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पारंपरिक उत्साह से मनाया महाशिवरात्रि का पर्व

महाशिवरात्रि उत्सव को लेकर शहर के विभिन्न मंदिर एवं शिवालय दिन भर शिव भोले के जयकारों से गूंजते रहे। शहर के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 14, 2018, 02:05 AM IST

महाशिवरात्रि उत्सव को लेकर शहर के विभिन्न मंदिर एवं शिवालय दिन भर शिव भोले के जयकारों से गूंजते रहे। शहर के विभिन्न मंदिरों में महाशिवरात्रि पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। श्रद्धालु सुबह करीब चार बजे ही शिव पूजा के लिए मंदिरों में उमड़ने लगे। बाद दोपहर तक पूजन का सिलसिला जारी रहा। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, मिठाई, फल, भांग, धतूरा, बेल पत्र से पूजन किया।

श्रद्धालुओं ने दिन भर महाशिवरात्रि का व्रत भी रखा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर शिव चालीसा पाठ भी किए। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिरों को फूलों से सुंदर ढंग से सजाया गया था। शहर के श्री राम भवन, श्री श्याम मंदिर, श्री रघुनाथ मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, महादेव मंदिर, शक्ति मंदिर श्री मनन धाम, बाबा कांशी प्रसाद शिव मंदिर, गीता भवन दुर्गा मंदिर, श्री नर्मदेश्वर शिव मंदिर, प्राचीन शनि मंदिर आदि में दिन भर शिव पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। विभिन्न जगहों पर भांग का अटूट प्रसाद भी बांटा गया।

दूसरी ओर भुल्लर कलोनी स्थित मां चिंतपूर्णी मंदिर में पं. पूरन चंद्र जोशी ने विचार प्रकट करते कहा की महाशिवरात्रि के दिन कथा का श्रवण करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है तथा स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इस दिन शिव चालीसा का पाठ भी करना चाहिए। उन्होंने कहा की एक बार एक भील, जोकि शिकार खेलकर अपने बच्चों का पेट भरता था। शिवरात्रि के दिन वह जंगल में शिकार की तलाश में गया, परंतु उसे सुबह तक कोई शिकार नहीं मिला। सांयकाल के वक्त शिवरात्रि का पहला पहर था। वह बेल के वृक्ष पर चढ़ गया उसने एक हिरणी को पानी पीते हुए देखा तो उसने धनुष बाण निकाला तो वृक्ष का पत्ता हिला तो नीचे शिवलिंग बना था उस जल गिरा व पत्ते भी गिरे तो उसकी अनजाने में उसकी एक पहर की पूजा हो गई। हिरणी को तीर मारने वाला ही था तो हिरणी बोली मुझे एक बार छोड़ दो मैं एक बार घर जाकर अपने पति व बच्चों को मिलकर आउं। इस पर भील को दया की भावना आई उसने उसे जाने दिया।

तो वह पुन: वृक्ष पर बैठ गया तो इसी प्रकार तीन ओर हिरण आए तथा उसकी तीन पहर की पूजा संपन्न हो गई। उधर सभी हिरण अपने वायदे के मुताबिक उसके पास आने लगे। तो भील ने फिर धनुष उठाया तो फिर पत्ता व जल गिरा उसकी चौथे पहर की पूजा भी अनजाने में हो गई। अब भील को ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी तो उसने उन सब को छोड़ दिया। पं. जोशी ने कहा कि अनजाने में की गई पूजा का भी भगवान शिव फल देते हैं। इस दौरान पं. जोशी जी ने शिव चालीसा का जाप भी कराया। इस अवसर पर गुरमीत सिंह, गुरमीत कौर कोटकपूरा, रवि कुमार, विजय कुमार, अमित कुमार, मोतीलाल, हरीश जोशी आदि उपस्थित थे। (अमित अरोड़ा)

मुक्तसर में महाशिवरात्रि पर मंदिरों में शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।

मंदिरों में गूंजते रहे भोले बाबा के जयकारे

मलोट|मंगलवार को महाशिवरात्रि मौके शहर के विभिन्न मंदिरों व शिवालय में भोले बाबा के नाम की धूम मची रही। मंदिरों में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालु शिव पूजा को लिए उमड़ने लगे और देर शाम तक मंदिरों का माहौल शिवमयी हुआ रहा। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर दूध,दही, घी, शक्कर, शहद, मिठाई, फल, भांग, धतूरा, बेल पत्र, गंगाजल चढ़ा जहां पूजन किया। (जसपाल)

महाशिवरात्रि पर किए पंचाक्षर मंत्र के जाप

मुक्तसर|शहर के विभिन्न मंदिरों में महाशिवरात्रि पर सत्संग व भजन संकीर्तन कार्यक्रम हुए। अबोहर रोड स्थित श्री मोहन जगदीश्वर दिव्य आश्रम में स्वामी दिव्यानंद महाराज ने सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया। आश्रम की सत्संग मंडली ने भजन ‘भोले को कैसे मैं मनाऊं रे मेरा भोला न माने...’, ‘शिव की महिमा है निराली...’ आदि भजन गाए। उधर, श्री राम भवन में महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में पंचाक्षर मंत्र जाप व संकीर्तन कार्यक्रम हुआ। इस दौरान जहां प्रवक्ता रमन जैन ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा सुनाई। (अमित अरोड़ा)

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