वसुंधरा राजे को भूली पार्टी, पूनिया बोले-अचानक बना कार्यक्रम:कांग्रेस को घेरने स्पीकर के बंगले पर पहुंचे थे; सामने ही पूर्व CM का घर

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: निखिल शर्मा

राजस्थान की राजनीति में पार्टियों के भीतर घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस में जहां गहलोत-पायलट के बीच मतभेद जगजाहिर हैं। वहीं, बीजेपी में भी अब खेमेबाजी साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। भले ही बाहरी तौर पर बयानों में बीजेपी के नेता एकजुटता की बातें करते हों, मगर असल में बीजेपी अपनी ही अंदरूनी गुटबाजी में उलझी है।

ताजा उदाहरण मंगलवार को उस समय देखने को मिला जब कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफों के संबंध में ज्ञापन देने भाजपा डेलिगेशन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के घर पहुंचा। इसमें प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया, उपनेता राजेंद्र राठौड़ और अजमेर (उत्तर) विधायक वासुदेव देवनानी सहित कई विधायक थे।

मगर विधानसभा अध्यक्ष के ठीक सामने रहने वाली पूर्व मुख्यमंत्री इस डेलिगेशन में नहीं थीं। इसे लेकर वसुंधरा खेमे का कहना है कि उन्हें इसकी सूचना नहीं दी गई। वहीं, बीजेपी के प्रमुख नेताओं से जब भास्कर ने इस बारे में पूछा तो वो इसकी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालते नजर आए।

भास्कर ने बीजेपी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी महेश शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि मेरा काम बैठकों की सूचना देना है। इस तरह की सूचनाएं देने का काम मेरा नहीं। यह प्रदेशाध्यक्ष या संगठन मंत्री के स्तर पर तय होती हैं।

भले ही नेता एक-दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हों। मगर इससे बीजेपी के भीतर खींचतान साफ पता चलती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह पहली बार नहीं जब नेताओं ने एक-दूसरे के कार्यक्रमों से दूरी बनाई हो।

अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में 7 से 9 अक्टूबर के बीच वसुंधरा राजे ने बीकानेर संभाग और आसपास का दौरा किया। उन्होंने इस दौरान बीकानेर और चूरू में सभाएं भी की। मगर उनकी इन सभाओं और दौरों में ना ही प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया नजर आए और ना ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया।

वहीं, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अर्जुनराम मेघवाल भी नजर नहीं आए। जबकि, बीकानेर अर्जुनराम मेघवाल का संसदीय क्षेत्र है और राजे बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

वसुंधरा-कटारिया नदारद थे

इसी दौरान सतीश पूनिया ने हाड़ौती का दौरा किया। उन्होंने कोटा, झालावाड़, बूंदी, चित्तौड़गढ़ सहित आसपास के इलाकों में रैली और कार्यक्रम किए। मगर इन कार्यक्रम से वसुंधरा राजे ने दूरी बनाए रखी। फसल खराबे को देखने भी वसुंधरा और पूनिया अलग-अलग गए। इधर गुलाबचंद कटारिया सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी प्रदेशाध्यक्ष पूनिया के दौरे में नजर नहीं आए।

इससे पहले अगस्त के अंतिम सप्ताह में उदयपुर में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा कार्यक्रम हुआ था। यह कार्यक्रम नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने करवाया था। पन्नाधाय की मूर्ति के अनावरण के कार्यक्रम में ना ही वसुंधरा राजे आई। ना ही प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पहुंचे। केंद्रीय मंत्री शेखावत और अर्जुन मेघवाल भी इस कार्यक्रम से नदारद रहे। इस दौरान भी नेताओं के बीच आपसी खींचतान नजर आई।

शेखावत के कार्यक्रमों में नजर नहीं आए थे नेता

इसके अलावा पिछले कुछ समय में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के कार्यक्रमों में भी पार्टी की एकजुटता दिखाई नहीं पड़ती है। शेखावत अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम करते हैं। मगर उनमें ज्यादातर प्रमुख नेता नहीं दिखते। हालांकि, शेखावत ने पिछले कुछ समय में कोई बड़ी सभा या सम्मेलन जैसा कार्यक्रम नहीं किया है।

इसी तरह पिछले महीने प्रदेशाध्यक्ष को पोखरण से रामदेवरा की अपनी 11 किलोमीटर की यात्रा अकेले करनी पड़ी। यह यात्रा पहले अलग ढंग से प्रस्तावित थी। मगर बाद में स्थगित हुई। कहा गया कि गृहमंत्री के 10 सितंबर के जोधपुर कार्यक्रम के लिए इसे स्थगित किया गया है।

मगर यात्रा के स्थगित होने को भी बीजेपी नेताओं की आपसी गुटबाजी के तौर पर देखा गया। बाद में पूनिया ने अकेले ही कुछ नेताओं के साथ मिलकर इस यात्रा को पूरा किया।

अपने-अपने स्तर के अलग-अलग कार्यक्रमों में जहां बीजेपी के नेताओं में खींचतान नजर आती है। मगर 30 सितम्बर को आबूरोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शो में बीजेपी एकजुट नजर आई। प्रधानमंत्री चंद मिनटों के लिए ही आबूरोड आए थे।

यहां प्रदेधाध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुनलाल मेघवाल सहित संगठन के तमाम नेता और कोर कमेटी नजर आई थी।

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