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ओणम के रंग / फूलों की खुशबू से महका केरल

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बाढ़ के बाद हुए नुकसान से केरल अभी खुद को उबार रहा था लेकिन ओणम ने उनके चेहरे पर मुस्कान ला दी है। त्योहार की तैयारी ने उनके दुख-दर्द भुला दिए हैं और एक बार फिर घर को सजा-संवार कर फेस्टिवल सेलिब्रेट कर रहे हैं।बाढ़ के बाद हुए नुकसान से केरल अभी खुद को उबार रहा था लेकिन ओणम ने उनके चेहरे पर मुस्कान ला दी है। त्योहार की तैयारी ने उनके दुख-दर्द भुला दिए हैं और एक बार फिर घर को सजा-संवार कर फेस्टिवल सेलिब्रेट कर रहे हैं।
दक्षिण भारत में ओणम को धूमधाम से मनाया जा रहा है, हर तरफ फूल और रंगोली दिख रही है। केरल फूलों की खुशबू से महक रहा है। यह त्योहार खेतों में फसल की अच्छी उपज के लिए मनाया जाता है, इसलिए इसे हार्वेस्ट फेस्टिवल के नाम से भी जाना जाता है।दक्षिण भारत में ओणम को धूमधाम से मनाया जा रहा है, हर तरफ फूल और रंगोली दिख रही है। केरल फूलों की खुशबू से महक रहा है। यह त्योहार खेतों में फसल की अच्छी उपज के लिए मनाया जाता है, इसलिए इसे हार्वेस्ट फेस्टिवल के नाम से भी जाना जाता है।
ओणम की शुरुआत 1 सितंबर से हुई थी जो 13 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस त्योहार की एक विशेषता यह भी कि पूजा मंदिरों में नहीं बल्कि घर में की जाती है।ओणम की शुरुआत 1 सितंबर से हुई थी जो 13 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस त्योहार की एक विशेषता यह भी कि पूजा मंदिरों में नहीं बल्कि घर में की जाती है।
घरों से लेकर ऑफिस तक रंगोली देखी जा सकती है। रंगों में सिर्फ खूबसूरती ही नहीं संदेश भी दिया जा रहा है। यह तस्वीर केरल में बनी ऐसी ही रंगोली की है, जिसमें संदेश दिया गया है कि सभी धर्म बराबर हैं।घरों से लेकर ऑफिस तक रंगोली देखी जा सकती है। रंगों में सिर्फ खूबसूरती ही नहीं संदेश भी दिया जा रहा है। यह तस्वीर केरल में बनी ऐसी ही रंगोली की है, जिसमें संदेश दिया गया है कि सभी धर्म बराबर हैं।
परंपरागततौर पर लोग इस दौरान दावत समारोह का आयोजन करते हैं। मेहमानों और रिश्तेदारों को नौ से अधिक तरह के स्वादिस्ट और मीठे व्यंजन खिलाते हैं।परंपरागततौर पर लोग इस दौरान दावत समारोह का आयोजन करते हैं। मेहमानों और रिश्तेदारों को नौ से अधिक तरह के स्वादिस्ट और मीठे व्यंजन खिलाते हैं।
ओणम के दौरान खासतौर पर पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर, केले और पापड़ के चिप्स बनाए जाते हैं। इन्हें केले के पत्तों पर परोसते हैं।ओणम के दौरान खासतौर पर पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर, केले और पापड़ के चिप्स बनाए जाते हैं। इन्हें केले के पत्तों पर परोसते हैं।
कई दिनों तक सेलिब्रेट होने वाले इस त्योहार में विशेषतौर पर साफ-सफाई के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर घर को फूलों से सजाते हैं। खासकर घरों के दरवाजों पर या आंगन रंगोली बनाने की परंपरा काफी पुरानी है।कई दिनों तक सेलिब्रेट होने वाले इस त्योहार में विशेषतौर पर साफ-सफाई के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर घर को फूलों से सजाते हैं। खासकर घरों के दरवाजों पर या आंगन रंगोली बनाने की परंपरा काफी पुरानी है।
ओणम को म्यूजिक और डांस फेस्टिवल के तौर पर भी सेलिब्रेट किया जाता है। इस दौरान खासतौर पर परंपरागत नृत्य थिरुवथिरा, कुमट्टीकली, फुलीकली, थुम्बी, ओणम कली किए जाते हैं।ओणम को म्यूजिक और डांस फेस्टिवल के तौर पर भी सेलिब्रेट किया जाता है। इस दौरान खासतौर पर परंपरागत नृत्य थिरुवथिरा, कुमट्टीकली, फुलीकली, थुम्बी, ओणम कली किए जाते हैं।
ओणम को म्यूजिक और डांस फेस्टिवल के तौर पर भी सेलिब्रेट किया जाता है। इस दौरान खासतौर पर परंपरागत नृत्य थिरुवथिरा, कुमट्टीकली, फुलीकली, थुम्बी, ओणम कली किए जाते हैं।ओणम को म्यूजिक और डांस फेस्टिवल के तौर पर भी सेलिब्रेट किया जाता है। इस दौरान खासतौर पर परंपरागत नृत्य थिरुवथिरा, कुमट्टीकली, फुलीकली, थुम्बी, ओणम कली किए जाते हैं।
थिरुवथिरा कली नृत्य खासतौर पर महिलाएं करती हैं। जो एक सर्किल में किया जाता है। वहीं कुमुट्टीकली चेहरे पर रंग-बिरंगा मुखौटा लगाकर किया जाता है।थिरुवथिरा कली नृत्य खासतौर पर महिलाएं करती हैं। जो एक सर्किल में किया जाता है। वहीं कुमुट्टीकली चेहरे पर रंग-बिरंगा मुखौटा लगाकर किया जाता है।
पौराणिक मान्यता है कि केरल में महाबलि नाम का एक असुर था, उसके आदर सत्कार के नाम पर ही ओणम मनाया जाता है। इस त्योहार का खेती-किसानी से गहरा सम्बंध है। किसान अपने फसलों की सुरक्षा और अच्छी उपज के लिए श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना करते हैं।पौराणिक मान्यता है कि केरल में महाबलि नाम का एक असुर था, उसके आदर सत्कार के नाम पर ही ओणम मनाया जाता है। इस त्योहार का खेती-किसानी से गहरा सम्बंध है। किसान अपने फसलों की सुरक्षा और अच्छी उपज के लिए श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना करते हैं।
फेस्टिवल सेलिब्रेशन के दौरान मोटर व्हीकल एक्ट का असर भी तस्वीरों में दिख रहा है। यह तस्वीर यही बताती है, जिसमें मंदिर के सामने खड़ा युवक हेलमेट लगाकर खड़ा है।फेस्टिवल सेलिब्रेशन के दौरान मोटर व्हीकल एक्ट का असर भी तस्वीरों में दिख रहा है। यह तस्वीर यही बताती है, जिसमें मंदिर के सामने खड़ा युवक हेलमेट लगाकर खड़ा है।
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