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काबुल / डर और तनाव दूर कर रही चिड़ियां

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लाइफस्टाइल डेस्क. पुराने काबुल शहर की तंग गलियों में चिड़ियों का सबसे बड़ा बाजार लगता है। नाम है का-फरोश बर्ड मार्केट। यहां चहचहाती चिड़ियों की आवाज लोगों को दिमागी सुकून पहुंचा रही हैं, दुकानदारों का भी और खरीदारों का भी।लाइफस्टाइल डेस्क. पुराने काबुल शहर की तंग गलियों में चिड़ियों का सबसे बड़ा बाजार लगता है। नाम है का-फरोश बर्ड मार्केट। यहां चहचहाती चिड़ियों की आवाज लोगों को दिमागी सुकून पहुंचा रही हैं, दुकानदारों का भी और खरीदारों का भी।
युद्ध, विद्रोही गतिविधियों और जीवन के संघर्ष से जूझ रहे काबुल के लोगों को पक्षियों की आवाज और मुर्गे की लड़ाई उबारने का काम कर रही है। यहां के लोगों का कहना है पक्षी हमारा नकारात्मक चीजों से ध्यान हटाने का काम कर रहे हैं।युद्ध, विद्रोही गतिविधियों और जीवन के संघर्ष से जूझ रहे काबुल के लोगों को पक्षियों की आवाज और मुर्गे की लड़ाई उबारने का काम कर रही है। यहां के लोगों का कहना है पक्षी हमारा नकारात्मक चीजों से ध्यान हटाने का काम कर रहे हैं।
अफगानिस्तान में पक्षियों को पालने का चलन बेहद आम है। दुनियाभर में पाई जानी वाली चिड़ियों की वैरायटी काबुल के  का-फरोश बर्ड मार्केट में देखने को मिलती है।अफगानिस्तान में पक्षियों को पालने का चलन बेहद आम है। दुनियाभर में पाई जानी वाली चिड़ियों की वैरायटी काबुल के का-फरोश बर्ड मार्केट में देखने को मिलती है।
बाजार में मौजूद ज्यादातर चिड़ियां अफगानिस्तान के अलग-अलग जंगली क्षेत्रों से पकड़कर लाई गई हैं। कुछ पड़ोसी देश ईरान और पाकिस्तान से भी मंगाई जाती हैं।बाजार में मौजूद ज्यादातर चिड़ियां अफगानिस्तान के अलग-अलग जंगली क्षेत्रों से पकड़कर लाई गई हैं। कुछ पड़ोसी देश ईरान और पाकिस्तान से भी मंगाई जाती हैं।
अफगानियों में पक्षियों को पालने जुनून देखा जा सकता है। ज्यादातर घरों में इसके उदाहरण भी दिख जाएंगे। इनकी सबसे पसंदीदा चिड़िया है चुकर पेट्रिज। यह आम चिड़िया से थोड़ी बड़ी है और ग्रे रंग की दिखती है।अफगानियों में पक्षियों को पालने जुनून देखा जा सकता है। ज्यादातर घरों में इसके उदाहरण भी दिख जाएंगे। इनकी सबसे पसंदीदा चिड़िया है चुकर पेट्रिज। यह आम चिड़िया से थोड़ी बड़ी है और ग्रे रंग की दिखती है।
लड़ाकू मुर्गों का कारोबार करने वाले रफीफुल्लाह अहमदी कहते हैं, यहां के कुछ लोग मुर्गों को पालकर उन्हें लड़ाते हैं, कुछ चुकर पेट्रिज से बेहद प्यार करते हैं तो कई ऐसे भी हैं जिन्हें चिड़ियों की दूसरी किस्म पालना पसंद है। यह अफगान का एक रिवाज है।लड़ाकू मुर्गों का कारोबार करने वाले रफीफुल्लाह अहमदी कहते हैं, यहां के कुछ लोग मुर्गों को पालकर उन्हें लड़ाते हैं, कुछ चुकर पेट्रिज से बेहद प्यार करते हैं तो कई ऐसे भी हैं जिन्हें चिड़ियों की दूसरी किस्म पालना पसंद है। यह अफगान का एक रिवाज है।
