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मंत्रियों के साथ विवादों में आए IAS का होगा प्रमोशन:खाचरियावास के निशाने पर आए पेडनेकर बनेंगे प्रमुख सचिव; बीकानेर कलेक्टर बनेंगे सेक्रेटरी

जयपुर6 दिन पहले

राजस्थान कैडर के 250 IAS अफसरों में से 50 आईएएस अफसरों को अगले महीने प्रमोशन मिलेगा। खास बात यह है कि इस लिस्ट में उन 3 अफसरों के नाम भी शामिल हैं, जो पिछले दिनों मंत्रियों के साथ हुए विवादों के कारण सुर्खियों में रहे। यह तीनों अफसर हैं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख शासन सचिव संदीप वर्मा, ऊर्जा विभाग के सचिव आशुतोष पेडनेकर और बीकानेर कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल।

सीएम अशोक गहलोत के सबसे पसंदीदा अफसरों में शामिल कुलदीप रांका और अखिल अरोड़ा का प्रमोशन होना भी लगभग तय है। अरोड़ा की पत्नी अपर्णा अरोड़ा भी आईएएस हैं। संयोग है कि पति-पत्नी दोनों को एक साथ प्रमोशन मिलेगा।

यूं तो राजस्थान की ऐसे राज्यों में गिनती होती है, जो प्रमोशन की इस प्रक्रिया को तय समय पर बिना किसी विवाद के हर साल पूरी कर लेता है। लेकिन इस बार यह देखने वाली बात होगी कि जिन अफसरों को लेकर विवाद हुआ उनके प्रमोशन पर कोई आंच आती है या नहीं।

इनका हुआ विवाद
हाल ही में राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी और तीन मंत्रियों के बीच विवाद की जो स्थितियां बनीं वे प्रदेश ही नहीं देश भर में चर्चित रहीं। शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला के साथ IAS संदीप वर्मा (प्रमुख शासन सचिव, आईटी), फूड सप्लाई मिनिस्टर प्रताप सिंह खाचरियावास के साथ आशुतोष पेडनेकर (शासन सचिव, ऊर्जा विभाग) और पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा के साथ भगवती प्रसाद कलाल (बीकानेर जिला कलेक्टर) का विवाद इन दिनों में सुर्खियों में रहा।

पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा और IAS अफसर भगवती प्रसाद कलाल के मामले में तो प्रदेश के IAS एसोसिएशन ने मोर्चा खोला हुआ है। एसोसिएशन को IPS और IFS एसोसिएशन ने भी अपना समर्थन दिया है। एसोसिएशन ने सीएस उषा शर्मा को अल्टीमेटम दिया है कि अगर मंत्री मीणा के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तो प्रदेश में आईएएस अफसरों का काम करना ही असंभव हो जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि इन सब विवादों के बावजूद राज्य सरकार संदीप वर्मा, आशुतोष पेडणेकर और कलाल को प्रमोट करने वाली है। ऐसा होने पर आईएएस अफसरों में सरकार का एक मैसेज जाएगा कि मंत्रियों के साथ विवाद होने के बावजूद उनके सर्विस रिकॉर्ड को खराब नहीं किया गया है। मंत्री खाचरियावास ने तो मंत्री के विभागों में काम करने वाले आईएएस अफसरों की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) भरने का अधिकार देने की मांग मुख्यमंत्री से की थी। यह मुद्दा भी पिछले दिनों हॉट टॉपिक रहा था।

पति-पत्नी एक साथ होंगे प्रमोट
अखिल अरोड़ा और उनकी पत्नी दोनों वर्ष 1993 बैच के अफसर हैं। दोनों ही अभी प्रमुख शासन सचिव हैं। अब वे प्रमोट होकर अतिरिक्त मुख्य सचिव बनेंगे। अखिल अरोड़ा और अपर्णा दोनों इस स्केल में 7 वर्ष तक सेवारत रहेंगे। ऐसे में उनका अगला प्रमोशन चीफ सेक्रेटरी के रूप में संभव है। वे एक वर्ष बाद ही प्रदेश के टॉप-10 आईएएस में शामिल हो जाएंगे, तब उनका प्रमोशन चीफ सेक्रेटरी (मुख्य सचिव) के रूप में हो सकेगा।

