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55% केस जांच में रद्द, 4 केस पास हुए पर उनके फंड लैप्स हो गए, दावा 5500 की कर्जमाफी का

मुख्यालयों पर मुआवजे के लिए दिए गए 55 फीसदी आवेदन तो जांच में ही रद्द हो चुके हैं।

Danik Bhaskar | Jan 07, 2018, 05:31 AM IST

बठिंडा. किसानों को दी जाने वाली मुफ्त बिजली और कर्जमाफी की तरह उनकी आत्महत्याओं के मुआवजे को लेकर भी सरकार सवालों के घेरे में है। सरकार का दावा है कि पंजाब में कर्जमाफी के बाद आत्महत्या करने वाले करीब 5500 किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाएगा। मगर वास्तविकता यह है कि आत्महत्याओं के मामलों में किसान परिवारों की तरफ से जिला मुख्यालयों पर मुआवजे के लिए दिए गए 55 फीसदी आवेदन तो जांच में ही रद्द हो चुके हैं।

जो केस पास हुए उनमें से कुछ को ही मुआवजा मिला है, जबकि कई केस पास होने के बाद भी पीड़ितों को राशि नहीं मिली। बठिंडा डीसी दफ्तर के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2013 से अब तक यहां 383 किसान आत्महत्या के केस मुआवजे के लिए आए, जिनमें से 64 को ही मुआवजा मिला। बाकी केसों की जांच-पड़ताल के लिए कृषि विभाग की 15 बैठकें हुईं, जिनमें 206 केस रद्द कर दिए गए। 99 केस अभी लंबित सूची में है और 14 पीएयू में जांच के लिए भेजे हुए हैं। 4 किसान परिवारों को आत्महत्या का 3-3 लाख रुपये मुआवजा देने के केस 2016 में पास हुए, मगर 31 मार्च 2017 तक इसे पास ही नहीं किया गया। इससे फंड लैप्स हो गए और अब तक दोबारा नहीं मिले। 2017 में 2 किसान परिवारों को मुआवजा पास किया गया, मगर उसका बजट ही अभी तक नहीं मिला। 13 सितंबर 2017 को सरकार को केस भेजा गया, मगर अभी तक जवाब नहीं आया।

- लुधियाना स्थित पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, सन 2000 से लेकर 2010 तक पंजाब में 6926 किसानों और खेत मजदूरों ने सुइसाइड किया। इनमें सर्वाधिक सुइसाइड 6128 तो अकेले मालवा पट्टी के जिलों से हैं। इनमें से 90 फीसदी कॉटन के काश्तकार थे और 5 एकड़ से कम जमीन वाले थे।

- पीएयू की टीम 2010 से लेकर अब तक के सुइसाइड पर सर्वे कर रही है, जिसमें पंजाब को 3 हिस्सों में बांटा गया है। पटियाला की टीम ने रिपोर्ट दे दी है, जिसमें 737 सुइसाइड रिपोर्ट हुए हैं। मालवा और माझा-दोआबा की रिपोर्ट आना शेष हैं। मगर 2000 से 2011 तक के सुइसाइड को आधार माना जाए तो पिछले 7 साल में मालवा में 4 हजार से ज्यादा किसानों ने सुइसाइड किया है। 2017 से अब तक संगरूर में सबसे ज्यादा सुसाइड हुए हैं। जबकि मानसा में 55, बरनाला में 17, मुक्तसर में 6, मोगा में 12, फाजिल्का में 5 किसान सुसाइड कर चुके हैं।

पानी खींचने के लिए ट्रैक्टर खरीदा, कर्ज से पानी में कूदकर मर गया, अब ट्रैक्टर चलाने वाला कोई नहीं

संगरूर के गांव घराचो में हमारा भी हंसता खेलता परिवार था। बेटी राजबीर और बेटा कुलबीर कॉलेज में पढ़ते थे। घर की डेढ़ एकड़ जमीन पर पति लाभ सिंह खेती करते। फसल के लिए आढ़ती से कुछ कर्ज लिया था। चुका नहीं पाए तो आढ़ती ने कृषि के लिए और कर्ज लेने को जमीन ठेके पर लेकर खेती की सलाह दी। 5 एकड़ जमीन 52 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर ले ली। मगर इसे सींचने के लिए पानी कहां से लाते। ट्यूबवेल के लिए पावरकॉम को अप्लाई किया। कनेक्शन नहीं मिला। पड़ोसी जमींदार से पानी मांगा तो उसने पानी खींचने के लिए अपना इंजन लाने को कहा। पानी काफी नीचे था। पानी खींचने के लिए 6 लाख रुपये कर्ज लेकर 55 हार्सपावर का ट्रैक्टर पति ने खरीदा। खेत को पानी तो मिला, मगर उसे खींचने में ट्रैक्टर के डीजल से और कर्ज चढ़ गया। बदले में जमींदार के खेत में लेबर अलग से करनी पड़ी। फसल पकी तो प्रति एकड़ गेंहू का 35 हजार और धान का 40 हजार रुपये मिला, यानी 75 हजार रुपये आमदन। लेकिन 52 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेका और 20 हजार रुपये प्रति एकड़ खेती का खर्च मिलाकर 72 हजार तो चले भी गए। मेरे पति ने पूरा साल जो मेहनत की, उससे घर का खर्च तक नहीं निकला। ट्रैक्टर और आढ़ती का कर्ज भी नहीं चुका पाए। इसी टेंशन में मेरे पति ने नहर में छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली। जेब से कुछ निकला तो बस आढ़ती के कर्ज की पर्चियां। घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा तो बेटे कुलबीर का कॉलेज छूट गया। वह घर चलाने के लिए स्कूल वैन चलाने लगा। बेटी को भी आर्थिक हालात से मजबूर होकर कॉलेज छोड़ना पड़ा। अब डेढ़ एकड़ जमीन है, घर में ट्रैक्टर है। मगर खेती करने वाला कोई किसान नहीं।


-गांव घराचो के आत्महत्या करने वाले किसान लाभ सिंह की पत्नी, शमिंदर कौर की जुबानी

कभी जमींदारों में होती थी गिनती, आज खेतों में दिहाड़ी लगाती हैं कर्मजीत कौर
मानसा के गांव कोट धर्मू की सुरजीत कौर(60) के परिवार की कभी जमींदारों में गिनती होती थी। 15 एकड़ जमीन उसके पति लाभ सिंह को हुई कैंसर की बीमारी का इलाज करवाने में पहले गिरवी हुई फिर बिक गई और पति भी नहीं बच पाए। पौना एकड़ जमीन बची, जिस पर खेती कर घर चलाने के लिए बेटे रणजीत ने प्रयास किया। मगर फसल खराब हुई तो 7 लाख रुपए कर्ज चढ़ गया। कर्ज न चुका पाने से रणजीत ने भी फंदा लगा लिया। अब घर में बुजुर्ग सुरजीत कौर रणजीत की पत्नी कर्मजीत कौर, मंदबुद्धि पोता और एक बेटी है। कर्मजीत कौर खेतों में दिहाड़ी कर परिवार को पालती है।

किसान जो कर्ज से दुखी होकर आत्महत्याएं कर चुके हैं, उनके पूरे कर्जे माफ किए जाएंगे। चाहे यह राशि कितनी भी ज्यादा क्यों न हो। ऐसे किसानों की संख्या करीब 5500 है। खुदकुशी करने वाले किसानों का पूरा कर्जा माफ करने पर करीब 200 करोड़ का खर्च आएगा। -डी.पी रेड्‌डी, एडीशनल चीफ सेक्रेटरी, को-ऑपरेशन