्या कम हो रही है। स्थानीय लोग इसका कारण बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन बता रहे हैं। आलम ये है कि सैकड़ों नाव झील के किनारे दिनभर खाली खड़ी रहती हैं।
सैकड़ों स्थानीय मछली व्यापारी हर रोज सुबह सेंगा बीच पर इकट्ठा होते हैं और मछलियों को पकड़ने के लिए निकल पड़ते हैं। पोर्ट मैनेजर अल्फ्रेड बेंडा का कहना है, मछलियों की संख्या इतनी तेजी से गिर रही है कि कभी पूरी नाव भरकर इसे लाते हैं अब उम्मीद करते हैं आधी या चौथाई नाव ही मछलियों से भर जाए।सैकड़ों स्थानीय मछली व्यापारी हर रोज सुबह सेंगा बीच पर इकट्ठा होते हैं और मछलियों को पकड़ने के लिए निकल पड़ते हैं। पोर्ट मैनेजर अल्फ्रेड बेंडा का कहना है, मछलियों की संख्या इतनी तेजी से गिर रही है कि कभी पूरी नाव भरकर इसे लाते हैं अब उम्मीद करते हैं आधी या चौथाई नाव ही मछलियों से भर जाए।
यह झील तीन देश मालावी, तंजानिया और मोजांबिक से घिरी है और 29 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। झील में मछलियों की करीब 1 हजार प्रजातियां पाई जाती हैं। झील किनारे सेंगा बीच पर रहने वाले 14 हजार लोग खाने के लिए यहां की मछलियों पर निर्भर हैं।यह झील तीन देश मालावी, तंजानिया और मोजांबिक से घिरी है और 29 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। झील में मछलियों की करीब 1 हजार प्रजातियां पाई जाती हैं। झील किनारे सेंगा बीच पर रहने वाले 14 हजार लोग खाने के लिए यहां की मछलियों पर निर्भर हैं।
सेंगा के कम्युनिटी लीडर जॉन व्हाइट का कहना है कि संख्या गिरने के अलावा तेज हवा के कारण भी मछलियों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। कभी भी तेज बारिश के साथ हवाएं चलने लगती हैं और हमें वापस लौटना पड़ता है। इसके कारण भूख मिटाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि यहां मछली का दूसरा विकल्प है ही नहीं।सेंगा के कम्युनिटी लीडर जॉन व्हाइट का कहना है कि संख्या गिरने के अलावा तेज हवा के कारण भी मछलियों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। कभी भी तेज बारिश के साथ हवाएं चलने लगती हैं और हमें वापस लौटना पड़ता है। इसके कारण भूख मिटाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि यहां मछली का दूसरा विकल्प है ही नहीं।
मार्च 2019 में आए तूफान में 59 लोगों की मौत हुई थी। जिसका असर मोजेंबिक और जिम्बाब्वे पर भी पड़ा था, यहां 1 हजार मौते हुई थी। जॉन के मुताबिक, पिछले 10 सालों में यहां मछुआरों की संख्या दोगुनी हो गई है। अधिक मछली पकड़ने के कारण भी इनकी संख्या में तेजी से कमी आई है।मार्च 2019 में आए तूफान में 59 लोगों की मौत हुई थी। जिसका असर मोजेंबिक और जिम्बाब्वे पर भी पड़ा था, यहां 1 हजार मौते हुई थी। जॉन के मुताबिक, पिछले 10 सालों में यहां मछुआरों की संख्या दोगुनी हो गई है। अधिक मछली पकड़ने के कारण भी इनकी संख्या में तेजी से कमी आई है।
एनवायर्नमेंट एंड डेवलपमेंट एक्शन ग्रुप के लिए काम करने वाले प्रो. सोस्टेन चिओथा के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन का असर मालावी पर पड़ रहा है। मौसम में अधिक बदलाव के कारण झील का इकोसिस्टम बिगड़ रहा है। ओवरफिशिंग रुके और ब्रीडिंग सीजन में मछलियों की संख्या बढ़े इसके प्रयास किए जा रहे हैं।एनवायर्नमेंट एंड डेवलपमेंट एक्शन ग्रुप के लिए काम करने वाले प्रो. सोस्टेन चिओथा के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन का असर मालावी पर पड़ रहा है। मौसम में अधिक बदलाव के कारण झील का इकोसिस्टम बिगड़ रहा है। ओवरफिशिंग रुके और ब्रीडिंग सीजन में मछलियों की संख्या बढ़े इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
पोर्ट मैनेजर अल्फ्रेड कहते हैं अब 6-12 मछुआरे मिलकर एक नाव भरकर मछलियां नहीं पकड़ पा रहे हैं। पहले मछलियों से भरी एक नाव से 20 हजार रुपए तक मिल जाते थे अब संघर्ष बढ़ता जा रहा है।पोर्ट मैनेजर अल्फ्रेड कहते हैं अब 6-12 मछुआरे मिलकर एक नाव भरकर मछलियां नहीं पकड़ पा रहे हैं। पहले मछलियों से भरी एक नाव से 20 हजार रुपए तक मिल जाते थे अब संघर्ष बढ़ता जा रहा है।
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