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MLSU और लॉ यूनिवर्सिटी के बाद अब RU विवादों में:कुलपति की नियुक्ति के खिलाफ गर्वनर को शिकायत, 2 विधायकों सहित 5 सिंडिकेट मेम्बर सीएम से मिलेंगे

जयपुर18 दिन पहलेलेखक: निखिल शर्मा
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राजस्थान में यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों की योग्यता और वर्किंग को लेकर विवादों का सिलसिला थम नहीं रहा है। उदयपुर की सुखाड़िया यूनिवर्सिटी और जयपुर की लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपतियों काे हटाए जाने के बाद अब राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर राजीव जैन की वर्किंग और योग्यता पर सवाल उठने लगा है। मामला यहां तक पहुंच गया है कि अब राजस्थान यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट के सदस्य कुलपति राजीव जैन को लेकर सीएम से मुलाकात करेंगे।

राजीव जैन की अकादमिक योग्यता को लेकर तो पहले ही विवाद था। उनकी कुलपति पद को लेकर अयोग्यता के सदंर्भ में राजस्थान यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड सीनियर प्रोफेसर आरडी गुर्जर ने राज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में राजीव जैन की कुलपति पद की नियुक्ति के लिए मिथ्यापूर्ण दस्तावेज देकर नियुक्ति हासिल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कुलपति पर झूठी रचनाएं पेश कर कुलपति की नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया।

राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी है। यहां पहले भी कई कुलपतियों की नियुक्ति पर विवाद हो चुके हैं।
राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी है। यहां पहले भी कई कुलपतियों की नियुक्ति पर विवाद हो चुके हैं।

सितम्बर 2020 से आरयू के कुलपति हैं जैन

इसी बीच कुलपति की वर्किंग को लेकर भी विवाद अब सामने आ गए हैं। कुलपति की वर्किंग की वजह से दो दिन पहले हुई सिंडिकेट की बैठक का विधायकों और सिंडिकेट मेम्बर्स ने बॉयकॉट कर दिया। इसके बाद दो विधायकों सहित पांच सिंडिकेट सदस्यों ने तय किया कि वे अगले दो दिन में सीएम के सामने यह मसला रखेंगे। बता दें राजीव जैन 9 सितम्बर 2020 से राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं।

इनमें विधायक अमीन कागजी, गोपाल मीणा, प्रोफेसर रामलखन मीणा, प्रोफेसर दिलीप सिंह और कॉलेज प्रिंसिपल शब्बीर खान शामिल हैं। ये सभी सरकार के नॉमिनी हैं।

इस पूरे मामले काे लेकर सरकार के नॉमिनी और विधायक अमीन कागजी ने बताया कि 19 जनवरी को सिंडिकेट मीटिंग होनी थी। उसके लिए बैठक के निर्देश और एजेंडा 18 जनवरी शाम को दिया गया। जबकि एजेंडा एक सप्ताह पहले दिया जाता था। पहले भी इसी वजह से हमने 3 जनवरी की बैठक को रद्द करवाया था। जब एजेंडा एक दिन पहले आएगा तो हम क्या तैयारी करके आएंगे। रजिस्ट्रार छुट्‌टी पर थी तो वित्तीय सलाहकर को भी पहले एजेंडा दिया जा सकता था। मगर ऐसा नहीं होता।

किशनपोल विधायक अमीन कागजी सहित सिंडिकेट सदस्यों ने 19 जनवरी की सिंडिकेट बैठक का बहिष्कार कर दिया था।
किशनपोल विधायक अमीन कागजी सहित सिंडिकेट सदस्यों ने 19 जनवरी की सिंडिकेट बैठक का बहिष्कार कर दिया था।

वर्किंग को लेकर सीएम से बात करेंगे : कागजी

कागजी ने कहा कि कुलपति की वर्किंग और उन्होंने जाे सिंडिकेट मेम्बर बनाए हैं वो यूनिवर्सिटी के हित में कोई काम नहीं कर रहे। कुलपति को भी मिसगाइड करते हैं और सिंडिकैट मीटिंग में भी उल्टी सीधी बातें करते हैं। ये छात्रहित में नहीं हैं। इन सब चीजों से हम दुखी हैं। पिछले 1.5 वर्ष से यही चल रहा है। इससे यूनिवर्सिटी के कर्मचारी, शिक्षक और छात्र सब परेशान हैं। हमने सीएम से समय मांगा है, एक-दो दिन में उनसे मिलकर सबकुछ बताएंगे।

क्या दो जगह से वेतन ले रहे थे कुलपति : प्रोफेसर गुर्जर

वहीं इसे लेकर राज्यपाल को पत्र लिखने वाले रिटायर्ड प्रोफेसर आरडी गुर्जर का कहना है कि राजीव जैन ने 1984 से जुलाई 2012 तक राज्य अनुदानित व्याख्याता पर कार्यरत रहकर राज्यकोष से वेतन प्राप्त किया। डॉ. राजीव जैन का यह कहना कि उनकी प्रोफेसर पद पर पदोन्नति प्रोफेसर काडर में स्वीकृत पद पर हुई जो कि पूर्णतया गलत है।

