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जीवन को चलाने के लिए प्रेम है महामंत्र : दिव्यानंद

प्रेम परमात्मा है, हर इंसान के जीवन में प्रेम होना आवश्यक है। जीवन को चलाने के लिए प्रेम महामंत्र है। यह बात श्री...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 02:00 AM IST
जीवन को चलाने के लिए प्रेम है महामंत्र : दिव्यानंद
प्रेम परमात्मा है, हर इंसान के जीवन में प्रेम होना आवश्यक है। जीवन को चलाने के लिए प्रेम महामंत्र है। यह बात श्री रघुनाथ मंदिर में आयोजित सत्संग के समापन समारोह में श्री मोहन जगदीश्वर आश्रम कनखल हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरि महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि एक दिल से दूसरे दिल को जोड़ने वाली वस्तु प्रेम है। जब हम संसार में रहते हैं तो बहुत सारे रिश्ते बनाते हैं। हर रिश्ते को आपस में जोड़ता है प्रेम। आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है प्रेम। प्रेम के ढाई अक्षरों में पूरा संसार समाया हुआ है। सभी धर्म, सभी मजहब, सभी गुरु प्राणी मात्र से प्रेम करने का संदेश देते हैं। चाहे एक गृहस्थी है चाहे एक संन्यासी, सबके जीवन मे प्रेम होना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि हर वस्तु में हरि का वास है। चाहे मनुष्य हो चाहे पेड़-पौधे या अन्य वस्तु। प्रत्येक में प्रभु वास करते हैं। इसलिए कभी किसी प्राणी, मनुष्य या जीव पर अत्याचार न करें। (अमित अरोड़ा)

स्वामी दिव्यानंद और महेशानंद को दी विदाई

श्रद्धालुओं ने बुधवार को अबोहर रोड स्थित श्री मोहन जगदीश्वर दिव्य आश्रम में से स्वामी दिव्यानंद गिरि महाराज एवं स्वामी महेशानंद महाराज को नम आंखों से विदाई दी। वह यहां से कोटकपूरा के लिए प्रस्थान कर गए हैं। कोटकपूरा के शहीद भगत सिंह रोड स्थित श्री दिव्य कृष्णा आश्रम, निकट जैतो चुंगी में 17 से 21 मई तक चलने वाले भक्ति वेदांत सम्मेलन में स्वामी दिव्यानंद महाराज श्रद्धालुओं को प्रवचनों की अमृतवर्षा में स्नान कराएंगे। ये सम्मेलन रोजाना रात आठ से दस बजे तक हुआ करेगा।

श्री रघुनाथ मंदिर में सत्संग कार्यक्रम संपन्न

प्रवचन करते हुए स्वामी दिव्यानंद व स्वामी महेशानंद।

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