चिड़िया कारोबारी मोहम्मद जहीर तनहा कहते हैं, मुझे मानसिक समस्या थी। इलाज के लिए पहुंचा तो डॉक्टरों ने पक्षियों को पालने की सलाह दी। मेरे घर में 50 कबूतर हैं। दुकान से थक-हारकर जब घर पहुंचता हूं तो इनके साथ समय बिताता हूं। ये मुझे खुशी देते हैं और तरोताजा कर देते हैं।चिड़िया कारोबारी मोहम्मद जहीर तनहा कहते हैं, मुझे मानसिक समस्या थी। इलाज के लिए पहुंचा तो डॉक्टरों ने पक्षियों को पालने की सलाह दी। मेरे घर में 50 कबूतर हैं। दुकान से थक-हारकर जब घर पहुंचता हूं तो इनके साथ समय बिताता हूं। ये मुझे खुशी देते हैं और तरोताजा कर देते हैं।
चिड़ियों में इस बाजार बच्चे भी पुश्तैनी दुकान को संभालते दिख जाते हैं। 12 साल का अफशिन भी दुकान संभालता है जहां चिड़ियों के दाने की कई वैरायटी उपलब्ध है।चिड़ियों में इस बाजार बच्चे भी पुश्तैनी दुकान को संभालते दिख जाते हैं। 12 साल का अफशिन भी दुकान संभालता है जहां चिड़ियों के दाने की कई वैरायटी उपलब्ध है।
बाजार में ज्यादातर पुरुष ग्राहक पहुंचते हैं, मनमुताबिक चिड़ियों की प्रजाती चुनकर उनके लिए दाना लेकर ही निकलते हैं।बाजार में ज्यादातर पुरुष ग्राहक पहुंचते हैं, मनमुताबिक चिड़ियों की प्रजाती चुनकर उनके लिए दाना लेकर ही निकलते हैं।
गिरती अर्थव्यवस्था से जूझते अफगानिस्तान का असर काबुल के का-फरोशी बाजार पर भी पड़ रहा है। लोग महंगी चिड़िया की जगह सस्ते पैराकीट्स खरीदना पसंद कर रहे हैं लेकिन पक्षियों को पालने की परंपरा से समझौता नहीं किया है।गिरती अर्थव्यवस्था से जूझते अफगानिस्तान का असर काबुल के का-फरोशी बाजार पर भी पड़ रहा है। लोग महंगी चिड़िया की जगह सस्ते पैराकीट्स खरीदना पसंद कर रहे हैं लेकिन पक्षियों को पालने की परंपरा से समझौता नहीं किया है।
चिड़ियों के निर्यात का अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में अहम रोल है। लेकिन इनकी कुछ प्रजातियां यूरोप से महंगे दामों पर आयात भी की जाती हैं।चिड़ियों के निर्यात का अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में अहम रोल है। लेकिन इनकी कुछ प्रजातियां यूरोप से महंगे दामों पर आयात भी की जाती हैं।
कुछ कारोबारियों का कहना है कि इनका शिकार बढ़ रहा है और गैर-कानूनी तरीके से अफगानिस्तान के बाहर भेजा जा रहा है।कुछ कारोबारियों का कहना है कि इनका शिकार बढ़ रहा है और गैर-कानूनी तरीके से अफगानिस्तान के बाहर भेजा जा रहा है।
यहां कबूतरों की सबसे महंगी प्रजातियां भी उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल रेसिंग में किया जाता है। आंखों का रंग और चोंच का आकार इनकी कीमत तय करता है।यहां कबूतरों की सबसे महंगी प्रजातियां भी उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल रेसिंग में किया जाता है। आंखों का रंग और चोंच का आकार इनकी कीमत तय करता है।
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