पहले भी अफसरों को फटकारते रहे हैं मंत्री रमेश मीणा:पिछले 5 महीनों में टॉप 5 आईएएस अफसरों से हुआ मीणा का विवाद

जयपुर8 दिन पहलेलेखक: उपेंद्र शर्मा

पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा ने बीकानेर में एक कार्यक्रम में कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल को बाहर जाने को कहकर राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी को अपने विरोध में खड़ा कर लिया है। मंत्री मीणा का यह स्वभाव बन गया है या फिर वे प्रशासनिक अफसरों के बीच अपनी कोई खास छवि बनाना चाहते हैं, लेकिन यह सच है कि पिछले 5 महीने में मीणा 5 आला आईएएस अफसरों से उलझ चुके हैं। इन 5 अफसरों में दो तो अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के हैं।

असल में यही कारण है कि बीकानेर मामले के बाद ब्यूरोक्रेसी के सब्र का बांध टूट गया और पिछले 25 वर्षों में पहली बार आईएएस एसोसिएशन के बैनर तले 24 आईएएस अफसर एक साथ एकत्र होकर सीएस ऊषा शर्मा के पास गए और अपना विरोध दर्ज करवाया।

एसोसिएशन के सचिव डाॅ. समित शर्मा ने भास्कर को बताया कि छोटी-मोटे विवाद, तर्क-वितर्क, कही-सुनी ब्यूरोक्रेट और राजनेताओं में होती रही है, लेकिन यह घटना सभी को झकझोर गई। अब यह प्रकरण सीएस ऊषा शर्मा और सीएम अशोक गहलोत के ध्यान में है। हम उनके रेस्पांस का इंतजार कर रहे हैं। उधर, मंत्री रमेश मीणा ने भास्कर को बताया कि वे अभी झुन्झुनूं हैं। इस विषय में जयपुर आकर बात करेंगे।

मंत्री रमेश मीणा द्वारा बीकानेर के कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल को एक कार्यक्रम से बाहर जाने को कहने पर आईएएस एसोसिएशन ने कड़ा विरोध दर्ज करवाया है। सचिवालय में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्य सचिव को शिकायत दर्ज करवाई है।
मंत्री रमेश मीणा द्वारा बीकानेर के कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल को एक कार्यक्रम से बाहर जाने को कहने पर आईएएस एसोसिएशन ने कड़ा विरोध दर्ज करवाया है। सचिवालय में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्य सचिव को शिकायत दर्ज करवाई है।

मंत्री मीणा बनाम रविशंकर श्रीवास्तव

पंचायतीराज मंत्री मीणा को उनके विभाग के इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान के महानिदेशक रहे आईएएस रविशंकर श्रीवास्तव से लंबा विवाद चला। विवाद का कारण रही श्रीवास्तव की स्पष्टवादी छवि, जो मीणा को कभी रास नहीं आई।श्रीवास्तव राज्य की ब्यूरोक्रेसी में सीएस ऊषा शर्मा के बाद सबसे सीनियर आईएएस थे। विवाद इस कदर बढ़ा कि मीणा ने आखिरकार उनका तबादला करवा दिया।

श्रीवास्तव अपने तबादले के खिलाफ कैट (प्राधिकरण) गए और उन्होंने स्टे हासिल किया। उनका तबादला सरकार को निरस्त करना पड़ा। इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान एक स्वायत्तशाषी संस्था है। ऐसे में वहां मंत्री का दखल नहीं होता है। किसी आईएएस अफसर द्वारा यह कदम उठाया जाना भी पिछले दो दशक में पहली बार हुआ। हाल ही अगस्त-2022 में श्रीवास्तव आईएएस सेवा से रिटायर हुए हैं।

वाहन को लेकर मीणा की तकरार हुई अपर्णा अरोड़ा से

आईएएस अपर्णा अरोड़ा राजस्थान की गिनी-चुनी ईमानदार और गैर विवादित अफसरों में शामिल हैं। वे हाल ही पंचायत राज विभाग में प्रमुख सचिव थीं, तो उनका मंत्री मीणा से एक लग्जरी वाहन को लेकर विवाद हो गया। मीणा चाहते थे, वो वाहन उन्हें मिले। यह वाहन राज्य मोटर गैराज और एडमिनिस्ट्रेशन पूल के सबसे महंगे 10 वाहनों में शामिल हैं।

