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इंडोनेशिया / साल का सबसे बड़ा आर्ट फेस्टिवल

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लाइफस्टाइल डेस्क. इंडोनेशिया में इन दिनों आर्ट्स फेस्टिवल चल रहा है। इसकी शुरुआत 15 जून से शुरू होती है और 14 जुलाई तक सेलिब्रेट किया जाता है।लाइफस्टाइल डेस्क. इंडोनेशिया में इन दिनों आर्ट्स फेस्टिवल चल रहा है। इसकी शुरुआत 15 जून से शुरू होती है और 14 जुलाई तक सेलिब्रेट किया जाता है।
तस्वीर स्ट्रीट डांस परेड की है जो बाली आर्ट फेस्टिवल के पहले दिन निकाली जाती है। इसमें 4 हजार से अधिक कलाकार शामिल होते हैं और अपने कल्चर का प्रदर्शन करते हैं।तस्वीर स्ट्रीट डांस परेड की है जो बाली आर्ट फेस्टिवल के पहले दिन निकाली जाती है। इसमें 4 हजार से अधिक कलाकार शामिल होते हैं और अपने कल्चर का प्रदर्शन करते हैं।
यह फेस्टिवल म्यूजिक, डांस, फिल्म और साहित्य समेत कला की कई शैलियों को समर्पित होता है। फेस्टिवल देनपसार में आयोजित किया जा रहा है।यह फेस्टिवल म्यूजिक, डांस, फिल्म और साहित्य समेत कला की कई शैलियों को समर्पित होता है। फेस्टिवल देनपसार में आयोजित किया जा रहा है।
फेस्टिवल की शुरुआत 1979 में हुई थी और इसका उद्देश्य बाली के सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें बढ़ावा देना है। फेस्टिवल के लिए बाली के हर जिले और शहर से लोग प्रतिनिधित्व करने आते हैं।फेस्टिवल की शुरुआत 1979 में हुई थी और इसका उद्देश्य बाली के सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें बढ़ावा देना है। फेस्टिवल के लिए बाली के हर जिले और शहर से लोग प्रतिनिधित्व करने आते हैं।
इस वर्ष इस आर्ट फेस्टिवल का विषय बायुप्रमाणा है। 'बायु' का अर्थ है हवा और 'प्रमाणा' का अर्थ है ताकत या शक्ति। बायुप्रमाणा को यहां जीवन की सांस बताया जा रहा है।इस वर्ष इस आर्ट फेस्टिवल का विषय बायुप्रमाणा है। 'बायु' का अर्थ है हवा और 'प्रमाणा' का अर्थ है ताकत या शक्ति। बायुप्रमाणा को यहां जीवन की सांस बताया जा रहा है।
यह तस्वीर इंडोनेशिया के गेन्ड्रंग नृत्य की है इसे पवित्र नृत्य की संज्ञा दी गई है। नृत्य में परंपरा, धार्मिक मूल्यों और पूर्वजों की भावनाओं को दिखाने की कोशिश की जाती है।यह तस्वीर इंडोनेशिया के गेन्ड्रंग नृत्य की है इसे पवित्र नृत्य की संज्ञा दी गई है। नृत्य में परंपरा, धार्मिक मूल्यों और पूर्वजों की भावनाओं को दिखाने की कोशिश की जाती है।
नृत्य काफी आकर्षक होता है, दर्शक दीर्घा में बैठे लोग इसे देखते हुए खो जाते हैं, कई बार स्थानीय महिलाएं भी कलाकारों संग थिरकने से खुद को रोक नहीं पाती।नृत्य काफी आकर्षक होता है, दर्शक दीर्घा में बैठे लोग इसे देखते हुए खो जाते हैं, कई बार स्थानीय महिलाएं भी कलाकारों संग थिरकने से खुद को रोक नहीं पाती।
यह तस्वीर एक खास तरह के नृत्य की है, जिसे ओगोह-ओगोह के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के प्रदूषण से वातावरण की और इंसानों का शुद्धिकरण करना है।यह तस्वीर एक खास तरह के नृत्य की है, जिसे ओगोह-ओगोह के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के प्रदूषण से वातावरण की और इंसानों का शुद्धिकरण करना है।
रात में समय फेस्टिवल में चार चांद लग जाते हैं। आतिशबाजी से इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।रात में समय फेस्टिवल में चार चांद लग जाते हैं। आतिशबाजी से इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।
पिछले कुछ सालों से फेस्टिवल की परंपराओं में आधुनिकता का रंग घुला नजर आता है। फेस्टिवल में कलाकारों के हाथों की भंगिमा में यह देखा जा सकता है।पिछले कुछ सालों से फेस्टिवल की परंपराओं में आधुनिकता का रंग घुला नजर आता है। फेस्टिवल में कलाकारों के हाथों की भंगिमा में यह देखा जा सकता है।
यहां हर साल देश-दुनिया के लोग पहुंचते हैं और यह साल के बड़े चुनिंदा फेस्टिवल में से एक है।यहां हर साल देश-दुनिया के लोग पहुंचते हैं और यह साल के बड़े चुनिंदा फेस्टिवल में से एक है।
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