कुलपति राजीव जैन की अकादमिक योग्यता को लेकर राज्यपाल को शिकायत पत्र भेजा गया है।
कुलपति राजीव जैन की अकादमिक योग्यता को लेकर राज्यपाल को शिकायत पत्र भेजा गया है।

प्रोफेसर गुर्जर का कहना है कि करियर एडवांसमेंट योजना के अंतर्गत पदोन्नति खुद द्वारा धारित पद को क्रमोन्नत कर दी जाती है, ना की अलग से सीधी भर्ती के लिए सृजित पद पर। राज्य सरकार ने तो पदोन्नति की अनुमति ही नहीं दी थी। तो क्या वे तथ्य छिपाकर एक ही समय में श्री माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी कॉलेज (अनुदानित) में व्याख्याता और राजस्थान विद्यापीठ यूनिवर्सिटी (डीम्ड) में अलग से स्वीकृत एसोसिएट एवं प्रोफेसर पदों पर 1997 से जुलाई 2011 तक कार्यरत रहकर दोनों जगह से वेतन ले रहे थे।

प्रोफेसर राजीव जैन का कहना है कि उनके कुलपति बनने के बाद आरयू में बहुत कुछ अच्छा हुआ है। उन्होंने यूनिवर्सिटी में काफी इनोवेशन किए हैं।
प्रोफेसर राजीव जैन का कहना है कि उनके कुलपति बनने के बाद आरयू में बहुत कुछ अच्छा हुआ है। उन्होंने यूनिवर्सिटी में काफी इनोवेशन किए हैं।

सिंडिकेट में डिस्कशन कुछ और मिनट्स कुछ और बनते हैं : सिंडिकेट सदस्य

वहीं इसे लेकर सिंडिकेट सदस्य प्रोफेसर प्रोफेसर रामलखन मीणा कहते हैं कि राजीव जैन जब कोटा यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बने थे, मैं उस यूनिवर्सिटी के बॉम का मैम्बर था। इनकी उस नियुक्ति पर प्रश्न उठे थे। जबसे ये आरयू में आए हैं इनकी वर्किंग यूनिवर्सिटी, स्टूडेंट और टीचर्स के हित में नहीं है। पिछली 4-5 सिंडिकेट की बैठकों में जाे डिस्कशन होता है वो ये मिनट्स नहीं बनाते हैं। सिंडिकेट की वीडियोग्राफी भी बंद करवा दी गई। डिस्कशन कुछ होता है और मिनट्स कुछ और बनाते हैं। यूनिवर्सिटी का कुलपति हाई एथिक्स वाला होना चाहिए। मगर इनपर तो योग्यता और कुलपति की नियुक्ति के लिए गलत दस्तावेज पेश करने का आरोप है।

कुलपति बोले : ये सब प्रेशर टैक्टिक्स हैं, सलेक्शन कमेटी ने पूरा प्रोसेस किया

इधर इस पूरे मसले को लेकर कुलपति प्रोफेसर राजीव जैन ने कहा कि यह सब-ज्यूडिशियस है। यह मामला कोर्ट में चल रहा है बाकी सिलेक्शन कमेटी ने पूरा प्रोसेस किया है। राज्य सरकार ने राजभवन की अनुशंसा पर नियुक्ति की है। वहीं सिंडिकेट की बैठक का मामला है तो कोई बॉयकॉट नहीं हुआ। पिछली बैठक में तय हुआ था कि 19 जनवरी को बैठक करेंगे। एजेंडा तो 3 वाली बैठक से पहले ही दे दिया था। एजेंडा बदला ही नहीं गया। आरयू में हम सबसे अच्छा कर रहे हैं। बाकी सब प्रेशर टैक्टिक हाेती है जब सिंडिकेट की बैठक आती है तो अपनी बात मनवाने के लिए ऐसा करते हैं।

आरयू के सिंडिकेट सदस्यों का कहना है कि यूनिवर्सिटी के कुलपति हाई एथिक्स वाले हाेने चाहिए। गलत दस्तावेज देकर कुलपति बनना गंभीर है।
आरयू के सिंडिकेट सदस्यों का कहना है कि यूनिवर्सिटी के कुलपति हाई एथिक्स वाले हाेने चाहिए। गलत दस्तावेज देकर कुलपति बनना गंभीर है।

दो कुलपतियों को गिर चुकी है गाज

पिछले कुछ समय में राजस्थान की दो बड़ी यूनिवर्सिटी के कुलपतियों को अनियमितताओं के चलते सस्पैंड किया जा चुका है। उदयपुर की सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह को राज्यपाल ने उनके खिलाफ शिकायतें और सरकार की अनुशंसा पर सस्पैंड किया था। वहीं पिछले महीने ही अपनी एलएलबी डिग्री सवालों के घेरे में आने के बाद अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर देवस्वरूप ने दिसम्बर 2022 में इस्तीफा दे दिया था।

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