आईएएस अपर्णा का तर्क था कि वाहन पंचायत राज संस्थान के महानिदेशक के लिए आरक्षित है, तो मंत्री को कैसे दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच विवाद बढ़ता देख अपर्णा का सीएम ने तबादला ही कर दिया। अपर्णा वहां बमुश्किल साल भर ही रह सकीं। अब वे राजस्व विभाग में हैं।

मीणा के गनमैन को मिला लग्जरी वाहन चैयरमेन अभय कुमार को नहीं

पंचायतीराज में हाल ही अक्टूबर-2022 में ट्रांसफर होकर आए अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार इंदिरा गांधी पंचायत राज संस्थान के चैयरमेन भी हैं। अभय कुमार राजस्थान के 10 सबसे सीनियर आईएएस अफसरों में से हैं। नए पद से जुड़े नियमों के अनुसार संबंधित लग्जरी वाहन (जिसका विवाद अपर्णा अरोड़ा से हुआ था) कुमार के पास होना चाहिए, लेकिन यह वाहन अभी मंत्री मीणा के पास है।

आईएएस की गाड़ी मंत्री को देने के लिए चलाई गई नोटशीट
आईएएस की गाड़ी मंत्री को देने के लिए चलाई गई नोटशीट

मंत्री मीणा के सामने सरकार की लाचारी भी अजीब है। मीणा ने ग्रामीण क्षेत्र में खुद की सुरक्षा की जरूरत बताकर एक नोटशीट चलवाई। इस आधार पर चार गनमैन और कार्यकर्ताओं को बिठाने के नाम पर चैयरमेन के लिए आवंटित वाहन को मंत्री मीणा को सौंप दिया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव रैंक के आईएएस अफसर अभय कुमार अपने पुराने वाहन से ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं।

अलवर कलक्टर से भी उलझे मंत्री मीणा

अलवर में बीते सप्ताह मंत्री मीणा अलवर में एक कार्यक्रम में गए थे। अपने नवाचारों एक अलग छवि रखने वाले वहां के कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी एक सरकारी कार्य में पेशी पर हाजिर होने दिल्ली गए हुए थे। ऐसे में वे कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाए। मंत्री मीणा ने मौके पर ही कह दिया कि कलक्टर क्यों नहीं आए और इस मामले को दिखवाएंगे कि वे जान बूझकर नहीं आए या वास्तव में कोई काम था। मीडिया में मंत्री मीणा का यह विवाद सुर्खियां बन गया। कलक्टर डॉ. सोनी को अपनी सफाई देनी पड़ी कि वे पेशी पर दिल्ली गए हुए थे, जो बहुत जरूरी काम था।

अब बीकानेर कलक्टर को किया कार्यक्रम से बाहर निकाला

बीकानेर में सोमवार को मीणा जब पंचायतीराज विभाग के एक कार्यक्रम में मंच से बोल रहे थे, तब वहां के कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल भी मौजूद थे। उसी दौरान कलाल के फोन पर ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी का फोन आया, जिसे उन्होंने कार्यक्रम की गंभीरता समझते हुए बहुत धीमे आवाज में रिसीव किया, लेकिन मंत्री मीणा इस बात से इतना नाराज हुए कि कलक्टर कलाल को कार्यक्रम से चले जाने को कह दिया। कलक्टर को अपने ही जिले में अपने ही मातहत अफसरों-कर्मचारियों के बीच अपमानित होना पड़ा।

सरपंचों ने मंत्री मीणा के खिलाफ पंचायतें रखी थीं बंद, जयपुर में दिया था धरना

तीन-चार महीने पहले मंत्री मीणा ने नागौर में सरपंचों द्वारा करोड़ों रुपयों का घोटाला करने संबंधी एक बयान दे दिया। इस बयान के बाद प्रदेश के सरपंचों ने जयपुर में मीणा के खिलाफ धरना दिया और राज्य सरकार से उन्हें मंत्री पद से हटाने की मांग भी की। सरपंचों ने उस दौरान पूरे राजस्थान में पंचायत कार्यालयों को एक दिन के लिए बंद भी रखा।

