• Hindi News
  • Politics
  • Rajasthan Congress Crisis Vs Rahul Gandhi Bharat Jodo Yatra | Ashok Gehlot Vs Sachin Pilot

राहुल की यात्रा से पहले फिर सियासी संकट की सुगबुगाहट:जानिए- क्यों पायलट ने गहलोत पर साधा निशाना, सीएम ने कैसे दिया जवाब

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: उपेंद्र शर्मा

राजस्थान की राजनीति में क्या एक बार फिर सियासी संकट आने वाला है?

जुलाई 2020 या सितंबर 2022 में जो देखने को मिला था वह फिर हो सकता है?

क्यों पायलट ने चुप्पी तोड़ी और गहलोत क्यों लगातार मुखर हो रहे हैं?

राजस्थान की राजनीति में ऐसा ही कुछ इन दिनों चल रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के खेमों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। लंबे समय बाद पायलट ने चुप्पी तोड़ी तो गहलोत ने जवाब दिया। पिछले दिनों ऐसे ही एक के बाद एक पांच ऐसे राजनीतिक घटनाक्रम सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पांचों घटनाक्रम पिछले 15 दिनों में घटे हैं। जो सीधे तौर पर गहलोत और पायलट से जुड़े हुए हैं।

ऐसा तब हो रहा है जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी हो चुका है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बन चुके हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी 3 दिसंबर को राजस्थान पहुंचने वाली है, जिसकी तैयारियां भी सरकार और पार्टी के स्तर पर शुरू हो चुकी हैं। सरकार और पार्टी के बीच जहां अभी एकजुटता का संदेश दिया जाना चाहिए, वहीं परिस्थितियां कुछ और ही इशारा कर रही है।

जानिए- वो पांच घटनाक्रम जो पिछले 15 दिनों में हुए

1. विधायक रामनिवास गावड़िया का राठौड़ पर हमला

सचिन पायलट के साथ जुलाई 2020 में मानेसर जाने वाले परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया ने अचानक एक बयान देकर कहा कि RTDC के चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ तो बड़े नेताओं के जूते-चप्पल उठाते थे। इसका इनाम उन्हें चेयरमैन की कुर्सी के रूप में मिला है। राठौड़ मुख्यमंत्री के बेहद खास माने जाते हैं। राठौड़ ने पलटवार करते हुए यह कहा था कि उन्हें कांग्रेस से गद्दारी करने वालों से कोई सरोकार नहीं।

2. राजेन्द्र सिंह गुढ़ा का आलाकमान से सवाल

राज्य सरकार में सैनिक कल्याण मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में बने रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से मीडिया के मार्फत सवाल किया कि राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने का निर्णय जल्द किया जाना चाहिए। ऐसा न होने से चुनावी साल में एक अजीब सी राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। गुढ़ा पहले गहलोत समर्थक थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से पायलट का समर्थन करने लगे हैं।

3. प्रताप सिंह खाचरियावास का IAS अफसरों की एसीआर भरने का अधिकार मांगना

खाद्य व रसद विभाग के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने हाल ही में एक बयान देकर कहा कि आईएएस अफसरों की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) भरने का अधिकार उन्हें (मंत्री को) मिलना चाहिए। खाचरियावास ने कहा था कि यह अधिकार मुख्यमंत्री ने अपने पास ही क्यों रखे हुए हैं? जब जलदाय मंत्री महेश जोशी ने कहा कि उन्हें तो उनके विभाग में सब अधिकार मिले हुए हैं तो खाचरियावास ने जोशी को गुलामी न करने की नसीहत दी थी। जोशी गहलोत के सबसे विश्वस्त मंत्रियों और 40 साल पुराने साथियों में गिने जाते हैं।

4. विधायक कुंदनपुर का मंदबुद्धि शब्द वाला लेटर
कोटा के सांगोद से विधायक हैं भरत सिंह कुंदनपुर। उन्होंने 3 नवंबर को मुख्यमंत्री के हाड़ौती दौरे के दौरान एक लेटर उन्हें लिखा। लेटर की भाषा कभी भी मुख्यमंत्री को लिखे जाने वाले पत्रों जैसी नहीं है। पत्र में कुंदनपुर ने खानों के झोपड़िया गांव को बारां के बजाए कोटा जिले में शामिल करने की मांग करते हुए लिखा कि यह मांग इतनी सरल है कि यह किसी मंदबुद्धि इंसान के भी समझ में आ सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री रामलाल जाट और खान मंत्री प्रमोद जैन भाया के समझ में नहीं आ रही है।

