दिसंबर में फिर गर्माएगी राजस्थान की सियासत:CM कुर्सी के लिए पॉलिटिकल ड्रामा फिर संभव,  भारत जोड़ो से टकराएगी बीजेपी की रथ यात्रा

जयपुर7 दिन पहलेलेखक: निखिल शर्मा

सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर एक मंच पर साथ दिखाई दिए। भले ही ये राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तैयारियों के लिए हुई कांग्रेस की कॉर्डिनेशन कमिटी की बैठक का मौका था, लेकिन ये तस्वीर दिसंबर में बदल सकती है।

साल 2022 के इस अंतिम महीने में राजस्थान का मौसम भले ही ठंडा होगा, मगर राजनीतिक पारा गर्म होने वाला है। देशभर की नजरें गुजरात और हिमाचल चुनाव के नतीजों पर होंगी। लेकिन राजस्थान में फिर से बड़ा पॉलिटिकल ड्रामा होने की संभावनाएं फिर से जन्म ले रही हैं। चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों के लिए दिसंबर का महीना बड़ी उथल-पुथल की ओर इशारा कर रहा है।

25 सितम्बर के घटनाक्रम के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट में दूरियां और बढ़ गई हैं।
25 सितम्बर के घटनाक्रम के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट में दूरियां और बढ़ गई हैं।

आखिर दिसंबर में क्या होने वाला है? राजस्थान की राजनीति में क्या बदलाव होंगे, जो देश की सुर्खियां बन सकते हैं। ये सब समझने के लिए सबसे पहले तो राजस्थान में अगले महीने होने वाले पॉलिटिकल इवेंट को जानना जरूरी है। ये इवेंट महज कार्यक्रम नहीं होंगे बल्कि प्रदेश की सियासत को नई दिशा दे सकते हैं।

यात्रा की एंट्री के साथ चढ़ेगा राजनीतिक पारा
राजस्थान में सियासी गर्मी तब बढ़ने लगेगी जब दिसंबर के पहले ही सप्ताह में राहुल गांधी की यात्रा झालारापाटन (झालावाड़) से राजस्थान में एंट्री लेगी। सियासी संकट के बीच यह यात्रा राजस्थान से सफलतापूर्वक निकलना किसी चैलेंज से कम नहीं होगा। खासतौर से तब जब यह यात्रा गुर्जर और मीणा बाहुल्य इलाकों से गुजरेगी। इन इलाके में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का दबदबा है। पायलट को सीएम नहीं बनाए जाने की टीस यहां के लोगों में भी है। ऐसे में यात्रा के दौरान यह संभव है कि सचिन पायलट के समर्थन में माहौल नजर आए।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान के 6 जिलों से होकर निकलेगी। ये जिले राजस्थान के कई बड़े नेताओं के दबदबे वाले जिले हैं।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान के 6 जिलों से होकर निकलेगी। ये जिले राजस्थान के कई बड़े नेताओं के दबदबे वाले जिले हैं।

इन बातों का इशारा अभी से मिलना शुरू हो गया है। यात्रा के राजस्थान पहुंचने से पहले चेतावनियों और धमकियों का दौर शुरू हो चुका है। अगर इस वजह से यात्रा के दौरान जरा भी माहौल बिगड़ता है तो यह पायलट को बैकफुट पर भी धकेल सकता है। क्योंकि अभी तक राहुल गांधी की यात्रा सभी राज्यों से बिना किसी विवाद के होकर गुजरी है।

सरकार के 4 साल और बीजेपी का आंदोलन
भारत जोड़ो यात्रा के प्रदेश में रहने के दौरान ही कांग्रेस सरकार अपने 4 साल पूरे कर रही है। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार के पास अपने काम गिनाने और वाहवाही लूटने का अंतिम मौका है। इसी को देखते हुए राजस्थान सरकार इसकी पूरी तैयारी में जुटी है।

मगर इसी बीच बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने की तैयारी कर ली है। बीजेपी इसे गहलोत सरकार के 4 साल को विफलता गिनाने के सबसे अहम मौके के रूप में देख रही है। हाल ही में राजस्थान बीजेपी की वर्किंग कमेटी की बैठक में भी जोरदार आंदोलन की रूपरेखा तैयार हो चुकी है।

सरकार के 4 साल पर बीजेपी अपने आंदोलन में कांग्रेस सरकार को इतिहास की सबसे खराब सरकार दिखाने की तैयारी में है।
सरकार के 4 साल पर बीजेपी अपने आंदोलन में कांग्रेस सरकार को इतिहास की सबसे खराब सरकार दिखाने की तैयारी में है।

भारत जोड़ो यात्रा के बीच बीजेपी की रथ यात्रा
राजस्थान का सियासी पारा तब और बढ़ेगा जब कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा और बीजेपी की रथ यात्रा टकराएगी। फिलहाल माना जा रहा है कि 3 से 20 दिसंबर के बीच राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में रहेगी। मगर इसी दौरान बीजेपी प्रदेशभर की विधानसभा सीटों में अपनी रथयात्रा निकालेगी।

