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जन्माष्टमी विशेष / हमेशा हंसते - मुस्कुराते कृष्ण का कर्मयोग

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श्रीकृष्ण अकेले ऐसे ईश्वर हैं जो चाहे तस्वीर हो या मूर्ति कभी उदास या निराश दिखाई नहीं देते। उनका चेहरा हमेशा मुस्कुराहट से चमकता दिखता है। वे नृत्य करते हैं, लीला करते हैं। आजीवन मस्ती में झूमते रहते हैं, जो भी स्थिति हो-भले ही विरोधी का वध हो अथवा युद्ध। आनंदमय वातावरण हो या गंभीर स्थिति। हमेशा ही उनके चेहरे पर मुस्कान रही। लोग इसे दैवीय गुण मानते हैं। सच्चाई यह है कि यह मानवीय गुण है।श्रीकृष्ण अकेले ऐसे ईश्वर हैं जो चाहे तस्वीर हो या मूर्ति कभी उदास या निराश दिखाई नहीं देते। उनका चेहरा हमेशा मुस्कुराहट से चमकता दिखता है। वे नृत्य करते हैं, लीला करते हैं। आजीवन मस्ती में झूमते रहते हैं, जो भी स्थिति हो-भले ही विरोधी का वध हो अथवा युद्ध। आनंदमय वातावरण हो या गंभीर स्थिति। हमेशा ही उनके चेहरे पर मुस्कान रही। लोग इसे दैवीय गुण मानते हैं। सच्चाई यह है कि यह मानवीय गुण है।
कृष्ण, दोस्ती के लिए सारे बंधन तोड़ देते हैं। युद्ध में उन्होंने शस्त्र नहीं उठाने का संकल्प लिया था, लेकिन जब भीष्म के सामने दोस्त अर्जुन को संकट में देखा तो रथ का पहिया लेकर भीष्म की ओर दौड़ पड़े। अर्जुन ने सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करने की प्रतिज्ञा ली थी। जयद्रथ को बाहर निकालने के लिए कृष्ण ने सूरज को ढक दिया था। जयद्रथ के रणभूमि में बाहर आते ही अर्जुन ने उसका वध कर दिया।कृष्ण, दोस्ती के लिए सारे बंधन तोड़ देते हैं। युद्ध में उन्होंने शस्त्र नहीं उठाने का संकल्प लिया था, लेकिन जब भीष्म के सामने दोस्त अर्जुन को संकट में देखा तो रथ का पहिया लेकर भीष्म की ओर दौड़ पड़े। अर्जुन ने सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करने की प्रतिज्ञा ली थी। जयद्रथ को बाहर निकालने के लिए कृष्ण ने सूरज को ढक दिया था। जयद्रथ के रणभूमि में बाहर आते ही अर्जुन ने उसका वध कर दिया।
स्वर्ग में राधा ने कृष्ण से कहा था कि जब आप प्रेम में थे तब अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगों को बचाया था। और जब प्रेम से अलग हुए तो आपने सुदर्शन चक्र उठाया और विनाश करने लगे। प्रेम आपका सच्चा स्वरूप है। इसलिए घरों में प्रेम में डूबे बांसुरी वाले कन्हैया ही जगह पाएंगे। राधा ने कहा कि भले ही भगवद् गीता में मेरा नाम न हो लेकिन गीता के पूर्ण होने पर ‘राधे- राधे’ स्मरण ही किया जाता है।स्वर्ग में राधा ने कृष्ण से कहा था कि जब आप प्रेम में थे तब अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगों को बचाया था। और जब प्रेम से अलग हुए तो आपने सुदर्शन चक्र उठाया और विनाश करने लगे। प्रेम आपका सच्चा स्वरूप है। इसलिए घरों में प्रेम में डूबे बांसुरी वाले कन्हैया ही जगह पाएंगे। राधा ने कहा कि भले ही भगवद् गीता में मेरा नाम न हो लेकिन गीता के पूर्ण होने पर ‘राधे- राधे’ स्मरण ही किया जाता है।
ईश्वर रूप होते हुए भी कृष्ण मनुष्य की तरह रहे। जन्म कारावास में हुआ। उफनती नदी से होते हुए नंद गांव पहुंचे। ग्वालों संग गाएं चराईं। सादगी में दिव्यता-भव्यता का संदेश दिया। कृष्ण ने राजाओं को जीता, लेकिन कभी किसी पराजित का सिंहासन नहीं लिया। हमेशा किंगमेकर रहे। अवतारी शक्ति के बाद भी मनुष्य की भांति देह त्यागी। बहेलिए के बाण से जख्मी होकर भालका तीर्थ में देहत्याग किया।ईश्वर रूप होते हुए भी कृष्ण मनुष्य की तरह रहे। जन्म कारावास में हुआ। उफनती नदी से होते हुए नंद गांव पहुंचे। ग्वालों संग गाएं चराईं। सादगी में दिव्यता-भव्यता का संदेश दिया। कृष्ण ने राजाओं को जीता, लेकिन कभी किसी पराजित का सिंहासन नहीं लिया। हमेशा किंगमेकर रहे। अवतारी शक्ति के बाद भी मनुष्य की भांति देह त्यागी। बहेलिए के बाण से जख्मी होकर भालका तीर्थ में देहत्याग किया।
