प्राइवेट फर्म से पुरस्कार पाने की कोशिश में सरकार:IAS अफसरों को कहा-अचीवमेन्ट्स का रिकॉर्ड बनाकर एप्लाई करो

2 महीने पहले

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और सीएम अशोक गहलोत को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का धुर विरोधी माना जाता है। गहलोत मोदी या राजे की आलोचना करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं, लेकिन इन दिनों उनकी सरकार एक ऐसी कन्सल्टेंसी प्राइवेट फर्म से अपने काम और उपलब्धियों के लिए पुरस्कार पाना चाहती है, जो प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व सीएम राजे की तारीफों के पुल बांध चुकी है।

मोदी और राजे के शासन करने, सरकार चलाने, वित्त प्रबंधन आदि पर इस फर्म के फाउंडर द्वारा किताबें भी लिखी गई हैं। यह फर्म है लेखक समीर कोचर की। यह एक प्राइवेट संस्था है, जो S-KOCH (समीर कोचर के नाम की शॉर्ट फॉर्म) नाम से देश के विभिन्न सरकारी विभागों को उनकी उपलब्धियों के लिए अवॉर्ड देती है।

सचिवालय में आईएएस अफसरों में इन दिनों एक प्राइवेट फर्म से मिलने वाले अवार्ड के बारे में हो रही हैं खास चर्चाएं
सचिवालय में आईएएस अफसरों में इन दिनों एक प्राइवेट फर्म से मिलने वाले अवार्ड के बारे में हो रही हैं खास चर्चाएं

इस प्राइवेट फर्म से अवार्ड पाने के लिए राजस्थान सरकार के आयोजना विभाग ने हाल ही सभी आईएएस अफसरों को लेटर भेजा है। विभागों की उपलब्धियों का ब्यौरा बनाकर इस अवार्ड में एन्ट्री भेजने को कहा गया है। पत्र में इस काम को पहली प्राथमिकता में रखने को कहा गया है और अवार्ड में एन्ट्री भेजने की आखिरी तारीख 30 नवंबर बताई गई है। यह लेटर आयोजना विभाग के प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा द्वारा भेजा गया है।

यह है वो पत्र जो प्रमुख आयोजना सचिव भवानी सिंह देथा ने आईएएस अफसरों को भेजा है।
यह है वो पत्र जो प्रमुख आयोजना सचिव भवानी सिंह देथा ने आईएएस अफसरों को भेजा है।

सीएस शर्मा ने मीटिंग ली, फिर से लेंगी मीटिंग

मुख्य सचिव ऊषा शर्मा इस अवार्ड के विषय में एक बार मीटिंग ले चुकी हैं। वे जल्द ही विभागों से आए प्रस्तावों को देखेंगी और फिर एक बार इस विषय में मीटिंग लेंगी। अवार्ड के लिए एप्लाई करने की आखरी तारीख पहले 15 नवंबर थी। बाद में इसे बढ़ाकर 30 नवंबर कर दिया गया। इस पर प्रमुख आयोजना सचिव देथा ने फिर से एक पत्र सभी अफसरों को भेज कर बताया कि तारीख अब 30 नवंबर तक बढ़ गई है। जिन्होंने एप्लाई नहीं किया है, वे जल्द करें।

सरकारी अवार्ड की होती है अलग गरिमा, पाने वाले अफसर होते हैं गौरवान्वित

पूर्व में राष्ट्रीय स्तर पर केन्द्र सरकार से ई-गवर्नेन्स का अवार्ड पा चुके एक आईएएस अफसर ने भास्कर को बताया कि सरकारी विभाग केन्द्र व राज्य सरकार की विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं का संचालन करते हैं। उनका उद्देश्य मूल रूप से जनता की सेवा करना होता है। उन्हें केन्द्र सरकार व राज्य सरकार विभिन्न मंचों पर पुरस्कृत करती है। प्राइवेट पुरस्कार सरकारी विभागों के लिए उचित नहीं कहे जा सकते।

राजस्थान में नीलकमल दरबारी, वीनू गुप्ता, संजय मल्होत्रा, अखिल अरोड़ा, डॉ. समित शर्मा, अजिताभ शर्मा, डॉ. आरूषि मलिक, मंजू राजपाल, राजेश यादव, नीरज के. पवन, मुक्तानंद अग्रवाल, आनंधी, कुमार पाल गौतम, गौरव गोयल, रोहित गुप्ता, सिद्धार्थ महाजन, आरती डोगरा, नवीन जैन, जितेन्द्र कुमार सोनी, अंकित कुमार सिंह सहित बहुत से आईएएस अफसर हैं, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री के स्तर पर विभिन्न पुरस्कार मिल चुके हैं।

राजस्थान सरकार में आरपीएससी, पंचायती राज, चिकित्सा विभाग, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग, उद्योग विभाग, परिवहन विभाग सहित विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं को भी सरकारी स्तर पर स्थापित अवार्ड मिल चुके हैं। चर्चा का विषय यह है कि प्राइवेट फर्म उनका मूल्यांकन कैसे कर सकती है। ऐसे में किसी प्राइवेट अवार्ड के लिए राज्य सरकार द्वारा पत्र आखिर क्यों जारी किया गया है। यह राज्य की ब्यूरोक्रेसी को चौंका रहा है।