मजबूत मंत्री माने जाते हैं रमेश मीणा

59 वर्षीय मंत्री मीणा का भले ही अफसरों से विवाद रहा हो, लेकिन अपने समर्थकों और क्षेत्रीय लोगों के बीच उन्हें एक मजबूत राजनेता माना जाता है। वे लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं। सपोटरा (करौली) से उन्हें इस बार कांग्रेस के टिकट पर जीत मिली है। वर्ष 1993 और 1998 में जब उन्होंने विधायक के चुनाव लड़े तो लगातार 2 बार हार का मुंह देखना पड़ा। आखिरकार वर्ष 2008 में वे बसपा के टिकट पर पहली बार विधायक बने।

वर्ष 2013 और 2018 के चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जीत हासिल की। वर्ष 2018 में उन्होंने राजस्थान के दिग्गज राजनेता डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की पत्नी पूर्व मंत्री गोलमा देवी मीणा को हराया था। डॉ. किरोड़ी ने बीकानेर कलक्टर के मामले में मंत्री रमेश मीणा को पद से हटाने की मांग की है।

गहलोत गुट से पायलट गुट में आए और मंत्री बने मीणा

रमेश मीणा जब 2008 में बसपा से चुने गए थे, तब उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपना समर्थन दिया था। वे गहलोत के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। 2013 से 2018 के बीच बदली परिस्थितयों में वे तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के नजदीक आए। 2018 में जब वे जीते तो मंत्री बनाए गए। लेकिन जुलाई 2020 में सचिन पायलट के साथ मानेसर जाने के बाद बदले घटनाक्रम में उन्हें भी पायलट के साथ मंत्री पद से हटा दिया गया। बाद में नवंबर 2021 में फिर से मंत्री बनाए गए।

राजनीतिक हलकों में आईएएस एसोसिएशन के विरोध को लेकर हो रही हैं गुटबाजी की चर्चाएं

राजस्थान में आम तौर पर कभी भी आईएएस एसोसिएशन किसी मंत्री से विवाद होने पर इस तरह से रिएक्ट नहीं करती है, जैसा इस बार हुआ है। राजनीतिक और ब्यूरोक्रेसी के हलकों में इसे लेकर गुटबाजी की चर्चाएं हो रही हैं। चूंकि मंत्री रमेश मीणा सचिन पायलट गुट के हैं तो सीएम गहलोत को खुश करने के लिए कुछ आईएएस अफसर भी इस प्रकरण को हवा दे रहे हैं।

राजस्थान में पिछले छह महीनों में ही खेल राज्य मंत्री अशोक चांदना द्वारा सीएम गहलोत के प्रमुख शासन सचिव कुलदीप रांका के पास ही सारी शक्तियां होने का आरोप लगाया गया। हाल ही मंत्री प्रताप सिहं खाचरियावास ने एक आईएएस अफसर द्वारा 46 लाख मैट्रिक टन गैंहू लैप्स कर देने की बात कह कर आईएएस अफसरों की एसीआर भरने का अधिकार मांगा तब भी एसोसिएशन की ओर से कोई विरोध दर्ज नहीं करवाया गया।

मंत्री बी. डी. कल्ला से सुधीर ‌वर्मा, मंत्री महेश जोशी से सुधांश पंत का विवाद हुआ था, तब भी एसोसिएशन ने कोई विरोध नहीं किया था।

राजस्थान में दो बार नेताओं ने जड़ी थी आईएएस-आईपीएस अफसरों को थप्पड़

राजस्थान में एक बार भैंरोंसिंह शेखावत के सीएम रहते (1990-98) पूर्व सिंचाई मंत्री देवी सिंह भाटी ने तत्कालीन आईएएस अफसर पी. के. देब को थप्पड़ मार दी थी। हालांकि इस मामले के बाद सीएम शेखावत ने भाटी को मंत्री पद से हटा दिया था।

इसके बाद सीएम गहलोत के पहले कार्यकाल (1998-2003) के बीच केकड़ी (अजमेर) से विधायक रहे बाबूलाल सिंगारिया ने तत्कालीन एसपी आलोक त्रिपाठी को थप्पड़ मार दी थी। तब वर्तमान मुख्य सचिव ऊषा शर्मा ही अजमेर की कलेक्टर थीं। त्रिपाठी राजस्थान काडर से रिटायर हो चुके हैं।