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नवरात्र के पांचवें दिन स्कंद माता की पूजा-अर्चना

वीरवार को फिरोजपुर शहर व छावनी के मंदिरों में मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना विधि-विधान से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 23, 2018, 02:05 AM IST

वीरवार को फिरोजपुर शहर व छावनी के मंदिरों में मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की गई। स्कंदमाता को नारंगी रंग की पोशाक धारण कराई गई और माता रानी को केले का भोग लगाया गया। मां का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता के नाम से विख्यात है। देवी स्कंदमाता कार्तिकेय और गणेश की मां हैं।

गणेश जी मानस पुत्र हैं और कार्तिक जी गर्भ से उत्पन्न हुए। तारकासुर का वध करने के लिए देवी पार्वती व शंकर जी ने विवाह किया। उनसे कार्तिकेय उत्पन्न हुए और उन्होंने ताड़कासुर का अंत किया। स्कंद कुमार की मां होने के कारण ही देवी पार्वती स्कंदमाता कही गईं। कार्तिकेय को स्कंद कुमार भी कहा जाता है। मंदिर देवी द्वार, सनातन धर्म मंदिर तथा श्री कृष्ण द्वार मंदिर में नवरात्र को लेकर हर दिन संर्कीतन चल रहा है।

आज होगी मां के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा अर्चना: मां के छठे स्वरूप कात्यायनी के इस रूप के प्रगट होने की बड़ी ही अद्भुत कथा है। माना जाता है कि देवी के इसी स्वरूप ने महिषासुर का मर्दन किया था। देवीभागवत पुराण के अनुसार देवी के इस स्वरूप की पूजा गृहस्थों और विवाह के इच्छुक लोगों के लिए बहुत ही फलदायी है।

इस तरह देवी का छठा स्वरूप कहलाया कात्यायनी : मंदिर श्री कृष्ण द्वार के पुजारी राकेश वशिष्ठ ने बताया कि महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया। महर्षि कात्यायन के नाम पर ही देवी का नाम कात्यायनी हुआ। मां कात्यायनी अमोद्य फलदायी हैं। यह दानवों, असुरों और पापी जीवधारियों का नाश करने वाली देवी कहलाती है ।

मां कात्यायनी को शहद युक्त पान पसंद : नवरात्र के छठे दिन लाल रंग के वस्त्र पहनें। यह रंग शक्ति का प्रतीक होता है। मां कात्यायनी को मधु यानी शहद युक्त पान बहुत पसंद है। इसे प्रसाद स्वरूप अर्पण करने से देवी अति प्रसन्न होती हैं। (नरेश कुमार)

मंदिर श्री कृष्ण द्वार में संर्कीतन करते हुए मां अंबे का जय घोष करती महिलाएं।

प्राचीन श्री गौशाला मंदिर में माता की चौकी सजाई

गिद्दड़बाहा|स्थानीय प्राचीन श्री गौशाला मंदिर में नवरात्र पर्व पर बुधवार रात्रि को अशोक गर्ग पप्पू पंजाब बीज भंडार वालों के परिवार की ओर से चौथे दिन की चौकी मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कुष्मांडा को समर्पित की गई। भजन गायक सुरेन्द्र चंचल अबोहर ने मां भगवती का गुणगान कर श्रद्धालुओं को निहाल किया। पुजारी विजय शर्मा ने कहा कि अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली व सूर्यलोक में रहने की क्षमता रखने वाली देवी कुष्मांडा की आराधना करने से भक्तों के रोग व शोक का नाश होता है, भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी कुष्मांडा अपना आशीर्वाद दे श्रद्धालु को सुख समृद्धि व उन्नति प्रदान करती हैं व श्रद्धा भाव से आराधना करने पर आयु, यश, बल व परमपद की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रवीण पौनी, तिलोक सिंगला, मोहित सिंगला, पुरुषोत्तम, संजू, सुरेश कुमार व हरिराम मित्तल के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे । (गोबिंद गुप्ता)

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