फीस के बारे में छाई है चुप्पी

आम तौर पर इस तरह की प्राइवेट फर्म जब कोई अवार्ड सरकारी विभागों, मंत्रियों, अफसरों को देती हैं, तो उसके लिए बड़ी रकम बतौर एंट्री फीस भी ली जाती है। फिलहाल इस अवार्ड में क्या फीस होगी या नहीं, इस विषय में सचिवालय के कोई भी आला अफसर बताने को तैयार नहीं।

कौन हैं कोचर और क्या है यह अवार्ड

कोचर राजनीति, अर्थशास्त्र और सरकार चलाने के तरीकों पर विशेष पकड़ रखते हैं। उन्हें इन विषयों पर विशेषज्ञ लेखक माना जाता है। उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का प्रशंसक और उनका करीबी भी माना जाता है।

कोचर ने 2013-14 में एक किताब लिखी थी, जो बहुत चर्चित हुई थी। किताब का नाम था मोदीनोमिक्स (मोदी का अर्थशास्त्र)। यह किताब मोदी के पीएम बनने से ठीक पहले लिखी गई थी, जिसमें मोदी द्वारा गुजरात के सीएम रहते वक्त हासिल की गई आर्थिक, औद्योगिक, व्यापारिक उपलब्धियों की जबरदस्त तरीके से तारीफें की गई थीं।

मोदी को तब भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार चेहरा घोषित कर इलेक्शन कैम्पेन पूरे देश में चलाया हुआ था। उस वक्त वसुंधरा राजे राजस्थान की सीएम थीं। तब उन्होंने अप्रेल-मई (2014) में सचिवालय के सभी आईएएस अफसरों को यह किताब बंटवाई थी। कोचर ने उसके बाद वसुंधरा राजे की शासन व्यवस्था पर भी पीपुल फर्स्ट: ई गवर्नेन्स ऑफ राजे नामक किताब भी लिखी थी।

इस किताब को राजे ने जुलाई-2018 में रीलीज किया था। तब राजे को बेस्ट सीएम ऑफ द ईयर का अवार्ड भी दिया गया था। कोचर ने इससे बहुत पहले मोदी पर डिजिटल इंडिया डवलप्ड इंडिया नामक किताब भी लिखी थी। कोचर की फर्म द्वारा विभिन्न राज्यों सरकारों, मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों व आला अफसरों को यह अवार्ड दिए जाते हैं।

लेखक समीर कोचर की लिखी किताब मोदीनॉमिक्स को रीलिज करते पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। साथ में खड़े हैं समीर कोचर।
लेखक समीर कोचर की लिखी किताब मोदीनॉमिक्स को रीलिज करते पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। साथ में खड़े हैं समीर कोचर।

मोदीनॉमिक्स को रीलिज किया था अरुण जेटली ने

कोचर की लिखी किताब मोदीनॉमिक्स को स्वयं मोदी द्वारा ही रीलिज किया जाना था, लेकिन किन्हीं कारणों से वे समारोह में नहीं पहुंच पाए थे। तब पूर्व वित्त मंत्री (दिवंगत) अरुण जेटली ने दिल्ली में हुए समारोह में उसे रीलीज किया था। बाद में मोदी को भी यह किताब भेंट की गई थी।

गहलोत ने राजे को मिले प्राइवेट अवार्ड की आलोचना की थी

वसुंधरा राजे को वर्ष 2006-07 यूनाइटेड नेशन्स की तरफ से वूमन टुगेदर अवार्ड मिला था। यह अवार्ड उन्हें महिलाओं को हैंडलूम उद्योग धंधों में प्रोत्साहित करने के लिए मिला था। तब गहलोत ने इस अवार्ड को प्रााइवेट संस्था द्वारा दिए जाने को लेकर राजे की आलोचना की थी। गहलोत ने कहा था कि जब आप मुख्यमंत्री होते हो तो इस तरह के अवार्ड कोई भी आपको देना चाहेगा। ऐसे में अवार्ड से मुख्यमंत्री को दूर रहना चाहिए।

मोदी ने कहा था बुके नहीं बुक का हो चलन

गुजरात में लगभग 12 वर्ष मुख्यमंत्री रहने के दौरान नरेन्द्र मोदी ने स्वागत समारोह आदि में बुके (फूलों के गुलदस्ते) लेने-देने के लिए अफसरों को मना किया हुआ था। उन्होंने बुके के बजाए बुक लेने-देने का फैसला किया था।

इधर राजस्थान में चल रही भाजपा की बुक पॉलिटिक्स

राजस्थान में इन दिनों भाजपा किताबों के जरिए भी अपने राजनीतिक विचारों को आगे बढ़ा रही है। हाल ही पार्टी ने मोदी-@ 20 नामक किताब को प्रदेश भर में वितरित भी करवाया है और इसे लेकर कई जगहों पर कार्यक्रम भी किए हैं। यब बुक अब तक 10 हजार से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, नेताओं, शिक्षकों, पत्रकारों, प्रबुद्धजनों, शोधार्थियों, छात्रों तक पहुंच चुकी है।

इन कार्यक्रमों के समन्वयक पार्टी के वरिष्ठ विधायक व पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी को बनाया गया है। किताब में देश के विभिन्न कार्यक्षेत्रों के एक्सपर्ट लोगों जैसे लता मंगेशकर, पी. वी. सिंधु, सुधा कृष्ण मूर्ति आदि के लिखे लेख शामिल हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया है। वर्ष 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा की इस बुक पॉलिटिक्स को खासी सराहना भी मिल रही है।

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