सचिवालय कर्मियों के बराबर मिलेगी सैलरी-प्रमोशन:राजस्थान में क्लर्क बन सकेंगे डिप्टी डायरेक्टर; निगम-बोर्ड कर्मचारियों को मिल सकती है OPS

जयपुर19 दिन पहले

राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों को सरकार बजट में दो बड़ी सौगात दे सकती है। पहली एक लाख मंत्रालयिक कर्मचारियों (क्लर्क) को सचिवालय सेवा के बराबर सैलरी-प्रमोशन मिल सकता है। दूसरी सरकारी निगम-बोर्डों में कार्यरत एक लाख कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) का लाभ देने की घोषणा हो सकती है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 8 फरवरी को राजस्थान का पेश करेंगे। हालांकि बजट पेश होने में अब कम समय ही बचा है, ऐसे में वित्त विभाग इन दोनों मांगों के रिव्यू और रिपोर्ट तैयार करने के लिए किसी रिटायर आईएएस अफसर की अध्यक्षता में कमेटी बनाएगी। हाल ही में 18 जनवरी को सीएम गहलोत ने मुख्य सचिव उषा शर्मा सहित कई विभागों के अफसरों के साथ कर्मचारियों के 59 संघों की 100 से ज्यादा मांगों पर 6 घंटे मंथन किया था।

सीएम गहलोत ने 18 जनवरी को कर्मचारियों के साथ छह घंटे तक मीटिंग की थी। इस बैठक में यह निकलकर आया कि कर्मचारियों की सबसे महत्वपूर्ण दो मांगें इसी बजट में पूरी हो सकती हैं।
सीएम गहलोत ने 18 जनवरी को कर्मचारियों के साथ छह घंटे तक मीटिंग की थी। इस बैठक में यह निकलकर आया कि कर्मचारियों की सबसे महत्वपूर्ण दो मांगें इसी बजट में पूरी हो सकती हैं।

वित्त विभाग के हरी झंडी दिखाने के बाद होगी बजट में घोषणा
सूत्रों ने बताया कि कर्मचारी संघों ने 110 मांगें रखी हैं। हालांकि कर्मचारी वर्ग की सबसे बड़ी यह दो ही मांगें हैं। इन्हें पूरा करने पर अन्य मांगें स्वत: ही खत्म हो जाएंगी। ऐसे में सरकार इन्हीं दो मांगों पर फोकस कर रही है। इन मांगों को पूरा करने पर कर्मचारी वर्ग को संतुष्ट किया जा सकता है। चुनावी साल होने से सीएम गहलोत कर्मचारियों को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

कर्मचारी नेता सूरज प्रकाश टांक, लिखमाराम जाखड़, महेंद्र धायल ने भास्कर को बताया कि कर्मचारी सरकार के विरोध में नहीं है। कर्मचारी भी सरकार के अंग होते हैं। ऐसे में सरकार के अर्थ-वित्त संसाधनों को समझना बहुत जरूरी है। सरकार इन दो बड़ी मांगों को पूरा करती है तो कर्मचारियों का एक बहुत बड़ा वर्ग संतुष्ट होगा।

क्या है सचिवालय सेवा के बराबर सैलरी-प्रमोशन मिलने की मांग?
प्रदेश में करीब एक लाख मंत्रालयिक (क्लर्क ग्रेड) कर्मचारी है। शिक्षा, चिकित्सा, यूडीएच जैसे विभागों में इनकी पोस्टिंग होती है। इन्हें सबसे बड़ा प्रमोशन संस्थापन अधिकारी तक ही मिलता है, जो सचिवालय सेवा की टॉप पोस्ट से बहुत पीछे है। अगर सरकार दोनों की ग्रेड बराबर करती है तो एक सामान्य बाबू भी सचिवालय में काम करने वाले कर्मचारियों की तरह RAS अफसरों के बराबर की पोस्ट पर रिटायर्ड हो सकेंगे। यह इस वर्ग के लिए बहुत बड़े सम्मान की बात होगी।

सचिवालय कर्मचारियों को मिलते हैं ये प्रमोशन
सचिवालय सेवा में कर्मचारी क्लर्क जूनियर असिस्टेंट (कनिष्ठ सहायक) जैसे पद पर भर्ती होता है तो उसे छह प्रमोशन मिलते हैं। वरिष्ठ सहायक, सहायक अनुभाग अधिकारी, अनुभाग अधिकारी, सहायक सचिव, अतिरिक्त सचिव, उप सचिव (डिप्टी सेक्रेटरी) और सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी (वरिष्ठ उप सचिव) के पद तक पहुंच सकता है।

सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी की पोस्ट किसी वरिष्ठ RAS ऑफिसर के बराबर होती है। इस पोस्ट पर कर्मचारी को 1 लाख 25 हजार से लेकर 1 लाख 40 हजार तक की सैलरी मिलती है। इसी तरह की सैलरी और प्रमोशन सचिवालय के अलावा राज्य विधानसभा और राजस्थान लोक सेवा आयोग (अजमेर) के कर्मचारियों को भी मिलते हैं।

