IAS अफसरों के बार-बार तबादले क्यों?:चुनावी वर्ष से पहले CM गहलोत बनाना चाहते हैं ब्यूरोक्रेसी की फाइनल टीम, DOP का होमवर्क अधूरा

जयपुर3 महीने पहले

सीएम अशोक गहलोत चुनावी वर्ष शुरू होने से पहले ब्यूरोक्रेसी की फाइनल टीम बनाने में जुटे हैं, लेकिन कार्मिक विभाग (डीओपी) सीएम की मंशा को ठीक से समझ नहीं पा रहा है। विभाग आईएएस अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग में पर्याप्त होमवर्क नहीं कर रहा है।

यही कारण है कि कुछ अफसरों के पिछले चार साल में पांच बार तबादले हो चुके हैं। दो युवा आईएएस तो ऐसे हैं, जिन्हें डेढ़ वर्ष में तीन बार बदला जा चुका है। यह मामला हाल ही मुख्य सचिव ऊषा शर्मा और सीएमओ तक भी पहुंचा है। इनमें से एक आईएएस के पिता भी राजस्थान काडर में ही वरिष्ठ आईएएस हैं।

अब मुख्यमंत्री गहलोत और सीएमओ में कार्यरत अफसर फिर से एक बड़ी सूची आरएएस काडर की, एक 20-25 आईएएस अफसरों की सूची और एक 25-30 आईपीएस अफसरों की सूची तैयार करने में जुटे हैं। गहलोत ने कार्मिक विभाग को इस विषय में होमवर्क पूरा करने को कहा है।

अब जो ब्यूरोक्रेसी की टीम बन रही है, वो सीएम के राजनीतिक, प्रशासनिक, मंत्रियों-विधायकों के समीकरणों के आधार पर बन रही है, ताकि अगले एक वर्ष में सभी फ्लैगशिप योजनाओं और जिलों के प्रशासन में बेहतरीन काम हो सके।

सूत्रों के अनुसार सीएम गहलोत चुनावों को लेकर वन-मैन आर्मी की तरह तैयारी कर रहे हैं। वे अपनी फ्लैगशिप योजनाओं में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं, लेकिन कार्मिक विभाग द्वारा होमवर्क ठीक से नहीं करने से ऐसी विचित्र स्थितियां बन रही हैं कि फाइनल टीम बन ही नहीं पा रही है।

जब बार-बार तबादले होते हैं तो न केवल अफसरों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ता है, बल्कि सरकारी योजनाओं पर कामकाज भी प्रभावित होता है। कामचलाऊ अंदाज में काम होने पर वे योजनाएं ठीक ढंग से रफ्तार नहीं पकड़ पाती हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत की मंशा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचे। लेकिन ब्यूरोक्रेसी में लगातार ट्रांसफर-पोस्टिंग के माहौल से किसी भी अफसर के लिए विभाग या योजना पर निरंतर काम होना और मॉनिटरिंग करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

कार्मक विभाग में इस तरह हो रही गफलत...

  • श्रीगंगानगर जिले में जून-2020 से अब तक करीब ढाई ‌वर्ष में चार बार कलक्टर बदल दिए गए हैं। महावीर प्रसाद वर्मा, जाकिर हुसैन, रुक्मणी रियार और अब सौरभ स्वामी को कलक्टर लगाया गया है।
  • दिसम्बर 2018 से फरवरी 2020 तक सीएमओ में मुख्यमंत्री के सचिव रहे अजिताभ शर्मा के फरवरी-2020 से अब तक पांच बार तबादले हो गए हैं। वे फिलहाल जेसीटीएल के चैयरमेन पद पर हैं।
  • वर्ष 2018 बैच के युवा अफसर कनिष्क कटारिया मई 2020 में राजस्थान काडर में चयनित हुए। महज ढाई वर्ष में उनका छह बार तबादला हो चुका है। अब उन्हें एसडीएम रामगंजमंडी (कोटा) के पद पर लगाया गया है। इससे पहले वे माउंट आबू में एसडीएम थे और उससे पहले रामगंज मंडी में ही एसडीएम थे। अब फिर से एसडीएम रामगंज मंडी लगाए गए हैं।
  • वरिष्ठ आईएएस अफसर आशुतोष पेडनेकर के पिछले 22 महीनों में पांच बार तबादले हो चुके हैं। अब उन्हें राजस्थान डिस्कॉम में सीएमडी के पद पर लगाया गया है।
  • संदेश नायक भी इसी तरह से लगातार इधर से उधर किए जाते रहे हैं। उन्हें जुलाई 2020 से अब तक पांच बार तबादले झेलने पड़े हैं। उन्हें अब निदेशक खान विभाग के पद पर लगाया गया है।
  • राजधानी जयपुर में कलक्टर के पद पर कार्यरत एस. प्रकाश राजपुरोहित को भी जुलाई 2020 से अब तक पांच बार इधर से उधर होना पड़ा है।
  • वर्ष 2017 बैच के युवा आईएएस अफसर अवधेश मीणा को जुलाई 2020 से अब तक चार बार स्थानांतरित किया गया है। उनका पिछला पद जोधपुर विकास प्राधिकरण में सचिव था। वो पद आरएएस काडर का था, लेकिन उन्हें लगा दिया गया था। यह कार्मिक विभाग की त्रुटि थी। आरएएस एसोसिएशन ने विरोध भी किया था। अब उन्हें वहां से हटा दिया गया, लेकिन आनन-फानन में कोई और पद नहीं मिलने से उन्हें फिलहाल एपीओ कर दिया गया है।
  • प्रदीप गवांडे को हाल ही बीकानेर में उप निवेशन विभाग में आयुक्त लगाया गया है। वे विभिन्न कारणों से अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। उनका फरवरी 2020 से अब तक लगभग आठ बार तबादला हो चुका है।
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