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राजस्थान के IAS अधिकारियों की काम बंद करने की धमकी:मंत्री रमेश मीणा के खिलाफ मोर्चा खोला; मुख्य सचिव से कहा- काम करना असंभव

7 दिन पहले

पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा के बीकानेर कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल को कार्यक्रम के बीच में फोन उठाने पर फटकारने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। ऐसा पहली बार है कि आईएएस एसोसिएशन किसी मंत्री से विवाद होने पर इस तरह से लामबंद हुई है।

एसोसिएशन ने दूसरी बार मुख्य सचिव ऊषा शर्मा से मुलाकात कर सीएम अशोक गहलोत से मंत्री मीणा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। एसोसिएशन ने शर्मा से कहा कि ऐसे माहौल में काम करना असंभव है।

राजस्थान के राजनीतिक और ब्यूरोक्रेसी के इतिहास में यह पहली घटना है जब आईएएस अफसरों ने इस तरह का अल्टीमेटम दिया है। आईपीएस और आईएफएस एसोसिएशन भी समर्थन में उतर आई हैं। दोनों एसोसिएशन ने भी मंत्री रमेश मीणा के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के लिए मुख्य सचिव को लेटर लिखा है।

एसोसिएशन के सचिव डॉ. समित शर्मा ने भास्कर को बताया कि अगर एक-दो दिनों में इस मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो अफसरों में रोष और बढ़ेगा।

क्या किसी खास टारगेट को लेकर एसोसिएशन आई हरकत में?
राजस्थान में आम तौर पर कभी भी आईएएस एसोसिएशन किसी मंत्री से विवाद होने पर इस तरह से रिएक्ट नहीं करती है, जैसा इस बार हुआ है। राजनीतिक और ब्यूरोक्रेसी में इस विवाद को लेकर गुटबाजी की चर्चाएं हो रही हैं।

चूंकि मंत्री रमेश मीणा सचिन पायलट गुट के हैं तो माना जा रहा है कि सीएम गहलोत को खुश करने के लिए कुछ आईएएस अफसर भी इस प्रकरण को हवा दे रहे हैं। बीते करीब छह महीने में रमेश मीणा ऐसे पांचवे मंत्री है जिनका किसी आईएएस के साथ विवाद सामने आया है।

हालांकि, पहले के मामलों में आईएएस एसोसिएशन ने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई या माफी की मांग नहीं की थी। इन मंत्रियों में अशोक चांदना, प्रताप सिंह खाचरियावास, बीडी कल्ला, महेश जोशी शामिल हैं।

राजस्थान अन्य प्रशासनिक सेवा परिषद ने डिविजनल कमिश्नर नीरज के. पवन को ज्ञापन देकर मंत्री के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की है।
राजस्थान अन्य प्रशासनिक सेवा परिषद ने डिविजनल कमिश्नर नीरज के. पवन को ज्ञापन देकर मंत्री के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की है।

पिछले 30 सालों में नहीं हुई कभी मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
मंत्री मीणा के मामले को आईएएस एसोसिएशन बहुत सख्त और आक्रामक ढंग से उठा तो रही है, लेकिन राजस्थान में पिछले 7 दशक के इतिहास में केवल एक बार ही मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई थी, जब उनसे मंत्री पद छीन लिया गया था। यह मामला 1995-96 का है जब भैंरोंसिंह शेखावत सीएम थे।

तब सिंचाई मंत्री देवी सिंह भाटी ने आईएएस अफसर पी. के. देव के थप्पड़ मार दिया था। इसके अतिरिक्त राजस्थान गठन के बाद से अब तक किसी आईएएस-आईपीएस से विवाद के चलते किसी मंत्री को हटाया नहीं गया है। एक पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त ने भास्कर को बताया कि मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्या होगी।

सीएम उन्हें माफी मांगने को कह सकते हैं, लेकिन ऐसा भी कोई वाकया कभी सामने नहीं आया है। मंत्री मीणा खेद जरूर जता सकते हैं, लेकिन इसकी भी संभावना कम ही है।

