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हम अमृत्व की संतानें हैं, हमें विकारों की दलदल से बचना होगा : साध्वी मीना

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान अबोहर की ओर से स्थाई आश्रम श्री गंगानगर रोड अबोहर में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का...

Dainik Bhaskar

Apr 10, 2018, 02:05 AM IST
हम अमृत्व की संतानें हैं, हमें विकारों की दलदल से बचना होगा : साध्वी मीना
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान अबोहर की ओर से स्थाई आश्रम श्री गंगानगर रोड अबोहर में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान की ओर से साध्वी मीना भारती ने कहा कि मानव अपने शरीर के भरण-पोषण में ही लगा रहता है। शरीर से अत्यधिक लगाव की यह प्रवृति उसे शास्वत सत्य से दूर करती है। ऐसे मानव के लिए परमात्मा का साक्षात्कार सहज नहीं है। यह लगाव उसे अंत में विपत्ति की ओर ले जाता है।

साध्वी ने बताया की शरीर एक पिंजरा है जिसमें आत्मा निवास करती है, जब पिंजरे से पंछी उड़ जाता है तो पिंजरे की कोई कीमत नहीं रहती, क्योंकि मनुष्य नश्वर है, उसे यह मानव शरीर छोड़ना ही है। केवल आत्मा ही अनश्वर है। मानव जीवन सबसे मूल्यवान है केवल इसी मानव योनि में ईश्वर का साक्षात्कार संभव है। परंतु मनुष्य इस बात को भुलाकर भोग-विलास व माया में लीन हो जाता है, तो यही जीवन ही उसके लिए समस्या का कारण बन जाता है। सारांश के रूप में साध्वी ने बताया कि हम अमृत्व की संतानंे हैं, मनुष्य माया के प्रभाव से इस विषय विकारों की दलदल में फंस कर रह जाता है। हमें इन सब से ऊपर उठकर उस ईश्वर का साक्षात्कार करना होगा। तभी यह मानव जीवन सार्थक हो सकता है। इस अवसर पर साध्वी पूनम भारती ने मधुर भजनों का गायन किया।

अबोहर में आयोजित सत्संग कार्यक्रम प्रवचन का आनंद लेते श्रद्धालु।

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