राजस्थान के शासन सचिवालय की सेवा देश में सबसे ज्यादा सैलरी और प्रमोशन पाने वाली है।
राजस्थान के शासन सचिवालय की सेवा देश में सबसे ज्यादा सैलरी और प्रमोशन पाने वाली है।

सरकारी विभागों में क्लर्क का प्रमोशन कैसे होता है
सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत क्लर्क को जूनियर असिस्टेंट (LDC) के शुरुआती पद पर नियुक्ति मिलने के बाद वरिष्ठ सहायक (UDC), सहायक प्रशासनिक अधिकारी (AAO), अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी (Additional AO), प्रशासनिक अधिकारी (AO) और संस्थापन अधिकारी (EO) के पद तक पदोन्नति मिलती है।

इस वर्ग के लगभग 1 लाख कर्मचारियों की मांग है कि संस्थापन अधिकारी को सचिवालय सेवा के डिप्टी सेक्रेटरी के बराबर किया जाए। सैलरी और प्रमोशन भी बराबर किए जाए। इसके ऊपर फिर एक पद और गठित कर डिप्टी डायरेक्टर का पद विभागों में सृजित किया जाए, जिसे सचिवालय सेवा के सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी के बराबर वेतन मिले। संस्थापन अधिकारी बनने पर करीब एक लाख रुपए महीने का वेतन मिलता है, जो सचिवालय सेवा की टॉप पोस्ट से 25 से 40 हजार रुपए महीना कम है।

..तो सचिवालय सेवा के बराबर होगी सैलरी और पेंशन
सचिवालय सेवा की टॉप पोस्ट (सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी) और सामान्य विभागों की टॉप पोस्ट (संस्थापन अधिकारी-इस्टैब्लिशमेंट ऑफिसर) की सैलरी में 25 से 40 हजार रुपए महीने का अंतर है। जब तक कर्मचारी नौकरी में रहते हैं, तब तक यह फर्क सैलरी में बना रहता है। उसके बाद यही फर्क रिटायरमेंट के बाद पेंशन में भी बना रहता है। अभी सचिवालय सेवा के कर्मचारी को 70 हजार रुपए महीना तक पेंशन मिलती है, वहीं सामान्य कर्मचारी को 55 हजार रुपए मिलती है। अब यह अंतर हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।

सरकार पर पड़ेगा 1100 करोड़ का अतिरिक्त भार
वित्त विभाग के अनुमान के मुताबिक इस घोषणा से सालाना बजट पर पड़ने वाले असर का परीक्षण किया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 1100 करोड़ रुपए सालाना का अतिरिक्त भार सरकार पर पड़ सकता है।

राजस्थान के बोर्ड-निगमों में कार्यरत एक लाख कर्मचारी ओपीएस से वंचित हैं। अब संभव है कि इन कर्मचारियों के लिए भी ओपीएस लागू हो जाए।
राजस्थान के बोर्ड-निगमों में कार्यरत एक लाख कर्मचारी ओपीएस से वंचित हैं। अब संभव है कि इन कर्मचारियों के लिए भी ओपीएस लागू हो जाए।

क्या है निगम-बोर्ड के कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग?
ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने वाले सीएम गहलोत देश के पहले मुख्यमंत्री हैं। अब पूरे देश में कर्मचारी ओपीएस की मांग कर रहे हैं। राजस्थान में ही अभी भी करीब एक लाख कर्मचारी है, जिन्हें ओपीएस का लाभ नहीं मिल रहा है।

सरकार के कुल साढ़े सात लाख कर्मचारियों के लिए तो यह स्कीम लागू हो गई है, लेकिन सरकारी विभागों से जुड़े बोर्ड, निगम, कॉर्पोरेशन, मंडल, अकादमी, प्राधिकरण में पोस्टेड लगभग एक लाख कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम अभी लागू नहीं हुई है। बिजली-निगमों के कर्मचारियों ने तो हाल ही में जबरदस्त प्रदर्शन भी किया था। अब गहलोत ने अधिकारियों से कहा है कि वे कोई रास्ता निकालें, जिससे इन एक लाख कर्मचारियों को भी ओपीएस का लाभ दिया जा सके।

अभी तक सरकार का यह मानना था कि बोर्ड-निगम स्वायत्तशासी संस्थाओं में आते हैं, तो उन्हें अपने कर्मचारियों को पेंशन देने का इंतजाम खुद ही करना चाहिए। वित्त विभाग ने पिछले बजट (मार्च-2022) के बाद बोर्ड-निगम से पूछा था कि वे कैसे अपने कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम का लाभ देंगे। अब 10-11 महीने बीत जाने पर भी उनकी ओर से कोई उपाय नहीं सुझाए गए हैं। अब सीएम स्तर पर ही इसका कोई रास्ता निकाला जाएगा।

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