कुलदीप रांका से मांग
आईएएस एसोसिएशन ने सीएमओ में प्रमुख सचिव कुलदीप रांका इस मामले में मदद मांगी है। एसोसिएशन को रांका ने सीएम गहलोत के सामने इस मामले को पेश कर जल्द ही कोई उचित हल निकालने का आश्वासन दिया है। राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में आम तौर पर आईएएस अफसरों के हर मसले की पैरवी मुख्य सचिव ही करते हैं। उनका असली बॉस मुख्य सचिव ही होता है। लेकिन इस बार आईएएस एसोसिएशन सीधे खुद ही सीएम गहलोत से मिलना चाह रही है।

आईपीएस और आईएफएस एसोसिएशन ने मुख्य सचिव उषा शर्मा को पत्र लिखकर विरोध जताया है।
आईपीएस और आईएफएस एसोसिएशन ने मुख्य सचिव उषा शर्मा को पत्र लिखकर विरोध जताया है।

सोमवार को जब आईएएस एसोसिएशन के 24 अफसर सीएस उषा शर्मा से मिले थे तो शर्मा ने उन्हें सीएम गहलोत के जयपुर आने तक इंतजार करने को कहा था। इसके बावजूद एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को फिर से सीएस शर्मा से मुलाकात की।

क्या है मामला?
पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा ने बीकानेर में सोमवार को हुए एक कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल को हॉल से बाहर निकाल दिया था। दरअसल, मीणा मंच से भाषण दे रहे थे। उस वक्त कलक्टर मोबाइल फोन पर बात कर रहे थे। मीणा इससे नाराज हो गए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि आप यहां से जाइये। तब कलक्टर बाहर चले गए। बाद में लोगों के बुलाने पर वापस आ गए।

जब सरकार और ब्यूरोक्रेसी आमने-सामने हो गईं

ब्यूरोक्रेसी और सरकार के बीच लगातार टकराव बढ़ता जा रहा है। बीते दिनों आईएएस अधिकारियों की एसीआर रिपोर्ट भरने को लेकर भी मंत्री खाचरियावास ने मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री को आईएएस की एसीआर रिपोर्ट भरने का अधिकार भी मंत्री को देना चाहिए। हालांकि, टकराव की ये पहली या दूसरी घटना नहीं है। इससे पहले भी आईएएस अधिकारियों के साथ व्यवहार को लेकर आमने सामने की स्थिति देखने को मिली है।

चांदना ने भी जताई थी नाराजगी
राजस्थान के खेल मंत्री भी ब्यूरोक्रेसी के हावी होने की शिकायत करते हुए इस्तीफा देने की धमकी दी थी। करीब छह महीने पहले उन्होंने नाराजगी भरा ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव की उनकी विभाग में दखलादांजी को लेकर नाराजगी जताई थी। हालांकि, मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद चांदना के सुर बदल गए थे।

विधायक ने मारा था SP को थप्पड़

सीएम गहलोत के पहले कार्यकाल (1998-2003) के बीच केकड़ी (अजमेर) से विधायक रहे बाबूलाल सिंगारिया ने तत्कालीन जिला एसपी आलोक त्रिपाठी के थप्पड़ मार दिया था। विधायक सिंगारिया के खिलाफ तब कोई कार्र‌वाई नहीं हुई थी। वर्तमान मुख्य सचिव ऊषा शर्मा ही अजमेर की कलक्टर थीं। त्रिपाठी राजस्थान काडर से रिटायर हो चुके हैं।

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सबसे पहले राजस्थान की राजनीति में 90 के दशक में चर्चा में रहने वाला एक बयान पढ़िए......

भैरोंसिंह शेखावत की सरकार में उप मुख्यमंत्री रहते हरिशंकर भाभड़ा ने कहा था....'ब्यूरोक्रेसी एक बेलगाम घोड़ा है, जिसको सही चलाना उसके सवार पर डिपेंड करता है।'

मतलब ये है कि सवार अच्छा होगा, तो ब्यूरोक्रेसी अपने आप अच्छी चलेगी। सवार ढीला होगा, तो ब्यूरोक्रेसी मनमाने तरीके से चलेगी। (पूरी खबर पढ़ें)

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