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जीटीबी ट्रस्ट पर आरोप: बिल्डिंगों का सीएलयू, लेबर सेस और कंपाउंडिंग फीस नहीं दी, रिपोर्ट में खुलासा

भास्कर संवाददाता| लंबी/मलोट जीटीबी एजुकेशनल ट्रस्ट मलोट व जीटीबी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन छापियांवाली मलोट एक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 07, 2018, 02:05 AM IST

भास्कर संवाददाता| लंबी/मलोट

जीटीबी एजुकेशनल ट्रस्ट मलोट व जीटीबी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन छापियांवाली मलोट एक बार फिर आरोपों के घेरे में घिरता नजर आ रहा है। मकान निर्माण और शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव की ओर से जारी हुई रिपोर्ट के तहत यह सामने आया है कि संस्था ने न तो बिल्डिंग बनाने से पहले सीएलयू लिया, न लेबर सेस दिया व न ही कंपाउंडिंग फीस जमा करवाई है। शिकायतकर्ता प्रेम सिंह भाटी वासी अमरपुरा(अबोहर) द्वारा की शिकायत की प्राप्त की रिपोर्ट के माध्यम से खुलासा हुआ है कि जीटीबी एजुकेशनल ट्रस्ट मलोट व जीटीबी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन छापियांवाली मलोट द्वारा वर्ष 2005 के बाद बनी बिल्डिंगों का सीएलयू, लेबर सैस व कंपाउंडिंग फीस देना आवश्यक था, परंतु ट्रस्ट द्वारा यह न देने के कारण सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया है। शिकायतकर्ता ने सबूत के रूप में वह फोटोकॉपी भी दी, जिसके तहत ट्रस्ट की बिल्डिंगें वर्ष 2011 के दौरान बनने के आरोप लगाए गए हैं व रिपोर्ट में आरोप सही पाए हैं।

2005 के बाद बनी इमारतों के लिए सीएलयू की जरूरत थी

शिकायतकर्ता द्वारा आईकेजी पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी जालंधर द्वारा जीटीबी छापियांवाली के चेयरमैन को जारी हुए पत्र की कॉपी भी दी है, जिसमें बताया गया है कि सीएलयू नहीं दिया व जल्द दिया जाए। इस पड़ताल के माध्यम से यह भी पता चला कि वर्ष 2015 के दौरान ट्रस्ट के चेयरमैन द्वारा यूनिवर्सिटी को दिए हल्फनामे में जो पंजाब सरकार के नोटिफिकेशन का हवाला देकर छूट लेने की बात की है वह भी झूठी है, क्योंकि वर्ष 2005 के बाद बनी इमारतों के लिए सीएलयू की जरूरत थी। पड़ताल में बताया कि शिकायतकर्ता प्रेम सिंह भाटी द्वारा वर्ष 2010-2011 के गूगल स्नैप शॉट से यह साबित हुआ है कि उक्त बिल्डिंग वर्ष 2005 के बाद ही बनी है। जिसके तहत शिकायतकर्ता द्वारा लगाए कथित आरोप सबूतों के आधार पर साबित होते है। (मिंटू गुरूसरिया/जसपाल मान)

जीटीबी कॉलेज की बिल्डिंग।

डायरेक्टर ने कहा- 2005 से पहले बनी है बिल्डिंग

ट्रस्ट के डायरेक्टर राहुल मल्होत्रा ने कहा कि यह बिल्डिंगें वर्ष 2005 से पहली बनी है। दूसरी ओर महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी बठिंडा के इंचार्ज अशोक गोयल ने कहा कि मान्यता प्राप्त करने के लिए वैसे तो सख्त नियम है, परंतु फिर भी वह मामले की पड़ताल करेंगे। उन्होंने कहा कि उक्त पूरा मामला उनकी यूनिवर्सिटी बनने से पहले का है, क्योंकि उनकी यूनिवर्सिटी वर्ष 2015 में बनी है व उस समय उन्हें पीटीयू के काफी कॉलेज बने बनाए मिले हैं।

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