5. सचिन पायलट की चुप्पी आखिरकार टूट ही गई
सचिन पायलट 25 सितंबर को विधायकों की इस्तीफा राजनीति के बाद से लगातार खामोश थे। उन्होंने कभी कोई टिप्पणी राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर नहीं की थी, लेकिन तीन दिन पहले आखिरकार उनकी भी चुप्पी टूट गई।

एक नवंबर को मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को देश का सबसे सीनियर सीएम कह कर उनकी तारीफ की थी। जिसके बाद दो नवंबर को पायलट ने बयान दिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कभी गुलाम नबी आजाद की भी संसद में तारीफ की थी, बाद में क्या हुआ? आजाद कांग्रेस छोड़ गए और नई पार्टी बना ली। ऐसे में मोदी की ओर से गहलोत की तारीफ करने को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

इसके जवाब में गहलोत ने कहा था कि राजनीति में सभी को पद पर आने की महत्वाकांक्षा होती है। यह गलत भी नहीं, लेकिन इसकी अप्रोच (सोच) सही होनी चाहिए।

मुलाकात पॉलिटिक्स
25 सितंबर की घटना के बाद गहलोत गुट के किसी भी प्रमुख मंत्री से पायलट की कोई मुलाकात नहीं हुई। उस घटना के दिन भी मुख्यमंत्री गहलोत जैसलमेर थे। उनके साथ केवल कैबिनेट मंत्री थे प्रताप सिंह खाचरियावास। खाचरियावास जब जैसलमेर से लौटे तो उन्होंने बयान दिया था कि आलाकमान का कोई विरोध नहीं है, लेकिन सरकार गिराने की कोशिश करने वालों का हम लोग साथ नहीं देंगे। उनका इशारा जुलाई 2020 की मानेसर वाली घटना और पायलट की तरफ था।

3 अक्टूबर को अचानक रात को पायलट मंत्री खाचरियावास के घर गए। वहां दोनों के बीच मुलाकात हुई। इस दौरान क्या बात हुई इसे दोनों ने ही कभी जाहिर नहीं किया। बस खाचरियावास ने इतना ही कहा कि हमारे बीच बहुत सी बातें हुईं। पिछले 4 सालों को देखा जाए तो खाचरियावास ने कभी भी मुख्यमंत्री गहलोत को कठघरे में खड़ा नहीं किया न ही उनसे कभी कोई अधिकार मांगे।

ऐसी ही एक मुलाकात 11 अक्टूबर को कोटा में पायलट ने विधायक भरत सिंह कुंदनपुर के घर जाकर की थी। उस मुलाकात की भी कोई जानकारी पायलट या कुंदनपुर ने जाहिर नहीं की। कुंदनपुर पहले भी गोडावण संरक्षण, कोरोना हेल्पलाइन, राज्य सभा चुनाव, मंत्रिमंडल विस्तार आदि विभिन्न विषयों पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखते रहे हैं। उन्होंने कभी भी मंदबुद्धि जैसे शब्द का प्रयोग नहीं किया। इस बार पत्र की भाषा मुख्यमंत्री गहलोत पर सीधा हमला है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर की गहलोत की तारीफ
राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान तीन दिन पहले सोशल मीडिया के जरिए संदेश दिया था कि वे गहलोत सरकार की चिरंजीवी योजना और कर्मचारियों के लिए लागू की गई ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) को पसंद करते हैं। गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनने पर इन योजनाओं को वहां भी लागू किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इसे गहलोत के प्रति राहुल के समर्थन की तरह देखा जा रहा है। सचिन पायलट की चुप्पी मोदी और राहुल की तारीफ के बाद ही टूटी है।

ये भी पढ़ें

खाचरियावास को नहीं मिला किसी मंत्री का साथ:राजस्थान सरकार में बहुत से मंत्री भर रहे IAS अफसरों की एसीआर

आईएएस अफसरों की एसीआर (एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट) भरने का अधिकार मंत्रियों को देने की मांग उठाने वाले खाद्य व रसद मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास अकेले पड़ते जा रहे हैं। असल में खाचरियावास को किसी और मंत्री का साथ नहीं मिला है। (पूरी खबर पढ़ें)