श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को एक अंगुली पर उठा लिया था। इसमें स्वाभिमान का संदेश है। असल में इंद्रदेव मथुरा, गोकुल और वृंदावन के लोगों को डराकर अपनी पूजा करवाते थे। कन्हैया ने लोगों से कहा कि पूजन बंद कर दो। नाराज इंद्र ने बहुत बारिश की। कृष्ण ने अपनी सबसे छोटी अंगुली कनिष्ठा पर गोवर्धन उठा लिया और लोगों से कहा कि अपनी लाठियों से गोर्वधन उठाएं ताकि विजय में सभी का योगदान हो।श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को एक अंगुली पर उठा लिया था। इसमें स्वाभिमान का संदेश है। असल में इंद्रदेव मथुरा, गोकुल और वृंदावन के लोगों को डराकर अपनी पूजा करवाते थे। कन्हैया ने लोगों से कहा कि पूजन बंद कर दो। नाराज इंद्र ने बहुत बारिश की। कृष्ण ने अपनी सबसे छोटी अंगुली कनिष्ठा पर गोवर्धन उठा लिया और लोगों से कहा कि अपनी लाठियों से गोर्वधन उठाएं ताकि विजय में सभी का योगदान हो।
श्रीकृष्ण मार्शल आर्ट के सच्चे जनक थे। इससे कंस के समक्ष मल्लयुद्ध में चाणूर और मुष्टिक नाम के दानवों का अंत किया। इनके वध के समय कृष्ण की उम्र 16 साल थी। मथुरा में रजक का मस्तक हथेली के प्रहार से धड़ से अलग कर दिया था। पूतना सहित कंस द्वारा भेजे गए पांच और दानवों का वध किया था। कंस वध भी कंस के राजदरबार में ही किया था। संदेश था- बलवान से डरें नहीं। विश्वास से मुकाबला करें।श्रीकृष्ण मार्शल आर्ट के सच्चे जनक थे। इससे कंस के समक्ष मल्लयुद्ध में चाणूर और मुष्टिक नाम के दानवों का अंत किया। इनके वध के समय कृष्ण की उम्र 16 साल थी। मथुरा में रजक का मस्तक हथेली के प्रहार से धड़ से अलग कर दिया था। पूतना सहित कंस द्वारा भेजे गए पांच और दानवों का वध किया था। कंस वध भी कंस के राजदरबार में ही किया था। संदेश था- बलवान से डरें नहीं। विश्वास से मुकाबला करें।
महाभारत युद्ध में पांडवों की विजय हुई। इसमें सबसे अहम भूमिका श्रीकृष्ण के प्रबंधन की रही। श्रीकृष्ण महामानव थे, बिना किसी की मदद के सबकुछ कर सकते थे। लेकिन महाभारत में सक्रिय भूमिका के बिना रणनीतिक दक्षता से पांडव विजयी रहे। इसीलिए श्रीकृष्ण मैनेजमेंट गुरु कहलाते हैं। उनकी फिलॉसफी और सिद्धांत रोजमर्रा के जीवन और उसके प्रबंधन में हमेशा कारगर साबित होते हैं।महाभारत युद्ध में पांडवों की विजय हुई। इसमें सबसे अहम भूमिका श्रीकृष्ण के प्रबंधन की रही। श्रीकृष्ण महामानव थे, बिना किसी की मदद के सबकुछ कर सकते थे। लेकिन महाभारत में सक्रिय भूमिका के बिना रणनीतिक दक्षता से पांडव विजयी रहे। इसीलिए श्रीकृष्ण मैनेजमेंट गुरु कहलाते हैं। उनकी फिलॉसफी और सिद्धांत रोजमर्रा के जीवन और उसके प्रबंधन में हमेशा कारगर साबित होते हैं।
कोई भी दमन सहन नहीं करना चाहिए। शिशुपाल की मां जानती थीं कि उनके बेटे का वध श्रीकृष्ण के हाथ होगा। इसलिए मां ने शिशुपाल के लिए कृष्ण से जीवनदान मांगा। श्रीकृष्ण ने भी उन्हें वचन दिया कि- मैं शिशुपाल के 100 पाप माफ करूंगा। पर शिशुपाल ने कृष्ण को अपशब्द कहना जारी रखा। कृष्ण ने 100 बार उसे माफ किया। जैसे ही शिशुपाल ने 101वां अपशब्द कहा, श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर दिया।कोई भी दमन सहन नहीं करना चाहिए। शिशुपाल की मां जानती थीं कि उनके बेटे का वध श्रीकृष्ण के हाथ होगा। इसलिए मां ने शिशुपाल के लिए कृष्ण से जीवनदान मांगा। श्रीकृष्ण ने भी उन्हें वचन दिया कि- मैं शिशुपाल के 100 पाप माफ करूंगा। पर शिशुपाल ने कृष्ण को अपशब्द कहना जारी रखा। कृष्ण ने 100 बार उसे माफ किया। जैसे ही शिशुपाल ने 101वां अपशब्द कहा, श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर दिया।
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