बीजेपी पूरे प्रदेश में रथयात्रा के जरिए यह माहौल बनाने की कोशिश करेगी कि कांग्रेस की सबसे खराब और कमजोर सरकार है। इसके लिए बीजेपी कांग्रेस सरकार में बड़े अपराध, लगातार पेपर लीक प्रकरण, भर्तियां रद्द होने और सियासी संकट को मुद्दा बनाएगी।

ये तो थे वो बड़े राजनीतिक घटनाक्रम जो दिसंबर में राजस्थान में होने हैं। मगर इन घटनाक्रमों से भी ज्यादा जरूरी इनका असर राजस्थान की सियासत की नई दिशा तय करेगा।

सीएम के विवाद के चलते अबतक कांग्रेस में संगठन विस्तार भी नहीं हो सका है। नए जिलाध्यक्ष भी नियुक्त नहीं हुए हैं।
सीएम के विवाद के चलते अबतक कांग्रेस में संगठन विस्तार भी नहीं हो सका है। नए जिलाध्यक्ष भी नियुक्त नहीं हुए हैं।

गहलोत बने रहेंगे या पायलट आएंगे?
दिसंबर में ही राजस्थान में सीएम की कुर्सी को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। गुजरात चुनाव 5 दिसंबर को पूरा हो जाएगा, वहीं 8 दिसंबर को इसका रिजल्ट भी आ जाएगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि इसके बाद राजस्थान के सीएम को लेकर चल रही अटकलें भी दूर हो जाएंगी। अशोक गहलोत बने रहेंगे या सचिन पायलट सीएम की ताजपोशी होगी, ये फैसला भी यात्रा के दौरान कर लिया जाएगा। इसी के साथ पीसीसी चीफ और राजस्थान में कांग्रेस की रणनीति पर भी स्थितियां साफ हो जाएंगी।

अगर CM बदला तो क्या होगा असर?
बीते 25 सितंबर को राजस्थान में जो पॉलिटिकल ड्रामा हुआ उसने कांग्रेस आलाकमान ने भी देखा। ऐसे में सीएम की कुर्सी को लेकर जो भी निर्णय कांग्रेस करेगी, उसका असर भी दिसंबर में देखने को मिल जाएगा। कुछ लोगों का दावा है कि कांग्रेस गहलोत को हटाती है तो सरकार गिरने की पूरी संभावना है। वहीं अगर पायलट को सीएम नहीं बनाया जाता है तो 2023 में हार और राजस्थान में कांग्रेस के बिखरने का खतरा है।

भारत जोड़ो यात्रा के रूट में राजस्थान एकमात्र कांग्रेस शासित राज्य है।
भारत जोड़ो यात्रा के रूट में राजस्थान एकमात्र कांग्रेस शासित राज्य है।

क्या धारीवाल, राठौड़ और जोशी पर होगी कार्रवाई?
कांग्रेस नेता और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गुजरात चुनाव के ठीक बाद 25 सितंबर को प्रेशर पॉलिटिक्स के घटनाक्रम में अनुशासनहीनता के दोषी पाए जाने वाले तीनों नेता शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ पर भी कार्रवाई होगी। सूत्रों के मुताबिक यह तय है कि हाईकमान इन पर कार्रवाई करेगा। हालांकि कार्रवाई किस स्तर की होती है ये देखने वाली बात होगी।

कांग्रेस के फैसले से बीजेपी तय करेगी रणनीति
राजस्थान में बीजेपी भी कांग्रेस का चेहरा तय होने के इंतजार में है। कांग्रेस के निर्णय के आधार पर बीजेपी भी अपनी रणनीति और अप्रोच तय करेगी। मान जा रहा है कि अगर कांग्रेस पायलट को आगे करती है तो बीजेपी अपनी वर्तमान रणनीति को बदल सकती है।

बीजेपी में भी लगातार गुटबाजी सामने आई है। ऐसे में बीजेपी हाईकमान ने सरकार के खिलाफ आंदोलन में सभी नेताओं को एकजुट रहने को कहा है।
बीजेपी में भी लगातार गुटबाजी सामने आई है। ऐसे में बीजेपी हाईकमान ने सरकार के खिलाफ आंदोलन में सभी नेताओं को एकजुट रहने को कहा है।

पूनिया के 4 साल और बीजेपी में यूनिटी का होगा रियलिटी चेक
दिसंबर का महीना राजस्थान बीजेपी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। दिसंबर में ही वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का कार्यकाल अधिकारिक रूप से पूरा हो रहा है। ऐसे में इस पर भी निर्णय दिसंबर में हो सकता है। इसके अलावा सरकार के 4 साल के खिलाफ होने वाले आंदोलन में बीजेपी के नेता कितनी एकजुटता से काम करते हैं, इसपर भी बीजेपी की नजर है। ऐसे में 17 दिसंबर तक पूरे आंदोलन में नेताओं की वर्किंग के आधार पर बीजेपी भी अपना निर्णय करेगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिसंबर में जो निर्णय दोनों पार्टियों की ओर से लिए जाएंगे वो राजस्थान की सियासत की दिशा में बड़े मील के पत्थर साबित हो सकते हैं। हालांकि ये निर्णय किसके लिए फायदेमंद और किसके लिए नुकसानदायक साबित होंगे ये 2023 का चुनाव बताएगा।

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