ये बनेंगे अतिरिक्त मुख्य सचिव
प्रमुख शासन सचिव के रूप में फिलहाल कार्यरत अखिल अरोड़ा, अपर्णा अरोड़ा, आलोक, शिखर अग्रवाल और संदीप वर्मा प्रमोट होकर अतिरिक्त मुख्य सचिव बनेंगे। इनके प्रमोट होते ही अतिरिक्त मुख्य सचिव की संख्या राजस्थान में 12 से बढ़कर 17 हो जाएगी। ऐसा सूबे की ब्यूरोक्रेसी में बहुत कम बार रहा है कि अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अफसरों की संख्या 15 से ज्यादा हो।

ये बनेंगे प्रमुख शासन सचिव
भवानी सिंह देथा, देबाशीष पृष्टी, विकास सीतारामजी भाले, नवीन जैन, आशुतोष पेडनेकर, मुग्धा सिन्हा, मंजू राजपाल और केके पाठक अभी शासन सचिव के स्केल में कार्यरत हैं। वे अब प्रमोट होकर प्रमुख शासन सचिव बन जाएंगे।

करीब 30 अफसर और होंगे प्रमोट
अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक बुधवार को हो चुकी है। शेष पदों के लिए भी जल्द ही होगी। इन पदों में भी करीब 30 आईएएस अफसर और पदोन्नत होंगे। इनमें ज्यादातर 2003 से 2017 के बीच के सालों में चयनित होने वाले अफसर शामिल हैं।

प्रदेश में आईएएस का प्रमोशन इन पदों पर होता है
प्रदेश के कैडर में जब कोई आईएएस अफसर पहली नियुक्ति पर आता है, तो उसे डिप्टी सेक्रेटरी (उप सचिव) की रैंक मिलती है। इसके बाद जॉइंट सेक्रेटरी (संयुक्त सचिव), स्पेशल सेक्रेटरी (विशेष सचिव), सेक्रेटरी (सचिव), प्रिंसिपल सेक्रेटरी (प्रमुख शासन सचिव) और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (अतिरिक्त मुख्य सचिव) के पद पर प्रमोशन मिलता है। अतिरिक्त मुख्य सचिव जो अफसर होते हैं, उनमें से किसी एक को मुख्यमंत्री के स्तर पर चीफ सेक्रेटरी (मुख्य सचिव) बनाया जाता है। राज्य कैडर में आईएएस का यह सबसे शीर्ष पद होता है। अभी इस पद पर उषा शर्मा कार्यरत हैं।

मुख्य सचिव उषा शर्मा सहित विभिन्न अधिकारी सचिवालय में मीटिंग करते हुए। (फाइल फोटो)
मुख्य सचिव उषा शर्मा सहित विभिन्न अधिकारी सचिवालय में मीटिंग करते हुए। (फाइल फोटो)

अन्य कैडर में प्रमोशन को लेकर रहती है अनिश्चितता
राजस्थान में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस), राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) सहित 100 से ज्यादा ऐसी सेवाएं हैं, जिनका प्रमोशन तय समय पर नहीं होता है। इन सेवाओं में राजस्थान में करीब 50 हजार अफसर, डॉक्टर्स, प्रोफेसर्स, इंजीनियर्स कार्यरत हैं और करीब साढ़े छह लाख कर्मचारी भी। इन 7 लाख अफसरों-कर्मचारियों को कभी भी उनके लिए तय समय पर प्रमोशन नहीं मिलते हैं। उनके कई संगठन बने हुए हैं, जो जिला मुख्यालयों से लेकर सचिवालय के सामने राजधानी में धरने-प्रदर्शन करते हैं।

विधानसभा में सत्र चलने पर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन उनसे संबंधित प्रशासनिक कमेटियों की बैठक ही समय पर नहीं होती। यह भी विचित्र है कि उन सभी का प्रमोशन करने की जिम्मेदारी आईएएस अफसरों की ही होती है, फिर भी उनका प्रमोशन नहीं हो पाता। जबकि आईएएस अफसर अपने प्रमोशन को लेकर सचेत रहते हैं और सारी कार्रवाई तय समय से पहले ही पूरी कर लेते हैं।

उनका प्रमोशन ऑर्डर भी 31 दिसंबर की रात को जारी करते हैं। यह एक सुखद परंपरा बनी हुई है कि नए साल का स्वागत प्रमोशन के साथ होता है। आईएएस अफसर अपने साथ आईपीएस और आईएफएस अफसरों को भी प्रमोशन का तोहफा देते हैं, लेकिन राज्य सेवाओं के कर्मचारी प्रमोशन को लेकर सदा अनिश्चितता की स्थिति में बने रहते हैं।

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