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श्रीराम और हनुमान के जीवन प्रसंग सुनकर श्रद्धाल मंत्रमुग्ध

श्री मोहन जगदीश्वर आश्रम कनखल हरिद्वार के श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरि ने प्रभु श्री राम...

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2018, 02:05 AM IST
श्रीराम और हनुमान के जीवन प्रसंग सुनकर श्रद्धाल मंत्रमुग्ध
श्री मोहन जगदीश्वर आश्रम कनखल हरिद्वार के श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरि ने प्रभु श्री राम चंद्रजी व हनुमान जी की महिमा का बखान करते हुए कहा कि दुनिया में अनेकों भक्त ऐसे होंगे जिनके बिगड़े कार्य प्रभु श्री रामचंद्र जी की कृपा से बन गए होंगे। मगर प्रभु श्री रामचंद्र के हर कार्य बिगड़े कार्य या कठिन से कठिन कार्य को सरल बनाने में उनके भक्त हनुमान जी का बहुत बड़ा हाथ रहा है। हनुमान जी अपने प्रभु की सेवा व उनके द्वारा कोई भी आज्ञा देने से पूर्व ही मुश्किल से मुश्किल कार्य को पलक झपकते ही कर डालते थे। दिव्यानंद जी महाराज ने यह विचार अबोहर रोड स्थित श्री मोहन जगदीश्वर दिव्य आश्रम में बुधवार को आयोजित श्री सुंदर कांड पाठ व श्री रामायण पाठों के समापन के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग कार्यक्रम एवं भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं के विशाल जनसमूह के समक्ष व्यक्त किए। स्वामी दिव्यानंद जी ने श्रद्धालुओं को माघ महोत्सव, श्री रामायण पाठ एवं श्री सुंदर कांड पाठ संपन्न होने पर शुभकामनाएं भेंट की। वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सहयोगियों व श्रद्धालुओं को उपहार भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर मंदिर प्रांगण श्री रामचंद्र और वीर बजरंगी के जयकारों से गूंज उठा। बड़ी गिनती में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर स्वामी दिव्यानंद जी एवं विवेकानंद जी से आर्शीवाद प्राप्त किया। विवेकानंद जी ने भी प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए श्री रामचंद्र जी व उनके परम भक्त हनुमान जी के जीवन पर प्रसंग सुना श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया।

वहीं श्रद्धालुओं ने श्री हनुमान चालीसा पाठ करते हुए वीर बजरंगी की कृपा दृष्टि प्राप्त की। विदाई सत्संग के बाद स्वामी दिव्यानंद व विवेकानंद गिरि जी शाम चार बजे मुक्तसर से जलालाबाद के लिए प्रस्थान कर गए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से गुरुजी को विदाई देकर रवाना किया। (अमित अरोड़ा)

प्रवचन सुनते श्रद्धालु। दूसरी ओर श्रद्धालुओं को उपहार भेंट करते स्वामी दिव्यानंद जी।

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